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झारखंड

आपदा मित्रों को NDRF ने दिया आपदा प्रबंधन एवं बचाव कार्य का प्रशिक्षण।

प्राकृतिक एवं मानवजनित आपदाओं में त्वरित, सुरक्षित एवं प्रभावी राहत-बचाव कार्य के लिए क्षमता-वृद्धि पर जोर।

साहिबगंज। जिला प्रशासन के तत्वावधान में समाहरणालय सभागार में 9वीं वाहिनी एन.डी.आर.एफ., गृह मंत्रालय, भारत सरकार, बिहटा (पटना) की टीम द्वारा आपदा मित्रों के लिए आपदा प्रबंधन, खोज एवं बचाव कार्य तथा प्राथमिक उपचार से संबंधित प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। प्रशिक्षण का उद्देश्य आपदा मित्रों की क्षमता एवं दक्षता को बढ़ाना तथा उन्हें विभिन्न प्राकृतिक एवं मानवजनित आपदाओं के दौरान त्वरित, सुरक्षित और प्रभावी ढंग से राहत एवं बचाव कार्य करने के लिए तैयार करना रहा।

प्रशिक्षण के दौरान एन.डी.आर.एफ. की टीम ने बताया कि राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF) भारत सरकार का विशेष रूप से प्रशिक्षित बल है, जो बाढ़, भूकंप, चक्रवात, भूस्खलन सहित विभिन्न प्राकृतिक एवं मानवजनित आपदाओं के दौरान खोज, बचाव एवं राहत कार्य करता है। इसके अलावा डूबते या फंसे लोगों को सुरक्षित निकालना, मलबे में दबे लोगों की तलाश एवं बचाव, प्रभावित लोगों को प्राथमिक सहायता उपलब्ध कराना तथा स्थानीय प्रशासन एवं अन्य बचाव एजेंसियों के साथ समन्वय करना भी इसके प्रमुख कार्यों में शामिल है।

प्रशिक्षण में आपदा प्रबंधन की मूल अवधारणाओं के साथ आपदा से पूर्व तैयारी, आपदा के दौरान त्वरित प्रतिक्रिया तथा आपदा के बाद राहत एवं पुनर्वास की प्रक्रिया की विस्तृत जानकारी दी गई। आपदा मित्रों को विभिन्न आपात परिस्थितियों में अपनाई जाने वाली सावधानियों, खोज एवं बचाव तकनीकों तथा प्राथमिक उपचार के व्यावहारिक पहलुओं से अवगत कराया गया।

बाढ़ एवं जल आपदा के दौरान सुरक्षित स्थानों की पहचान, जलमग्न क्षेत्रों में आवागमन के दौरान बरती जाने वाली सावधानियों, प्रभावित लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने तथा डूबने की घटनाओं में बचाव के उपायों के बारे में जानकारी दी गई।

दुर्घटना अथवा आपदा के दौरान फंसे व्यक्तियों की सुरक्षित तलाश, उन्हें बाहर निकालने तथा उपलब्ध संसाधनों और बचाव उपकरणों का सुरक्षित एवं प्रभावी उपयोग करने की तकनीकों के बारे में प्रशिक्षण दिया गया।

प्रशिक्षण के दौरान घायल व्यक्ति को तत्काल प्राथमिक सहायता देने, रक्तस्राव रोकने, चोट अथवा बेहोशी की स्थिति में आवश्यक सावधानियां बरतने तथा गंभीर स्थिति में शीघ्र चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराने के संबंध में भी जानकारी दी गई।

एन.डी.आर.एफ. टीम ने स्पष्ट किया कि राहत एवं बचाव कार्य के दौरान आपदा मित्रों की स्वयं की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। जोखिम का आकलन कर सुरक्षित तरीके से बचाव कार्य करने तथा आवश्यक सुरक्षा उपकरणों का उचित उपयोग करने पर विशेष जोर दिया गया।

आपदा की स्थिति में जिला प्रशासन, पुलिस, स्वास्थ्य विभाग, अग्निशमन दल, एन.डी.आर.एफ. तथा अन्य संबंधित एजेंसियों के साथ प्रभावी समन्वय स्थापित करने की आवश्यकता बताई गई। आपदा के समय उपलब्ध संसाधनों का बेहतर उपयोग, स्थिति का त्वरित आकलन और राहत-बचाव कार्य की प्राथमिकता निर्धारित करने के बारे में भी प्रशिक्षण दिया गया।

आपदा मित्रों को स्थानीय स्तर पर आम लोगों को आपदा से बचाव के उपायों के प्रति जागरूक करने, अफवाहों से बचने तथा सही एवं प्रमाणित सूचनाएं आमजनों तक पहुंचाने के लिए प्रेरित किया गया। एन.डी.आर.एफ. टीम ने बताया कि समय पर सही निर्णय, सुरक्षित बचाव तकनीक और प्रभावी समन्वय आपदा के दौरान जनहानि को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

जिला प्रशासन द्वारा संभावित आपदाओं के दौरान त्वरित एवं प्रभावी प्रतिक्रिया सुनिश्चित करने के उद्देश्य से आपदा मित्रों की क्षमता-वृद्धि पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। प्रशिक्षित आपदा मित्र स्थानीय स्तर पर प्रशासन और आमजन के बीच महत्वपूर्ण कड़ी के रूप में कार्य करते हुए राहत-बचाव के साथ-साथ समुदाय में आपदा संबंधी जागरूकता फैलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

कार्यक्रम में उप विकास आयुक्त सतीश चंद्रा, परियोजना निदेशक आईटीडीए संजय कुमार दास, जिला शिक्षा पदाधिकारी नयन कुमार, एन.डी.आर.एफ. के सब-इंस्पेक्टर रीजनल विकास कुमार कार्तिक सहित जिले के चौकीदार एवं आपदा मित्र उपस्थित रहे।

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