झारखंड

धरती आबा बिरसा मुंडा के शहादत दिवस पर “आदिवासी वीरांगना फूलो-झानो पुस्तकालय सह अध्ययन केंद्र” का भव्य शुभारंभ।

शिक्षा और सामाजिक जागरूकता की दिशा में ऐतिहासिक पहल, ग्रामीण बच्चों और युवाओं को मिलेगा नया मंच।

बरहरवा साहिबगंज।बरहरवा प्रखंड अंतर्गत ढाटापाड़ा गाँव में धरती आबा बिरसा मुंडा के शहादत दिवस के पावन अवसर पर आदिवासी समाज की वीरांगना बहनों फूलो-झानो की स्मृति में “आदिवासी वीरांगना फूलो-झानो पुस्तकालय सह अध्ययन केंद्र” का भव्य शुभारंभ किया गया। कार्यक्रम पूरे उत्साह, गरिमा और सामाजिक सहभागिता के वातावरण में संपन्न हुआ।

कार्यक्रम का उद्घाटन प्रखंड विकास पदाधिकारी बरहरवा सन्नी कुमार दास, लाइब्रेरियन संजय कच्छप तथा अन्य गणमान्य अतिथियों की गरिमामयी उपस्थिति में किया गया। उद्घाटन अवसर पर उपस्थित वक्ताओं ने शिक्षा को सामाजिक परिवर्तन और समाज के सर्वांगीण विकास का सबसे सशक्त माध्यम बताते हुए इस पहल की मुक्तकंठ से सराहना की।

वक्ताओं ने कहा कि ग्रामीण एवं वंचित समुदाय के बच्चों और युवाओं को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, अध्ययन सामग्री और ज्ञान के संसाधनों से जोड़ना आज समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है। यह पुस्तकालय न केवल विद्यार्थियों को अध्ययन का बेहतर वातावरण उपलब्ध कराएगा, बल्कि उन्हें प्रतियोगी परीक्षाओं, साहित्य, सामाजिक चेतना और आधुनिक ज्ञान से भी जोड़ने का कार्य करेगा।

इस पुस्तकालय का संचालन एवं देखरेख कार्तिक उरांव यूथ क्लब, ढाटापाड़ा, बरहरवा, साहिबगंज (झारखंड) द्वारा सामुदायिक सहयोग एवं सहभागिता के आधार पर किया जाएगा। आयोजन समिति ने बताया कि पुस्तकालय को भविष्य में और अधिक समृद्ध एवं संसाधनयुक्त बनाने के लिए समाज के सभी वर्गों के सहयोग की आवश्यकता है।

पुस्तकालय के लिए नई एवं पुरानी उपयोगी पुस्तकें, प्रतियोगी परीक्षाओं की अध्ययन सामग्री, साहित्य, महापुरुषों की जीवनी, बच्चों की ज्ञानवर्धक पुस्तकें, कंप्यूटर, लैपटॉप, टैबलेट, प्रोजेक्टर, प्रिंटर, स्कैनर, फर्नीचर तथा अन्य शैक्षणिक सामग्री की आवश्यकता बताई गई। इस अवसर पर उपस्थित लोगों से अपील की गई कि वे अपनी सामर्थ्य अनुसार योगदान देकर इस जनहितकारी एवं शैक्षणिक अभियान को सफल बनाने में भागीदार बनें।

कार्यक्रम के दौरान वक्ताओं ने प्रेरणादायक शब्दों में कहा कि “एक पुस्तक, एक कुर्सी अथवा एक पुराना कंप्यूटर भी किसी बच्चे के जीवन में नई संभावनाओं के द्वार खोल सकता है।”

पुस्तकालय के शुभारंभ के साथ ही क्षेत्र में शिक्षा, ज्ञान और सामाजिक जागरूकता के एक नए अध्याय की शुरुआत मानी जा रही है। यह पहल आने वाले समय में ग्रामीण प्रतिभाओं को नई दिशा, नई पहचान और बेहतर अवसर प्रदान करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

अंत में “शिक्षा से सशक्त समाज, पुस्तकालय से सशक्त भविष्य” के संकल्प के साथ सभी नागरिकों से इस अभियान में सक्रिय भागीदारी निभाने का आह्वान किया गया।

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