विश्व ओजोन दिवस पर साहिबगंज महाविद्यालय में जागरूकता कार्यक्रम।
ओजोन परत के संरक्षण के साथ पर्यावरण संतुलन बनाए रखने का दिया संदेश, अधिक से अधिक पौधे लगाने और प्लास्टिक का उपयोग कम करने की अपील।

साहिबगंज। विश्व ओजोन दिवस के अवसर पर साहिबगंज महाविद्यालय के लाइफ साइंस विभाग के तत्वावधान में बुधवार को ओजोन परत के संरक्षण एवं पर्यावरण जागरूकता को लेकर विशेष जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों एवं आम लोगों के बीच ओजोन परत के महत्व, इसके क्षरण के कारणों तथा पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाना रहा। कार्यक्रम के दौरान वक्ताओं ने ओजोन परत की उपयोगिता पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए इसके संरक्षण के लिए सामूहिक प्रयास की आवश्यकता पर जोर दिया।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि साहिबगंज महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. रंजीत कुमार सिंह थे। उन्होंने कहा कि पर्यावरण संरक्षण किसी एक दिवस तक सीमित रहने वाला विषय नहीं है, बल्कि यह प्रत्येक व्यक्ति की दैनिक जिम्मेदारी है। पृथ्वी के पर्यावरणीय संतुलन और जीव-जगत की सुरक्षा के लिए प्राकृतिक संसाधनों का विवेकपूर्ण उपयोग तथा पर्यावरण के अनुकूल जीवनशैली अपनाना आवश्यक है।

कार्यक्रम की शुरुआत करते हुए लाइफ साइंस विभाग के सहायक प्राध्यापक डॉ. वसीम रजा ने विश्व ओजोन दिवस की महत्ता पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि मानव गतिविधियों तथा कुछ हानिकारक रसायनों के कारण ओजोन परत को नुकसान पहुंचता है। ऐसे में लोगों के बीच पर्यावरण संरक्षण को लेकर जागरूकता बढ़ाना समय की आवश्यकता है। उन्होंने विद्यार्थियों से ओजोन संरक्षण का संदेश अपने परिवार और समाज के प्रत्येक वर्ग तक पहुंचाने का आह्वान किया।
लाइफ साइंस विभाग के सहायक प्राध्यापक डॉ. दिवाकर प्रसाद निराला ने ओजोन परत के क्षरण और इसके संभावित दुष्प्रभावों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि ओजोन परत पृथ्वी को सूर्य की हानिकारक पराबैंगनी किरणों से बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। इसके क्षरण से इन किरणों का प्रभाव बढ़ सकता है, जिसका प्रतिकूल असर मानव स्वास्थ्य के साथ-साथ पर्यावरण पर भी पड़ सकता है। उन्होंने विद्यार्थियों को ओजोन संरक्षण के प्रति सजग रहने की सलाह दी।
सहायक प्राध्यापिका डॉ. रश्मि रानी ने पर्यावरण संरक्षण में ओजोन परत की भूमिका पर प्रकाश डालते हुए कहा कि ओजोन परत की सुरक्षा केवल मानव जीवन के लिए ही आवश्यक नहीं है, बल्कि इसका संबंध पौधों, फसलों और जलीय जीवों के संरक्षण से भी है। पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखने के लिए प्रकृति के प्रत्येक घटक की रक्षा करना जरूरी है।

बीएड विभाग के सहायक प्राध्यापक प्रो. नितिन कुमार घोष ने मानव जीवन और प्राकृतिक संतुलन के महत्व पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि प्रकृति में होने वाले बदलावों से मनुष्य को सीख लेने की आवश्यकता है। पर्यावरण को सुरक्षित रखने के लिए प्रत्येक व्यक्ति को अपने दैनिक जीवन में जिम्मेदार व्यवहार अपनाना चाहिए।
लाइफ साइंस विभाग के सहायक प्राध्यापक डॉ. अक्षय कुमार वर्मा ने विद्यार्थियों को सरल एवं सहज भाषा में ओजोन परत के निर्माण, महत्व तथा इसके क्षरण के कारणों की जानकारी दी। उन्होंने ओजोन परत के संरक्षण के लिए आवश्यक उपायों पर भी विस्तार से चर्चा की। उन्होंने विद्यार्थियों से पर्यावरण संरक्षण संबंधी संदेश को परिवार और समाज तक पहुंचाने की अपील की।
मुख्य अतिथि एवं महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. रंजीत कुमार सिंह ने अपने संबोधन में साहिबगंज की ऐतिहासिक राजमहल पहाड़ियों का उल्लेख करते हुए क्षेत्र की प्राकृतिक एवं ऐतिहासिक विरासत से विद्यार्थियों को परिचित कराया। उन्होंने कहा कि साहिबगंज की प्राकृतिक संपदा और ऐतिहासिक धरोहर को सुरक्षित रखना भी हमारी सामूहिक जिम्मेदारी है।
उन्होंने कहा कि पृथ्वी और पर्यावरण को सुरक्षित रखने के लिए लोगों को अपनी जीवनशैली में छोटे-छोटे सकारात्मक बदलाव लाने होंगे। उन्होंने अधिक से अधिक पौधे लगाने, प्राकृतिक संसाधनों का विवेकपूर्ण उपयोग करने तथा दैनिक जीवन में प्लास्टिक के अनावश्यक उपयोग को कम करने की अपील की।
प्राचार्य ने प्लास्टिक के विकल्प के रूप में जूट से निर्मित उपयोगी वस्तुओं के इस्तेमाल को बढ़ावा देने पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि पर्यावरण संरक्षण के लिए केवल सरकारी प्रयास पर्याप्त नहीं हैं। विद्यार्थियों, शिक्षकों और आम नागरिकों को भी अपनी जिम्मेदारी समझते हुए सक्रिय भूमिका निभानी होगी।
कार्यक्रम के दौरान अर्थशास्त्र विभाग की सहायक प्राध्यापिका डॉ. रूपा के साथ लाइफ साइंस विभाग की छात्राओं स्नेहा कुमारी, प्रीति कुमारी एवं अमीना हाशमी तथा छात्र शुभम कुमार ने भी ओजोन परत के महत्व, इसके क्षरण के कारणों और संरक्षण के उपायों पर अपने विचार व्यक्त किए।

विद्यार्थियों ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण को केवल पाठ्यक्रम तक सीमित नहीं रखा जाना चाहिए, बल्कि इसे जन-जागरूकता अभियान से जोड़कर समाज के प्रत्येक वर्ग तक पहुंचाने की जरूरत है। उन्होंने पर्यावरण के प्रति सकारात्मक सोच विकसित करने तथा प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण में युवाओं की भागीदारी बढ़ाने पर जोर दिया।
कार्यक्रम में वक्ताओं ने विद्यार्थियों को पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक करते हुए प्राकृतिक संसाधनों का संतुलित उपयोग, हरियाली को बढ़ावा देने, प्रदूषण नियंत्रण तथा प्लास्टिक के अनावश्यक इस्तेमाल को कम करने का संदेश दिया।
कार्यक्रम के अंत में सभी अतिथियों, प्राध्यापकों एवं विद्यार्थियों के प्रति आभार व्यक्त किया गया। धन्यवाद ज्ञापन के साथ जागरूकता कार्यक्रम का समापन हुआ।




