जवाहर नवोदय विद्यालय, साहिबगंज में एचपीवी टीकाकरण को लेकर जागरूकता एवं माइक्रोप्लानिंग बैठक आयोजित।
किशोरियों को सर्वाइकल कैंसर से बचाव हेतु शत-प्रतिशत टीकाकरण सुनिश्चित करने पर जोर।

साहिबगंज। किशोरियों को सर्वाइकल कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से सुरक्षित रखने के उद्देश्य से शनिवार को जवाहर नवोदय विद्यालय में एचपीवी (ह्यूमन पैपिलोमा वायरस) टीकाकरण कार्यक्रम के सफल संचालन हेतु जागरूकता एवं माइक्रोप्लानिंग बैठक का आयोजन किया गया। बैठक में विद्यालय के प्रधानाचार्य, शिक्षकगण, स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी एवं संबंधित कर्मी उपस्थित रहे।
बैठक के दौरान एचपीवी वैक्सीन के महत्व, सर्वाइकल कैंसर से बचाव में इसकी भूमिका तथा आगामी टीकाकरण अभियान की विस्तृत रूपरेखा पर गंभीरता से चर्चा की गई। स्वास्थ्य विभाग की ओर से बताया गया कि किशोरियों को समय पर एचपीवी वैक्सीन दिए जाने से भविष्य में सर्वाइकल कैंसर के खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है।
बैठक में विद्यालय स्तर पर लक्षित आयु वर्ग की किशोरियों की पहचान कर उनकी लाइन लिस्टिंग तैयार करने पर विशेष बल दिया गया। साथ ही यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया कि कोई भी पात्र छात्रा टीकाकरण से वंचित न रहे।
विद्यालय प्रबंधन एवं शिक्षकों को छात्राओं तथा उनके अभिभावकों के बीच जागरूकता बढ़ाने, टीकाकरण से जुड़ी भ्रांतियों को दूर करने तथा टीकाकरण दिवस पर आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी सौंपी गई।

कार्यक्रम में डॉ. किरण माला, WHO आरआरटी टीम तथा आरसीएच सहायक द्वारा एचपीवी वैक्सीन से संबंधित तकनीकी जानकारी विस्तारपूर्वक साझा की गई। उन्होंने उपस्थित शिक्षकों एवं विद्यालय प्रबंधन को टीकाकरण अभियान के दौरान अपनाई जाने वाली प्रक्रियाओं, सुरक्षा उपायों एवं समन्वय व्यवस्था के बारे में आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।
विशेषज्ञों ने बताया कि एचपीवी टीकाकरण किशोरियों के स्वास्थ्य सुरक्षा की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है और इसके प्रति समाज में जागरूकता बढ़ाना बेहद आवश्यक है।
बैठक के अंत में सभी संबंधित विभागों एवं विद्यालय प्रबंधन से आपसी समन्वय स्थापित कर अभियान को सफल बनाने की अपील की गई। अधिकारियों ने कहा कि समय पर टीकाकरण से लक्षित किशोरियों को स्वास्थ्य सुरक्षा का लाभ मिलेगा तथा भविष्य में गंभीर बीमारियों से बचाव संभव हो सकेगा।
स्वास्थ्य विभाग ने यह भी स्पष्ट किया कि एचपीवी टीकाकरण कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए विद्यालय, अभिभावक एवं स्वास्थ्य कर्मियों की सहभागिता अत्यंत महत्वपूर्ण है।



