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झारखंड

अल-नीनो का अलर्ट: संभावित सुखाड़ से निपटने के लिए साहिबगंज प्रशासन की बड़ी तैयारी।

किसानों के लिए जारी हुआ ‘मास्टर प्लान’, कम वर्षा की स्थिति में वैकल्पिक खेती और फसल बीमा पर जोर।

साहिबगंज। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग द्वारा खरीफ वर्ष 2026 में अल-नीनो (El-Nino) के प्रभाव के कारण सामान्य से लगभग 20 प्रतिशत कम वर्षा होने की आशंका जताए जाने के बाद साहिबगंज जिला प्रशासन पूरी तरह सक्रिय हो गया है। संभावित सुखाड़ की स्थिति से किसानों को सुरक्षित रखने के उद्देश्य से शुक्रवार को आत्मा सभागार, साहिबगंज में एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक आयोजित की गई।

यह बैठक कृषि, पशुपालन एवं सहकारिता विभाग की मंत्री के निर्देश पर जिला कृषि पदाधिकारी की अध्यक्षता में संपन्न हुई। बैठक में जिला उद्यान पदाधिकारी, भूमि संरक्षण पदाधिकारी, पशुपालन, गव्य विकास, मत्स्य एवं सहकारिता विभाग के जिला स्तरीय पदाधिकारियों के साथ-साथ सभी प्रखंडों के कृषि कर्मियों ने भाग लिया।

बैठक का मुख्य उद्देश्य संभावित सूखे की स्थिति में किसानों को राहत पहुंचाने और फसलों को सुरक्षित रखने के लिए ‘ड्राउट कंटिंजेंट प्लान’ यानी आकस्मिक सुखाड़ योजना को प्रभावी ढंग से लागू करना था।

जिला कृषि पदाधिकारी ने अधिकारियों को निर्देश देते हुए कहा कि कम वर्षा की स्थिति में किसान लंबी अवधि वाली धान की प्रजाति ‘स्वर्णा’ (MTU-7029) के बजाय कम अवधि में तैयार होने वाली किस्मों का चयन करें। इसके लिए ललाट, अभिषेक, सहभागी एवं IR-64 Drt-1 जैसी प्रजातियों को प्राथमिकता देने की सलाह दी गई।

बैठक में किसानों के लिए कई महत्वपूर्ण सुझाव जारी किए गए, जिनमें शामिल हैं, खरीफ फसलों के बिचड़ों की रोपाई 10 दिनों के अंतराल पर करें।ऊपरी भूमि में मिश्रित खेती को बढ़ावा दें।अरहर-मक्का एवं अरहर-मूंगफली जैसी फसलों की खेती अपनाएं।कम पानी में होने वाली फसलों को प्राथमिकता दें।समेकित कृषि प्रणाली अपनाकर जोखिम कम करें।

भूमि संरक्षण विभाग को निर्देश दिया गया कि पुराने तालाबों, जलाशयों एवं परकोलेशन टैंकों का शीघ्र जीर्णोद्धार कराया जाए ताकि जरूरत पड़ने पर ‘लाइफ सेविंग सिंचाई’ के लिए पर्याप्त जल उपलब्ध हो सके।प्रशासन का मानना है कि जल संरक्षण के माध्यम से सूखे की स्थिति में किसानों की फसलों को काफी हद तक बचाया जा सकता है।

पशुपालन विभाग ने जानकारी दी कि सूखे की स्थिति उत्पन्न होने पर सरकारी स्तर पर पशुओं के लिए लगभग 40 प्रतिशत चारे की व्यवस्था सुनिश्चित की जाएगी।वहीं मत्स्य विभाग ने किसानों और ग्रामीणों को वैकल्पिक आजीविका के रूप में माइनिंग पिट्स में ‘केज कल्चर’ अपनाने का सुझाव दिया। इससे कम पानी की स्थिति में भी रोजगार और आय के अवसर बनाए जा सकेंगे।

जिला प्रशासन ने किसानों से अपील की है कि वे संभावित प्राकृतिक आपदा से होने वाले नुकसान से बचने के लिए खरीफ एवं रबी फसलों का बीमा अनिवार्य रूप से कराएं।प्रशासन ने कहा कि बदलते मौसम और अल-नीनो के प्रभाव को देखते हुए वैज्ञानिक खेती, जल संरक्षण और समेकित कृषि प्रणाली ही किसानों की आर्थिक सुरक्षा का सबसे प्रभावी उपाय है।

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