झारखंड

पेपर लीक के विरोध में NSUI का हस्ताक्षर अभियान, शिक्षा मंत्री के इस्तीफे और NTA को भंग करने की मांग।

NEET अभ्यर्थियों एवं अभिभावकों ने बढ़-चढ़कर लिया हिस्सा, परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता सुनिश्चित करने की उठाई मांग।

साहिबगंज।राष्ट्रीय छात्र संगठन (NSUI) झारखंड के निर्देश पर रविवार को जवाहर नवोदय विद्यालय, साहिबगंज के समीप केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे तथा राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) को भंग करने की मांग को लेकर हस्ताक्षर अभियान चलाया गया। अभियान का नेतृत्व एनएसयूआई साहिबगंज के जिला अध्यक्ष थॉमस रॉबर्ट ने किया।

इस अवसर पर बड़ी संख्या में NEET अभ्यर्थियों एवं उनके अभिभावकों ने हस्ताक्षर कर अभियान को अपना समर्थन दिया। कार्यक्रम में एनएसयूआई के नगर अध्यक्ष सत्यम कुमार यादव, सक्रिय सदस्य समीर उरांव, शिवम भगत सहित संगठन के कई पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता उपस्थित रहे।

अभियान को संबोधित करते हुए जिला अध्यक्ष थॉमस रॉबर्ट ने कहा कि देश की विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में लगातार सामने आ रही पेपर लीक की घटनाएं अत्यंत चिंताजनक एवं दुर्भाग्यपूर्ण हैं। उन्होंने कहा कि छात्र देश का भविष्य हैं, लेकिन परीक्षा प्रक्रियाओं में बार-बार हो रही अनियमितताओं के कारण उनके भविष्य के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों एवं आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों से आने वाले विद्यार्थी कठिन परिस्थितियों में दिन-रात मेहनत कर प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करते हैं। ऐसे में पेपर लीक जैसी घटनाएं उनकी वर्षों की मेहनत को व्यर्थ कर देती हैं, जिससे छात्र मानसिक तनाव और निराशा का शिकार हो जाते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि कई मामलों में छात्रों द्वारा आत्मघाती कदम उठाने की खबरें सामने आती रही हैं, जो व्यवस्था की गंभीर विफलता को दर्शाती हैं।

थॉमस रॉबर्ट ने मांग करते हुए कहा कि केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान नैतिक जिम्मेदारी स्वीकार करते हुए अपने पद से इस्तीफा दें। साथ ही, राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) को भंग कर ऐसी पारदर्शी एवं जवाबदेह व्यवस्था लागू की जाए, जो विद्यार्थियों के हितों की रक्षा कर सके और परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता को बनाए रखे।

अभियान के दौरान छात्रों एवं अभिभावकों ने केंद्र सरकार से परीक्षा प्रणाली को पारदर्शी, निष्पक्ष एवं भ्रष्टाचार-मुक्त बनाने के लिए कठोर और प्रभावी कदम उठाने की मांग की। उन्होंने कहा कि प्रतियोगी परीक्षाओं की शुचिता बनाए रखना लाखों युवाओं के भविष्य और देश के शिक्षा तंत्र की विश्वसनीयता के लिए अत्यंत आवश्यक है।

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