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झारखंड

छात्राओं ने जाना मिट्टी की सेहत का विज्ञान, जिला मिट्टी जाँच प्रयोगशाला के शैक्षणिक भ्रमण से मिली वैज्ञानिक खेती की अहम जानकारी।

पीएम श्री उत्क्रमित नगरपालिका कन्या उच्च विद्यालय की छात्राओं ने मृदा परीक्षण की पूरी प्रक्रिया को नजदीक से समझा, किसानों से हर तीन वर्ष में मिट्टी की जाँच कराने की अपील।

साहिबगंज। कृषि विज्ञान के प्रति विद्यार्थियों में रुचि विकसित करने तथा मृदा संरक्षण और वैज्ञानिक खेती के महत्व से परिचित कराने के उद्देश्य से शनिवार को पीएम श्री उत्क्रमित नगरपालिका कन्या उच्च विद्यालय, साहिबगंज की कक्षा 9 एवं 10 की कुल 12 छात्राओं ने जिला मिट्टी जाँच प्रयोगशाला, साहिबगंज का शैक्षणिक भ्रमण किया। भ्रमण के दौरान छात्राओं ने मिट्टी परीक्षण की वैज्ञानिक प्रक्रिया को नजदीक से देखा और मृदा स्वास्थ्य, संतुलित उर्वरक उपयोग तथा आधुनिक कृषि तकनीकों की विस्तृत जानकारी प्राप्त की।

प्रयोगशाला में सहायक मिट्टी रसायनज्ञ ने छात्राओं को खेत से मिट्टी का वैज्ञानिक तरीके से नमूना एकत्र करने की विधि, प्रयोगशाला में परीक्षण की पूरी प्रक्रिया तथा मृदा स्वास्थ्य कार्ड के आधार पर रासायनिक एवं जैविक उर्वरकों के संतुलित उपयोग की जानकारी विस्तार से दी। उन्होंने बताया कि मृदा परीक्षण के माध्यम से किसानों को उनकी भूमि की वास्तविक आवश्यकता के अनुरूप उर्वरकों के प्रयोग की वैज्ञानिक सलाह दी जाती है, जिससे उत्पादन बढ़ने के साथ-साथ मिट्टी की उर्वरा शक्ति भी लंबे समय तक सुरक्षित रहती है।

विशेषज्ञों ने जानकारी दी कि जिला मिट्टी जाँच प्रयोगशाला में मिट्टी के 12 महत्वपूर्ण मानकों की जाँच की जाती है। इनमें पीएच (pH), विद्युत चालकता (EC), नाइट्रोजन, फास्फोरस, पोटाश, सल्फर, जिंक, कॉपर, लोहा, मैंगनीज, मोलिब्डेनम तथा बोरॉन शामिल हैं। इन सभी मानकों की रिपोर्ट के आधार पर किसानों को उनकी भूमि के अनुसार उर्वरकों के संतुलित एवं वैज्ञानिक उपयोग की सलाह दी जाती है।

इस अवसर पर विशेषज्ञों ने कहा कि प्रत्येक किसान को हर तीन वर्ष में कम-से-कम एक बार अपने खेत की मिट्टी की जाँच अवश्य करानी चाहिए। मृदा परीक्षण के आधार पर अनुशंसित मात्रा में उर्वरकों का उपयोग करने से फसल उत्पादन में उल्लेखनीय वृद्धि होती है, उत्पादन लागत कम होती है तथा मिट्टी की गुणवत्ता और दीर्घकालिक उर्वरता भी बनी रहती है।

अधिकारियों ने छात्राओं को सरकार द्वारा संचालित “खेत बचाओ अभियान” की जानकारी भी दी। उन्होंने बताया कि इस अभियान के माध्यम से किसानों को मृदा संरक्षण, भूमि की उर्वरता बनाए रखने तथा संतुलित उर्वरक उपयोग के प्रति लगातार जागरूक किया जा रहा है, ताकि कृषि को अधिक टिकाऊ और लाभकारी बनाया जा सके।

जिला कृषि पदाधिकारी ने छात्राओं से आह्वान किया कि वे अपने-अपने खेतों की मिट्टी का नमूना जाँच के लिए प्रयोगशाला में भेजने के लिए अपने अभिभावकों को प्रेरित करें तथा आसपास के किसानों को भी निःशुल्क मृदा परीक्षण की सुविधा के बारे में जानकारी दें। उन्होंने बताया कि जिला मिट्टी जाँच प्रयोगशाला, साहिबगंज में किसानों के लिए मिट्टी परीक्षण की सुविधा पूरी तरह निःशुल्क उपलब्ध है, जिसका अधिक से अधिक लाभ उठाना चाहिए।

कार्यक्रम के दौरान जिला योजना एवं मूल्यांकन पदाधिकारी, जिला मिट्टी जाँच प्रयोगशाला के सभी कर्मी तथा विद्यालय के शिक्षकगण भी उपस्थित रहे। सभी ने छात्राओं को वैज्ञानिक खेती, पर्यावरण संरक्षण और मृदा स्वास्थ्य के प्रति जागरूक रहने का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के शैक्षणिक भ्रमण विद्यार्थियों के ज्ञानवर्धन के साथ-साथ उन्हें कृषि विज्ञान से जोड़ने का प्रभावी माध्यम हैं और भविष्य में भी ऐसे कार्यक्रम नियमित रूप से आयोजित किए जाने चाहिए।

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