राजमहल के सरस्वती शिशु विद्या मंदिर में ‘कबाड़ से जुगाड़’ कार्यक्रम का भव्य आयोजन, विद्यार्थियों ने कबाड़ से गढ़ीं आकर्षक एवं उपयोगी कलाकृतियां।
कक्षा द्वितीय से दशम तक के विद्यार्थियों ने दिखाई रचनात्मक प्रतिभा, प्रधानाचार्य ने पर्यावरण संरक्षण एवं नवाचार का दिया संदेश।

राजमहल साहिबगंज। राजमहल स्थित सरस्वती शिशु विद्या मंदिर में शनिवार को प्रातःकालीन वंदना सभा के दौरान “कबाड़ से जुगाड़” कार्यक्रम का भव्य एवं प्रेरणादायक आयोजन किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ विद्यालय के प्रधानाचार्य मिथिलेश के सानिध्य में हुआ। इस अवसर पर विद्यालय के विद्यार्थियों ने अनुपयोगी एवं कबाड़ की वस्तुओं का रचनात्मक उपयोग करते हुए सुंदर, आकर्षक तथा उपयोगी कलाकृतियों का निर्माण कर अपनी सृजनात्मक क्षमता और नवाचारी सोच का उत्कृष्ट प्रदर्शन किया।
कार्यक्रम में कक्षा द्वितीय से लेकर कक्षा दशम तक के भैया-बहनों ने पूरे उत्साह और उमंग के साथ भाग लिया। विद्यार्थियों द्वारा तैयार की गई विभिन्न कलाकृतियों ने उपस्थित सभी लोगों को मंत्रमुग्ध कर दिया। किसी ने बेकार प्लास्टिक की बोतलों से सजावटी गमले बनाए, तो किसी ने पुराने कार्डबोर्ड, कागज, टिन, लकड़ी एवं अन्य अनुपयोगी सामग्री से उपयोगी एवं आकर्षक वस्तुओं का निर्माण कर अपनी कल्पनाशीलता और कलात्मक प्रतिभा का परिचय दिया। प्रदर्शित प्रत्येक कलाकृति में विद्यार्थियों की मेहनत, सृजनात्मकता और पर्यावरण के प्रति जागरूकता स्पष्ट रूप से दिखाई दी।
इस अवसर पर प्रधानाचार्य मिथिलेश ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि “कबाड़ से जुगाड़” जैसे कार्यक्रम बच्चों में रचनात्मक सोच, नवाचार, आत्मनिर्भरता, समस्या-समाधान की क्षमता तथा पर्यावरण संरक्षण के प्रति जिम्मेदारी की भावना विकसित करते हैं। उन्होंने कहा कि आज के समय में संसाधनों का पुनः उपयोग (री-यूज) और पुनर्चक्रण (रीसाइक्लिंग) अत्यंत आवश्यक है। यदि हम अनुपयोगी वस्तुओं का सही ढंग से उपयोग करें, तो न केवल पर्यावरण को प्रदूषण से बचाया जा सकता है, बल्कि अनेक उपयोगी वस्तुओं का निर्माण भी किया जा सकता है।
उन्होंने विद्यार्थियों से अपने दैनिक जीवन में ‘वेस्ट टू बेस्ट’ की अवधारणा को अपनाने तथा पर्यावरण संरक्षण के लिए सक्रिय योगदान देने का आह्वान किया। साथ ही उन्होंने सभी प्रतिभागी विद्यार्थियों की रचनात्मकता की सराहना करते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की।
कार्यक्रम में विद्यालय के सभी भैया-बहन, दीदी एवं आचार्यगण उपस्थित रहे। पूरे आयोजन के दौरान विद्यालय परिसर उत्साह, रचनात्मकता, नवाचार और सकारात्मक ऊर्जा से सराबोर रहा। विद्यार्थियों की उत्कृष्ट प्रस्तुतियों ने यह सिद्ध कर दिया कि सही मार्गदर्शन और रचनात्मक अवसर मिलने पर वे साधारण एवं अनुपयोगी वस्तुओं को भी अपनी प्रतिभा के बल पर उपयोगी और आकर्षक स्वरूप प्रदान कर सकते हैं।
यह कार्यक्रम विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास, पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता तथा “वेस्ट टू बेस्ट” की भावना को साकार करने की दिशा में एक अत्यंत सफल एवं प्रेरणादायक पहल साबित हुआ।



