राजमहल के सरस्वती शिशु विद्या मंदिर में “दादा-दादी एवं नाना-नानी सम्मान समारोह” का भव्य आयोजन।
संस्कार, सम्मान और पारिवारिक मूल्यों की अनूठी मिसाल बना विद्यालय का वंदना सभा कार्यक्रम।

राजमहल साहिबगंज। राजमहल नगर पंचायत स्थित सरस्वती शिशु विद्या मंदिर में वंदना सभा के अवसर पर “दादा-दादी एवं नाना-नानी सम्मान समारोह” का भव्य एवं भावनात्मक आयोजन किया गया। कार्यक्रम में विद्यालय परिवार द्वारा बुजुर्गों के सम्मान और भारतीय संस्कृति के पारिवारिक मूल्यों को जीवंत रूप से प्रस्तुत किया गया।
कार्यक्रम का शुभारंभ विद्यालय के प्रधानाचार्य मिथिलेश कुमार सिंह, अभिभावक स्वेता एवं अन्य अतिथियों द्वारा दीप प्रज्वलित एवं पुष्पार्चन कर किया गया। इसके बाद विद्यालय के कक्षा अरुण से लेकर कक्षा दशम तक के भैया-बहनों के दादा-दादी तथा नाना-नानी का पारंपरिक रीति-रिवाज से स्वागत किया गया।

विद्यालय परिवार की ओर से सभी बुजुर्गों के चरण धोकर, पुष्प अर्पित कर एवं सम्मान देकर भारतीय संस्कृति में बुजुर्गों के महत्व को दर्शाया गया। समारोह में उपस्थित अभिभावकों एवं अतिथियों ने इस पहल की सराहना करते हुए इसे नई पीढ़ी में संस्कार निर्माण की प्रेरणादायक पहल बताया।
अपने संबोधन में प्रधानाचार्य मिथिलेश कुमार सिंह ने कहा कि विद्या मंदिर केवल शिक्षा का केंद्र नहीं, बल्कि संस्कार, अनुशासन और सर्वांगीण विकास का मंदिर है। यहां बच्चों को जीवन को सही दिशा देने के साथ-साथ परिवार एवं समाज के प्रति सम्मान और जिम्मेदारी का भाव भी सिखाया जाता है।

कार्यक्रम के दौरान विद्यालय के भैया-बहनों द्वारा रंगारंग सांस्कृतिक प्रस्तुतियां एवं आकर्षक नृत्य प्रस्तुत किए गए, जिसने उपस्थित लोगों का मन मोह लिया। बच्चों की प्रस्तुति पर अभिभावकों और बुजुर्गों ने तालियों की गड़गड़ाहट से उनका उत्साहवर्धन किया।
समारोह के अंत में सभी दादा-दादी एवं नाना-नानी को शरबत पिलाकर सम्मानपूर्वक विदाई दी गई। कार्यक्रम में लगभग 200 दादा-दादी एवं नाना-नानी उपस्थित रहे।

इस अवसर पर विद्यालय के सभी आचार्य, दीदी, भैया-बहन एवं अभिभावक बड़ी संख्या में मौजूद रहे। कार्यक्रम का सफल मंच संचालन दीदी स्वेता द्वारा किया गया।




