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झारखंड

लिट्टीपाड़ा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र का उपायुक्त ने किया निरीक्षण, स्वास्थ्य सेवाओं व कुपोषण उपचार व्यवस्था पर विशेष जोर।

स्वच्छता, दवाओं की उपलब्धता, डॉक्टरों की उपस्थिति और मातृ-शिशु देखभाल को लेकर दिए सख्त निर्देश।

लिट्टीपाड़ा पाकुड़। उपायुक्त मेघा भारद्वाज ने गुरुवार को लिट्टीपाड़ा प्रखंड स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र का निरीक्षण कर वहां उपलब्ध स्वास्थ्य सेवाओं, स्वच्छता व्यवस्था तथा मरीजों को दी जा रही सुविधाओं की विस्तृत समीक्षा की। निरीक्षण के दौरान उन्होंने संबंधित अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश देते हुए स्वास्थ्य सेवाओं में किसी भी प्रकार की लापरवाही नहीं बरतने की हिदायत दी।

निरीक्षण के क्रम में उपायुक्त ने प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी से अस्पताल की वर्तमान स्थिति की जानकारी ली। उन्होंने चिकित्सकों की रोस्टर के अनुसार ड्यूटी, जीवन रक्षक दवाओं की उपलब्धता, ओपीडी व्यवस्था, प्रसव कक्ष, चिकित्सक कक्ष, चिकित्सा उपकरणों की कार्यशीलता तथा आपातकालीन सेवाओं का बारीकी से जायजा लिया।

अस्पताल परिसर की स्वच्छता, डॉक्टरों एवं स्वास्थ्यकर्मियों की उपस्थिति तथा मरीजों को उपलब्ध कराई जा रही सुविधाओं पर विशेष ध्यान देते हुए उपायुक्त ने व्यवस्था को और बेहतर बनाने के निर्देश दिए। इस दौरान उन्होंने यह भी जानकारी ली कि दिनभर में कितने मरीजों का इलाज किया गया। चिकित्सक ने बताया कि गुरुवार को कुल 31 मरीजों का उपचार किया गया।

उपायुक्त ने कहा, “स्वास्थ्य सेवाओं का उद्देश्य केवल इलाज करना नहीं है, बल्कि मरीजों को विश्वास, सहारा और सम्मान देना भी है।” उन्होंने सभी स्वास्थ्यकर्मियों को संवेदनशीलता और जिम्मेदारी के साथ कार्य करने की सलाह दी।

निरीक्षण के दौरान उपायुक्त ने औषधि वितरण केंद्र एवं कुपोषण उपचार केंद्र का भी दौरा किया। कुपोषण उपचार केंद्र में उन्होंने बच्चों की माताओं से बातचीत कर बच्चों के पोषण और देखभाल से जुड़ी जानकारी प्राप्त की। उन्होंने माताओं को जागरूक करते हुए कहा कि जन्म के तुरंत बाद शिशु को मां का दूध अवश्य पिलाना चाहिए और कम-से-कम छह माह तक केवल स्तनपान कराना अत्यंत आवश्यक है। इससे बच्चों का शारीरिक और मानसिक विकास बेहतर होता है तथा कुपोषण की संभावना कम होती है।

अंत में उपायुक्त ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि कुपोषित बच्चों की नियमित निगरानी सुनिश्चित की जाए तथा उन्हें समय पर उचित उपचार और पर्याप्त पोषण उपलब्ध कराया जाए, ताकि क्षेत्र में कुपोषण की समस्या को प्रभावी ढंग से नियंत्रित किया जा सके।

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