मुख्यमंत्री आवास में हेमंत सोरेन से आलमगीर आलम की मुलाकात, झारखंड की राजनीति में फिर तेज हुई चर्चाएं।
सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिलने के बाद पहली बड़ी राजनीतिक मुलाकात, निसात आलम, तनवीर आलम और कल्पना सोरेन भी रहे मौजूद।

रांची। झारखंड की राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। झारखंड कांग्रेस के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व मंत्री आलमगीर आलम ने शुक्रवार को मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से रांची स्थित मुख्यमंत्री आवास में मुलाकात की। इस दौरान उनकी पत्नी एवं पाकुड़ विधानसभा क्षेत्र की विधायक निसात आलम, झारखंड कांग्रेस प्रदेश महासचिव तनवीर आलम तथा गांडेय विधायक कल्पना सोरेन भी मौजूद रहीं।
मुख्यमंत्री आवास में हुई इस मुलाकात की तस्वीर सामने आने के बाद राज्य के राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं का दौर तेज हो गया है। राजनीतिक विश्लेषक इस मुलाकात को झारखंड की बदलती राजनीतिक परिस्थितियों और आगामी रणनीति से जोड़कर देख रहे हैं।

हालांकि, पूर्व मंत्री आलमगीर आलम ने इस मुलाकात को केवल शिष्टाचार भेंट बताया है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री से औपचारिक मुलाकात हुई है और फिलहाल किसी राजनीतिक निर्णय या नई रणनीति को लेकर कोई चर्चा नहीं हुई है।
गौरतलब है कि हाल ही में सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिलने के बाद आलमगीर आलम लगातार राजनीतिक और सामाजिक गतिविधियों के केंद्र में बने हुए हैं। उनके रांची स्थित आवास पर झारखंड सरकार के कई मंत्री, विधायक, सांसद तथा झामुमो और कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं का पहुंचना लगातार जारी है। नेताओं और समर्थकों ने उनसे मुलाकात कर उनका हालचाल जाना और शुभकामनाएं दीं।

शुक्रवार को मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से हुई मुलाकात के बाद अब यह चर्चा और तेज हो गई है कि क्या आलमगीर आलम जल्द ही झारखंड की राजनीति में फिर से सक्रिय भूमिका निभा सकते हैं। राजनीतिक हलकों में इसे भविष्य की संभावित राजनीतिक गतिविधियों का संकेत माना जा रहा है।
वहीं, आलमगीर आलम ने कहा कि वह पहले अपना मेडिकल चेकअप करवाएंगे। इसके बाद पाकुड़ जाकर अपने क्षेत्र के कार्यकर्ताओं और समर्थकों से मुलाकात करेंगे। उन्होंने कहा कि कार्यकर्ताओं से बातचीत के बाद ही आगे किसी निर्णय पर विचार किया जाएगा।

इधर, उनके समर्थकों और कांग्रेस कार्यकर्ताओं की ओर से लगातार यह मांग उठ रही है कि आलमगीर आलम एक बार फिर सक्रिय राजनीति में पूरी मजबूती के साथ वापसी करें। अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि आने वाले दिनों में झारखंड की राजनीति किस दिशा में आगे बढ़ती है।




