जलवायु परिवर्तन और एल नीनो से निपटने को साहिबगंज में किसानों का महासम्मेलन, केवीके में जागरूकता अभियान व मिलेट मिशन पंजीकरण शिविर आयोजित।
कृषि मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की ने ऑनलाइन संबोधन में जल संरक्षण, मेड़बंदी और मिलेट्स की खेती पर दिया जोर, कृषि वैज्ञानिकों ने आधुनिक तकनीकों से किसानों को किया जागरूक।

साहिबगंज। जलवायु परिवर्तन और संभावित एल नीनो के बढ़ते प्रभावों के बीच किसानों को वैज्ञानिक एवं जलवायु-अनुकूल खेती की तकनीकों से जोड़ने के उद्देश्य से मंगलवार को कृषि विज्ञान केंद्र (केवीके), साहिबगंज में जिला स्तरीय “कृषि तकनीकों के माध्यम से कृषि पर एल नीनो के प्रभाव के प्रबंधन हेतु जागरूकता अभियान सह झारखंड राज्य मिलेट मिशन योजना अंतर्गत किसान पंजीकरण शिविर” का सफल आयोजन किया गया। कार्यक्रम में जिले के विभिन्न प्रखंडों से पहुंचे लगभग 40 किसानों ने भाग लिया और कृषि वैज्ञानिकों एवं विशेषज्ञों से बदलते मौसम के अनुरूप खेती की नवीनतम तकनीकों की विस्तृत जानकारी प्राप्त की।
कार्यक्रम के दौरान झारखंड सरकार की कृषि, पशुपालन एवं सहकारिता मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की ने ऑनलाइन माध्यम से किसानों को संबोधित करते हुए कहा कि जलवायु परिवर्तन के इस दौर में कृषि को सुरक्षित और टिकाऊ बनाने के लिए खेतों की मेड़बंदी, वर्षा जल संरक्षण तथा मोटे अनाज (मिलेट्स) की खेती को प्राथमिकता देना समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि मिलेट्स कम पानी में भी बेहतर उत्पादन देने वाली फसलें हैं, जो भविष्य की खाद्य एवं पोषण सुरक्षा सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी। उन्होंने किसानों से झारखंड राज्य मिलेट मिशन योजना के तहत अधिक से अधिक पंजीकरण कराकर सरकार की योजनाओं का लाभ उठाने की अपील की।

ऑनलाइन संबोधन के दौरान बिरसा कृषि विश्वविद्यालय, रांची के कुलपति डॉ. एस. सी. दुबे ने किसानों को मौसम की अनिश्चितताओं को ध्यान में रखते हुए ऊपरी भूमि में दलहन, मक्का एवं सब्जियों की खेती तथा निचली भूमि में 15 जुलाई तक धान की रोपाई सुनिश्चित करने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि वैज्ञानिक पद्धति से समय पर खेती करने पर प्रतिकूल मौसम की परिस्थितियों में भी बेहतर उत्पादन प्राप्त किया जा सकता है।
प्रसार शिक्षा निदेशालय, बिरसा कृषि विश्वविद्यालय के निदेशक डॉ. डी. के. शाही ने किसानों को मृदा स्वास्थ्य के महत्व से अवगत कराते हुए नियमित रूप से मिट्टी की जांच कराने और उसी के अनुरूप उर्वरक एवं फसल प्रबंधन अपनाने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि संतुलित पोषण प्रबंधन से उत्पादन बढ़ाने के साथ-साथ खेती की लागत में भी कमी लाई जा सकती है।
कृषि विज्ञान केंद्र, साहिबगंज की प्रधान वैज्ञानिक डॉ. सुप्रिया सिंह ने कहा कि जलवायु परिवर्तन और एल नीनो जैसी परिस्थितियों से निपटने के लिए फसल विविधीकरण सबसे प्रभावी उपाय है। उन्होंने किसानों को केवल एक फसल पर निर्भर रहने के बजाय विभिन्न प्रकार की फसलों की खेती अपनाने की सलाह दी, जिससे जोखिम कम होगा और आय के नए स्रोत विकसित होंगे।

इस अवसर पर जिला उद्यान पदाधिकारी अमितेश रंजन ने किसानों को सब्जी एवं उद्यानिकी फसलों की उन्नत खेती, विभागीय योजनाओं तथा कम पानी में अधिक आय देने वाली तकनीकों की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने किसानों से पारंपरिक खेती के साथ-साथ बागवानी एवं सब्जी उत्पादन को अपनाकर अपनी आय बढ़ाने का आह्वान किया।
जिला मूल्यांकन पदाधिकारी अरुण भोक्ता ने मोटे अनाजों की खेती के पोषण, आर्थिक एवं पर्यावरणीय महत्व पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए कहा कि मिलेट्स भविष्य की जलवायु-अनुकूल कृषि का मजबूत आधार हैं। उन्होंने किसानों को झारखंड राज्य मिलेट मिशन योजना के तहत पंजीकरण कराकर सरकार द्वारा उपलब्ध कराई जा रही सुविधाओं एवं प्रोत्साहन राशि का लाभ लेने के लिए प्रेरित किया। कार्यक्रम के दौरान किसानों का पंजीकरण भी किया गया।
शिविर में किसानों को वैज्ञानिक खेती, जल संरक्षण, फसल विविधीकरण, जलवायु-अनुकूल कृषि तकनीकों, मृदा स्वास्थ्य प्रबंधन तथा मिलेट मिशन से संबंधित विभिन्न योजनाओं की विस्तृत जानकारी दी गई। विशेषज्ञों ने किसानों की जिज्ञासाओं का समाधान करते हुए आधुनिक कृषि पद्धतियों को अपनाने पर विशेष बल दिया।
कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य किसानों को जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों के प्रति जागरूक करना, कृषि को अधिक टिकाऊ, लाभकारी एवं आत्मनिर्भर बनाना तथा “कम पानी अधिक उत्पादन” की अवधारणा को गांव-गांव तक पहुंचाना था।

कार्यक्रम के अंत में उपस्थित किसानों ने वैज्ञानिक सलाह के अनुरूप आधुनिक कृषि तकनीकों को अपनाने तथा झारखंड राज्य मिलेट मिशन से जुड़कर कृषि को अधिक समृद्ध, सुरक्षित और आत्मनिर्भर बनाने का संकल्प लिया।




