राजमहल के सांसद विजय हांसदा को अयोग्य घोषित करने की मांग, लोकसभा अध्यक्ष को भेजा गया पत्र।
संत कुमार घोष ने उठाए धर्म परिवर्तन और ST आरक्षित सीट के प्रतिनिधित्व पर सवाल, संवैधानिक कार्रवाई की मांग।

साहिबगंज राजमहल। राजमहल लोकसभा संसदीय क्षेत्र के सांसद विजय हांसदा को संसद सदस्य के रूप में अयोग्य घोषित करने, पद से निष्कासित करने तथा राजमहल (अनुसूचित जनजाति) आरक्षित सीट से उनकी सदस्यता समाप्त करने की मांग को लेकर लोकसभा अध्यक्ष को एक पत्र भेजा गया है। यह पत्र केंद्रीय अध्यक्ष संत कुमार घोष की ओर से प्रेषित किया गया है।
संत कुमार घोष ने बताया कि राजमहल लोकसभा सीट अनुसूचित जनजाति (ST) के लिए आरक्षित है। उनके अनुसार संविधान में यह व्यवस्था मूल प्रकृति-पूजक आदिवासी समाज के सामाजिक एवं राजनीतिक प्रतिनिधित्व की रक्षा के उद्देश्य से की गई है।

पत्र में आरोप लगाया गया है कि सांसद विजय हांसदा का वैवाहिक जीवन एवं व्यक्तिगत आचरण ईसाई रीति-रिवाजों के अनुसार संचालित हो रहा है। पत्र के अनुसार फरवरी 2020 में उनका पहला विवाह ईसाई परंपरा के अनुसार संपन्न हुआ था। वर्ष 2024 में उनकी दिवंगत पत्नी का अंतिम संस्कार भी बरहरवा में ईसाई रीति-रिवाजों के तहत किया गया। इसके अलावा हाल ही में उनका दूसरा विवाह भी रांची स्थित संत पॉल कैथेड्रल चर्च में पादरी की उपस्थिति में ईसाई परंपरा के अनुसार संपन्न होने का उल्लेख किया गया है।

संत कुमार घोष ने पत्र में यह भी दावा किया है कि यदि किसी व्यक्ति ने धर्म परिवर्तन कर अपनी मूल आदिवासी संस्कृति एवं परंपराओं को त्याग दिया है, तो उसका अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित सीट का प्रतिनिधित्व करना मूल आदिवासी समाज के अधिकारों का हनन है। उन्होंने आरोप लगाया कि ऐसी स्थिति में संबंधित व्यक्ति को अल्पसंख्यक और अनुसूचित जनजाति—दोनों वर्गों का लाभ मिलने की संभावना बनती है, जिससे वास्तविक हकदारों के साथ अन्याय होता है।
पत्र के माध्यम से संत कुमार घोष ने लोकसभा अध्यक्ष से मांग की है कि प्रस्तुत तथ्यों की निष्पक्ष समीक्षा कर आवश्यक कानूनी एवं संवैधानिक प्रक्रिया के तहत सांसद विजय हांसदा की पात्रता की जांच कराई जाए तथा यदि नियमों के अनुरूप आवश्यक हो तो उन्हें राजमहल (ST) आरक्षित सीट से अयोग्य घोषित करने की कार्रवाई की जाए।



