राष्ट्रीय सुरक्षा और घुसपैठ पर लगाम के लिए संथाल परगना और गौड़ बंगा को मिलाकर बने केंद्र शासित प्रदेश : संत कुमार घोष।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर की मांग, कहा , सीमांचल योजना में संथाल परगना को भी जोड़ा जाए।

राजमहल साहिबगंज। झारखंड के संथाल परगना और पश्चिम बंगाल के गौड़ बंगा क्षेत्र में बढ़ती अवैध बांग्लादेशी घुसपैठ एवं तेजी से बदलते जनसांख्यिकीय असंतुलन को लेकर हिन्दू धर्म रक्षा मंच के केंद्रीय अध्यक्ष संत कुमार घोष ने गंभीर चिंता व्यक्त की है। इस संबंध में उन्होंने देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक महत्वपूर्ण पत्र भेजकर झारखंड के संथाल परगना एवं पश्चिम बंगाल के सीमावर्ती जिलों को मिलाकर एक नए केंद्र शासित प्रदेश (Union Territory) के गठन की मांग की है।
प्रेस को जारी बयान में संत कुमार घोष ने कहा कि झारखंड का संथाल परगना क्षेत्र, विशेषकर साहिबगंज और पाकुड़ जिला, तथा पश्चिम बंगाल का गौड़ बंगा क्षेत्र, खासकर मालदा और मुर्शिदाबाद जिला, भौगोलिक और रणनीतिक दृष्टि से अत्यंत संवेदनशील क्षेत्र हैं। उन्होंने कहा कि पिछले कई दशकों में इन इलाकों में बड़े पैमाने पर हुई अवैध घुसपैठ के कारण स्थानीय जनसांख्यिकी में चिंताजनक परिवर्तन देखने को मिला है।
उन्होंने आरोप लगाया कि आर्थिक और सामाजिक रूप से पिछड़े होने के कारण राष्ट्रविरोधी एवं असामाजिक तत्व इन क्षेत्रों का अनुचित लाभ उठा रहे हैं, जिससे राष्ट्रीय सुरक्षा के समक्ष गंभीर चुनौती उत्पन्न हो रही है।

संत कुमार घोष ने कहा कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह द्वारा बांग्लादेश सीमा से सटे सीमांचल क्षेत्र को केंद्र शासित प्रदेश बनाने की दिशा में जो योजना चल रही है, उसमें झारखंड के संथाल परगना क्षेत्र को भी अनिवार्य रूप से शामिल किया जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि यह निर्णय न केवल राष्ट्रीय सुरक्षा को सुदृढ़ करेगा, बल्कि क्षेत्र के समग्र विकास का मार्ग भी प्रशस्त करेगा।

केंद्र शासित प्रदेश बनने से होंगे ये तीन बड़े लाभ
1. राष्ट्रीय सुरक्षा होगी मजबूत
उन्होंने कहा कि बांग्लादेश की अंतरराष्ट्रीय सीमा के निकट होने के कारण यदि यह क्षेत्र केंद्र सरकार के प्रत्यक्ष नियंत्रण में आता है, तो अवैध घुसपैठ, तस्करी और अन्य गैरकानूनी गतिविधियों पर प्रभावी एवं कठोर अंकुश लगाया जा सकेगा।
2. चौमुखी और तीव्र विकास को मिलेगा बढ़ावा
संत कुमार घोष ने कहा कि केंद्र सरकार के सीधे बजटीय आवंटन से इस पिछड़े क्षेत्र में सड़क, पुल, शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार एवं आधारभूत संरचना के क्षेत्र में तेज गति से विकास कार्य संभव हो सकेंगे। इससे स्थानीय युवाओं को रोजगार के बेहतर अवसर प्राप्त होंगे।
3. कानून-व्यवस्था होगी अधिक सशक्त
उन्होंने कहा कि केंद्रीय एजेंसियों के सीधे प्रशासनिक नियंत्रण में आने से अलगाववादी एवं असामाजिक तत्वों पर प्रभावी कार्रवाई संभव होगी तथा पूरे क्षेत्र में कानून-व्यवस्था और शांति व्यवस्था को मजबूती मिलेगी।

संत कुमार घोष ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की दूरदर्शी सोच और मजबूत नेतृत्व क्षमता पर भरोसा जताते हुए कहा कि देश की संप्रभुता और अखंडता को अक्षुण्ण बनाए रखने के लिए यह निर्णय नए भारत के निर्माण में मील का पत्थर साबित हो सकता है।
उन्होंने उम्मीद जताई कि केंद्र सरकार राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े इस अत्यंत संवेदनशील विषय पर शीघ्र सकारात्मक एवं ठोस निर्णय लेगी।



