साहिबगंज में बाल संरक्षण सेवाओं को और सशक्त बनाने पर जोर, मासिक समीक्षा बैठक में अधिकारियों को मिले अहम निर्देश।
जिले के प्रत्येक बच्चे तक समयबद्ध तरीके से पहुंचे सरकारी योजनाओं का लाभ, सुरक्षा एवं पुनर्वास को दी जाए सर्वोच्च प्राथमिकता।

साहिबगंज। जिले के प्रत्येक बच्चे को सुरक्षित, संरक्षित, सम्मानजनक एवं भयमुक्त वातावरण उपलब्ध कराने तथा बाल संरक्षण सेवाओं को और अधिक प्रभावी एवं सुदृढ़ बनाने के उद्देश्य से जिला बाल संरक्षण पदाधिकारी की अध्यक्षता में जिला बाल संरक्षण इकाई कार्यालय, साहिबगंज में मासिक समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में बाल संरक्षण से जुड़ी विभिन्न योजनाओं, कार्यक्रमों एवं मामलों की विस्तृत समीक्षा करते हुए संबंधित अधिकारियों एवं कर्मियों को कई महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश दिए गए।
बैठक में जिला बाल संरक्षण इकाई, बाल कल्याण समिति (सीडब्ल्यूसी), किशोर न्याय बोर्ड (जेजेबी) के सदस्य, चाइल्ड हेल्पलाइन (डीसीपीयू एवं रेलवे) के प्रतिनिधि, सामाजिक कार्यकर्ता, बाल गृह के पदाधिकारी, जिला समन्वयक सी-3, पीसीआई-यूनिसेफ तथा अन्य संबंधित अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।
बैठक के दौरान जिला बाल संरक्षण पदाधिकारी ने कहा कि बाल संरक्षण से जुड़े सभी विभाग एवं संस्थाएं आपसी समन्वय, संवेदनशीलता एवं जवाबदेही के साथ कार्य करें। उन्होंने निर्देश दिया कि जिले के प्रत्येक जरूरतमंद एवं पात्र बच्चे तक सरकार की सभी कल्याणकारी योजनाओं का लाभ समयबद्ध एवं प्रभावी ढंग से पहुंचाया जाए, ताकि कोई भी बच्चा संरक्षण एवं पुनर्वास की सुविधाओं से वंचित न रहे।
बैठक में रेलवे चाइल्ड हेल्पलाइन, साहिबगंज के कर्मियों को निर्देश दिया गया कि वे बरहरवा रेलवे स्टेशन पर नियमित रूप से अपनी ड्यूटी निभाते हुए बच्चों की सुरक्षा एवं संरक्षण से जुड़े मामलों पर विशेष निगरानी रखें। साथ ही यह सुनिश्चित किया जाए कि चाइल्ड हेल्पलाइन द्वारा बाल कल्याण समिति के समक्ष प्रस्तुत किए जाने वाले प्रत्येक मामले के साथ परामर्श (काउंसलिंग) रिपोर्ट अनिवार्य रूप से संलग्न हो।
जिला बाल संरक्षण पदाधिकारी ने चाइल्ड हेल्पलाइन के सभी कर्मियों को उनके कार्य, दायित्व एवं उत्तरदायित्वों की विस्तार से जानकारी देते हुए कहा कि प्रत्येक मामले में बच्चे के सर्वोत्तम हित को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए। उन्होंने संवेदनशीलता, तत्परता और मानवीय दृष्टिकोण के साथ कार्य करने पर विशेष बल दिया।

बैठक में प्रायोजन (स्पॉन्सरशिप) योजना की भी विस्तृत समीक्षा की गई। संरक्षण पदाधिकारी (गैर संस्थागत देखरेख) को निर्देश दिया गया कि योजना का व्यापक प्रचार-प्रसार सुनिश्चित किया जाए, ताकि अधिक से अधिक पात्र बच्चों को इसका लाभ मिल सके। अधिकारियों को योजना के प्रति जन-जागरूकता बढ़ाने, पात्र बालक एवं बालिकाओं की पहचान करने तथा आवश्यक दस्तावेज तैयार कर बाल कल्याण समिति के माध्यम से उन्हें योजना से जोड़ने के लिए विशेष अभियान चलाने का निर्देश दिया गया।
बैठक में बताया गया कि प्रायोजन (स्पॉन्सरशिप) योजना के अंतर्गत पात्र बच्चों को तीन वर्षों तक सहायता उपलब्ध कराई जाती है। इसलिए जरूरतमंद बच्चों की पहचान कर उन्हें समय पर योजना से जोड़ना सभी संबंधित अधिकारियों एवं कर्मियों की प्राथमिक जिम्मेदारी है।
बैठक में सभी चाइल्ड हेल्पलाइन कर्मियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं, जिला बाल संरक्षण इकाई तथा बालक बाल गृह के कर्मचारियों को निर्देश दिया गया कि वे अपने-अपने मामलों की विस्तृत केस स्टडी तैयार करें। साथ ही सभी अभिलेखों का नियमित एवं व्यवस्थित संधारण सुनिश्चित करें तथा प्रत्येक मामले की निरंतर मॉनिटरिंग करते हुए आवश्यक कार्रवाई समय पर पूरी करें।
बैठक के समापन अवसर पर जिला बाल संरक्षण पदाधिकारी ने कहा कि बाल संरक्षण केवल प्रशासनिक दायित्व नहीं, बल्कि पूरे समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि सभी विभाग, संस्थाएं एवं संबंधित कर्मी आपसी समन्वय, प्रतिबद्धता और संवेदनशीलता के साथ कार्य करें, ताकि जिले का कोई भी पात्र बच्चा संरक्षण, शिक्षा, पुनर्वास एवं सरकारी योजनाओं के लाभ से वंचित न रह जाए।
उन्होंने सभी अधिकारियों एवं कर्मियों से “बाल हित सर्वोपरि” की भावना के साथ कार्य करने का आह्वान करते हुए कहा कि बाल संरक्षण तंत्र को और अधिक मजबूत, जवाबदेह एवं जन-केंद्रित बनाया जाए, जिससे प्रत्येक बच्चे का सुरक्षित एवं सम्मानजनक भविष्य सुनिश्चित किया जा सके।



