मुडली मैदान में धूमधाम से मनाया गया करम महोत्सव।
पारंपरिक गीत-संगीत और नृत्य से गूंजा मैदान, प्रकृति, समृद्धि एवं सामाजिक एकता का दिया संदेश।

राजमहल साहिबगंज। राजमहल क्षेत्र के मुडली मैदान में करम महोत्सव का भव्य एवं उत्साहपूर्ण आयोजन किया गया। करम पर्व को लेकर पूरे क्षेत्र में उल्लास और उमंग का वातावरण बना रहा। आसपास के विभिन्न गांवों से बड़ी संख्या में ग्रामीण, महिला-पुरुष, बच्चे एवं युवा पारंपरिक परिधान में सज-धजकर महोत्सव में शामिल हुए। आयोजन स्थल पर देर शाम से ही लोगों की भीड़ जुटने लगी, जो कार्यक्रम आगे बढ़ने के साथ लगातार बढ़ती गई।
करम पर्व के अवसर पर विधि-विधान एवं पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ करम देवता की पूजा-अर्चना की गई। महिलाओं एवं युवतियों ने करम डाल की पूजा कर क्षेत्र की सुख-समृद्धि, खुशहाली और अच्छी फसल की कामना की। पूजा-अर्चना के दौरान पारंपरिक मान्यताओं और लोक परंपराओं का श्रद्धापूर्वक निर्वहन किया गया। इससे पूरे आयोजन स्थल पर धार्मिक आस्था के साथ-साथ लोक संस्कृति की मनमोहक छटा देखने को मिली।
पूजा-अर्चना के बाद मुडली मैदान में पारंपरिक करम गीतों और लोक संगीत का दौर शुरू हुआ। ढोल, मांदर सहित अन्य पारंपरिक वाद्य यंत्रों की थाप से पूरा मैदान गूंज उठा। करमा गीतों की मधुर धुन और सामूहिक लोकनृत्य ने वातावरण को पूरी तरह उत्सवमय बना दिया। महिला एवं पुरुषों ने सामूहिक रूप से करमा नृत्य प्रस्तुत कर अपनी समृद्ध लोक संस्कृति, परंपरा और सांस्कृतिक विरासत की जीवंत झलक पेश की।
पारंपरिक नृत्य के दौरान लोगों का उत्साह देखते ही बन रहा था। मांदर और ढोल की थाप पर ग्रामीण देर रात तक नृत्य करते रहे। बच्चों और युवाओं में भी करम महोत्सव को लेकर विशेष उत्साह देखा गया। युवाओं ने पूरे जोश के साथ कार्यक्रम में भाग लिया, वहीं बुजुर्गों और ग्रामीणों ने पारंपरिक संस्कृति से जुड़ी गतिविधियों का आनंद लिया।
मुडली मैदान में आयोजित करम महोत्सव केवल धार्मिक आयोजन तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह क्षेत्र की समृद्ध लोक संस्कृति, सामाजिक परंपरा और सामुदायिक एकजुटता का भी परिचायक बना। आसपास के कई गांवों से लोगों के पहुंचने से आयोजन स्थल पर मेले जैसा माहौल बना रहा। पारंपरिक वेशभूषा, गीत-संगीत और नृत्य ने पूरे वातावरण को आकर्षक बना दिया।
ग्रामीणों ने कहा कि करम पर्व प्रकृति के प्रति आस्था, सुख-समृद्धि, भाई-बहन के प्रेम और सामुदायिक एकजुटता का महत्वपूर्ण प्रतीक है। यह पर्व लोगों को अपनी जड़ों और लोक परंपराओं से जोड़ने का कार्य करता है। ऐसे आयोजनों से नई पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक विरासत, पारंपरिक रीति-रिवाजों और लोक कलाओं की जानकारी मिलती है तथा उन्हें आगे बढ़ाने की प्रेरणा भी मिलती है।
करम महोत्सव के दौरान पूरा मुडली मैदान पारंपरिक गीत-संगीत और नृत्य से देर रात तक गूंजता रहा। लोगों ने उत्साहपूर्वक पर्व का आनंद लिया और एक-दूसरे को करमा पर्व की शुभकामनाएं दीं। आयोजन के माध्यम से क्षेत्र में आपसी भाईचारे, सामाजिक समरसता, सांस्कृतिक सौहार्द और एकता का संदेश भी देखने को मिला।
महोत्सव ने यह संदेश दिया कि लोक पर्व और पारंपरिक सांस्कृतिक आयोजन समाज को एकजुट करने के साथ-साथ आने वाली पीढ़ियों को अपनी गौरवशाली लोक परंपराओं से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। मुडली मैदान में आयोजित करम महोत्सव इसी सांस्कृतिक चेतना और सामुदायिक सहभागिता का जीवंत उदाहरण बनकर सामने आया।


