बरहरवा रेलवे स्टेशन से तीन नाबालिग बालकों का रेस्क्यू, दिल्ली पलायन की तैयारी नाकाम।
आरपीएफ की सतर्कता से बचाए गए तीन नाबालिग, मजदूरी करने दिल्ली जाने की थी योजना।

बरहरवा साहिबगंज। बरहरवा रेलवे स्टेशन पर आरपीएफ द्वारा चलाए जा रहे विशेष चेकिंग एवं गश्त अभियान के दौरान तीन नाबालिग बालकों को रेस्क्यू कर सुरक्षित संरक्षण में भेजा गया। सभी बालक अपने अभिभावकों को बिना सूचना दिए घर से निकलकर दिल्ली जाने की तैयारी में थे, जहां वे मजदूरी करने का इरादा रखते थे।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, बुधवार की सुबह लगभग 05:05 बजे आरपीएफ पोस्ट बरहरवा के निरीक्षक संजीव कुमार एवं कांस्टेबल मृत्युंजय कुमार स्टेशन परिसर में असामाजिक तत्वों, यात्री अपराधों तथा अन्य आपराधिक गतिविधियों की रोकथाम के उद्देश्य से सघन चेकिंग एवं गश्त अभियान चला रहे थे। इसी दौरान प्लेटफॉर्म संख्या-01 के न्यू फरक्का छोर स्थित द्वितीय यात्री शेड के समीप तीन नाबालिग बालक संदिग्ध अवस्था में अकेले घूमते हुए दिखाई दिए।
आरपीएफ टीम ने संदेह होने पर तीनों को रोककर पूछताछ की। पूछताछ में बालकों ने अपना नाम क्रमशः कैलाश पहाड़िया (14 वर्ष), मोतीलाल पहाड़िया (15 वर्ष) एवं जमला पहाड़िया (14 वर्ष) बताया। तीनों झारखंड के गोड्डा जिले के निवासी हैं।
विस्तृत पूछताछ में बालकों ने बताया कि वे अपने अभिभावकों को बिना सूचना दिए घर से निकल आए थे और दिल्ली जाकर गन्ने के खेतों में मजदूरी करने के उद्देश्य से बरहरवा रेलवे स्टेशन पहुंचे थे। बालकों की उम्र कम होने और उनकी सुरक्षा को देखते हुए आरपीएफ ने तत्काल उन्हें अपने संरक्षण में लिया।
रेस्क्यू किए गए बालकों को आरपीएफ पोस्ट बरहरवा लाया गया, जहां बाल कल्याण से जुड़ी संस्था मंथन, राजमहल साहिबगंज को सूचना दी गई। सूचना मिलने पर संस्था की प्रतिनिधि अनाशु मलाकर आरपीएफ पोस्ट पहुंचीं और तीनों बालकों की काउंसलिंग की।
सभी आवश्यक कानूनी प्रक्रियाओं एवं औपचारिकताओं को पूरा करने के बाद तीनों नाबालिग बालकों को उनके संरक्षण, देखभाल तथा अग्रेतर आवश्यक कार्रवाई के लिए मंथन, राजमहल (साहिबगंज) के सुपुर्द कर दिया गया।
बरहरवा रेलवे स्टेशन पर आरपीएफ द्वारा लगातार चलाए जा रहे जागरूकता एवं निगरानी अभियानों का सकारात्मक परिणाम सामने आ रहा है। समय रहते की गई कार्रवाई से न केवल तीन नाबालिगों को संभावित शोषण और जोखिम से बचाया गया, बल्कि बाल पलायन एवं मानव तस्करी जैसी गंभीर समस्याओं पर भी प्रभावी अंकुश लगाने में सफलता मिली है।
आरपीएफ ने अभिभावकों से अपील की है कि वे अपने बच्चों की गतिविधियों पर सतत निगरानी रखें तथा किसी भी संदिग्ध परिस्थिति की सूचना तत्काल रेलवे सुरक्षा बल अथवा स्थानीय प्रशासन को दें।


