उपायुक्त दीपक कुमार दूबे ने बिरसा प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के जागरूकता रथ को हरी झंडी दिखाकर किया रवाना।

साहिबगंज। खरीफ वर्ष 2026-27 में किसानों को फसल बीमा के प्रति जागरूक करने एवं प्राकृतिक आपदा से होने वाले फसल नुकसान की स्थिति में आर्थिक सुरक्षा प्रदान करने के उद्देश्य से बिरसा प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (B-PMFBY) के तहत जागरूकता अभियान शुरू किया गया। इसी क्रम में समाहरणालय परिसर, साहिबगंज से उपायुक्त-सह-जिला दंडाधिकारी दीपक कुमार दूबे ने जागरूकता रथ को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। इस अवसर पर जिला सहकारिता पदाधिकारी महादेव मुर्मू उपस्थित रहे।
जागरूकता रथ जिले के विभिन्न क्षेत्रों में भ्रमण कर किसानों को बिरसा प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के प्रति जागरूक करेगा। रथ के माध्यम से किसानों को योजना के तहत अधिसूचित धान एवं भदई मक्का फसल का बीमा कराने के लिए प्रेरित किया जाएगा। साथ ही किसानों को योजना के लाभ, आवेदन की प्रक्रिया, आवश्यक दस्तावेज तथा आवेदन की निर्धारित समय-सीमा की जानकारी दी जाएगी।
उपायुक्त दीपक कुमार दूबे ने जिले के सभी किसान भाइयों एवं बहनों से अपील की कि प्राकृतिक आपदा अथवा अन्य कारणों से फसल को होने वाले नुकसान की स्थिति में आर्थिक सुरक्षा प्राप्त करने के लिए अपनी अधिसूचित फसल का बीमा अवश्य कराएं। उन्होंने किसानों से निर्धारित अंतिम तिथि के पूर्व आवेदन की प्रक्रिया पूरी करने का आग्रह किया।
खरीफ वर्ष 2026-27 के लिए फसल बीमा कराने की अंतिम तिथि 31 अगस्त 2026 निर्धारित की गई है। किसान अपने निकटतम CSC केंद्र, बैंक अथवा स्वयं ऑनलाइन माध्यम से फसल बीमा के लिए आवेदन कर सकते हैं।योजना के तहत किसानों को कोई प्रीमियम शुल्क नहीं देना होगा। केवल ₹1 आवेदन शुल्क देय होगा।

फसल बीमा कराने के लिए किसानों को निम्नलिखित दस्तावेज उपलब्ध कराने होंगे , किसान का आधार कार्ड, बैंक पासबुक की छायाप्रति, भूमि स्वामित्व संबंधी प्रमाण-पत्र एवं वंशावली, बटाईदार किसान की स्थिति में नोटरीकृत बटाई प्रमाण-पत्र, फसल बुआई का स्व-सत्यापित प्रमाण-पत्र, किसान का मोबाइल नंबर
जिला प्रशासन ने साहिबगंज जिले के सभी किसानों से अपील की है कि वे 31 अगस्त 2026 तक अपनी अधिसूचित फसल का बीमा अनिवार्य रूप से करा लें और बिरसा प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना का लाभ प्राप्त करें। प्रशासन का उद्देश्य अधिक से अधिक किसानों को योजना से जोड़कर प्राकृतिक आपदा से होने वाले फसल नुकसान के समय उन्हें आर्थिक सुरक्षा उपलब्ध कराना है।




