सिंहदेहरी-धमनीचुआं के प्रभावित परिवारों के पुनर्वासन में नहीं होगी लापरवाही, बेहतर आवास के साथ रोजगार, शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाएं सुनिश्चित करने का निर्देश।
उपायुक्त मेघा भारद्वाज की अध्यक्षता में R&R समिति की बैठक, प्रभावित रैयत परिवारों के हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता देने पर जोर।

पाकुड़। समाहरणालय स्थित सभागार में गुरुवार को अमड़ापाड़ा अंचल के मौजा सिंहदेहरी संख्या-21 एवं धमनीचुआं संख्या-12 के प्रभावित परिवारों के पुनर्वासन एवं पुनर्व्यवस्थापन (R&R) को लेकर महत्वपूर्ण समिति की बैठक आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता उपायुक्त मेघा भारद्वाज ने की। बैठक में प्रभावित परिवारों के पुनर्वासन की कार्ययोजना, प्रस्तावित पैकेज, रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य, पेयजल, बिजली तथा अन्य मूलभूत सुविधाओं को लेकर विस्तार से चर्चा की गई।
बैठक में सारदा एजेंसी के प्रतिनिधि ने सिंहदेहरी एवं धमनीचुआं के ग्रामीणों के पुनर्वासन एवं पुनर्व्यवस्थापन के लिए तैयार की गई कार्ययोजना की विस्तृत जानकारी समिति के समक्ष प्रस्तुत की। बताया गया कि पचुवाड़ा (नॉर्थ) कोल ब्लॉक के अंतर्गत आने वाले उक्त मौजों में वेस्ट बंगाल पावर डेवलपमेंट कॉरपोरेशन लिमिटेड (WBPDCL) को कोयला उत्खनन के लिए भारत सरकार से स्वीकृति प्राप्त है। ऐसे में कोयला उत्खनन से प्रभावित होने वाले परिवारों के पुनर्वासन एवं पुनर्व्यवस्थापन की समुचित और अनुकूल व्यवस्था सुनिश्चित करना आवश्यक है।

उपायुक्त मेघा भारद्वाज ने स्पष्ट कहा कि प्रभावित परिवारों का पुनर्वासन एवं पुनर्व्यवस्थापन केवल उन्हें आवास उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं होना चाहिए। प्रभावित परिवारों को सम्मानजनक एवं बेहतर जीवन के लिए आवास के साथ शिक्षा, स्वास्थ्य, पेयजल, बिजली, रोजगार और अन्य आवश्यक मूलभूत सुविधाएं भी उपलब्ध कराई जानी चाहिए।उन्होंने प्रभावित क्षेत्रों में विद्यालय की समुचित सुविधा सुनिश्चित करने का निर्देश दिया। साथ ही बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं के लिए अस्पताल का उचित संचालन, पर्याप्त संख्या में चिकित्सकों एवं मेडिकल टीम की उपलब्धता तथा आवश्यक दवाओं की व्यवस्था सुनिश्चित करने पर विशेष जोर दिया।उपायुक्त ने कहा कि जब तक सरकारी व्यवस्थाएं पूरी तरह स्थापित नहीं हो जाती हैं, तब तक कंपनी की ओर से प्रभावित परिवारों को बिजली सहित आवश्यक मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं, ताकि पुनर्वास की प्रक्रिया के दौरान ग्रामीणों को किसी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े।
बैठक में उपायुक्त ने कंपनी प्रतिनिधियों को निर्देश दिया कि प्रभावित रैयत परिवारों के सदस्यों की शैक्षणिक योग्यता, तकनीकी दक्षता एवं कौशल के अनुरूप रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने की अनुकूल व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।उन्होंने युवाओं को रोजगार के लिए सक्षम बनाने के उद्देश्य से मल्टी स्किल सेंटर स्थापित करने की दिशा में पहल करने को कहा। उन्होंने कहा कि पुनर्वासन की प्रक्रिया ऐसी होनी चाहिए, जिससे प्रभावित परिवारों के युवाओं को स्थायी रोजगार एवं बेहतर भविष्य के अवसर मिल सकें।
मौके पर राजमहल सांसद विजय कुमार हांसदा ने भी प्रभावित परिवारों के हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता देने की बात कही। उन्होंने कहा कि विस्थापित एवं प्रभावित परिवारों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने के साथ-साथ स्थानीय लोगों और रैयत परिवारों को रोजगार के अवसरों में प्राथमिकता दी जानी चाहिए।सांसद ने अस्पतालों में पर्याप्त मात्रा में आवश्यक दवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने तथा बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करने पर विशेष जोर दिया। उन्होंने विस्थापित परिवारों को ट्रांसपोर्टिंग सहित अन्य रोजगार गतिविधियों में प्राथमिकता देने की बात कही।उन्होंने कंपनी प्रबंधन से स्वरोजगार को बढ़ावा देने के लिए ठोस कदम उठाने, स्थानीय लोगों को रोजगार से जोड़ने तथा प्रभावित गांवों में पर्याप्त एवं नियमित पेयजल की व्यवस्था सुनिश्चित करने का आग्रह किया।

कंपनी के निदेशक (खनन) चंचल गोस्वामी ने कहा कि पुनर्वासन एवं पुनर्व्यवस्थापन अधिनियम (R&R Act) के प्रावधानों के तहत अधिक से अधिक प्रभावित ग्रामीणों को इसका लाभ दिलाने के लिए कंपनी प्रतिबद्ध है।उन्होंने कहा कि प्रभावित परिवारों की वास्तविक आवश्यकताओं, स्थानीय परिस्थितियों एवं उपलब्ध संसाधनों को ध्यान में रखते हुए सुविधाएं उपलब्ध कराने की दिशा में कार्य किया जाएगा। उन्होंने ग्रामीणों की समस्याओं एवं मांगों के समाधान के लिए आवश्यक पहल का आश्वासन भी दिया।
बैठक के दौरान सिंहदेहरी एवं धमनीचुआं के ग्रामीणों तथा रैयत परिवारों की ओर से विभिन्न मांगें एवं समस्याएं समिति के समक्ष रखी गईं। उपायुक्त ने ग्रामीणों की बातों को गंभीरतापूर्वक सुना और संबंधित अधिकारियों एवं कंपनी प्रतिनिधियों को जायज मांगों पर प्राथमिकता के आधार पर आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करने का निर्देश दिया।उन्होंने कहा कि पुनर्वासन एवं पुनर्व्यवस्थापन की पूरी प्रक्रिया पारदर्शी, मानवीय और जनहितकारी होनी चाहिए तथा प्रभावित परिवारों के अधिकारों एवं हितों की हर स्तर पर रक्षा सुनिश्चित की जानी चाहिए।
उपायुक्त मेघा भारद्वाज ने अमड़ापाड़ा प्रखंड स्थित पुराने सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) को कोल कंपनियों के सहयोग से बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं से युक्त स्वास्थ्य केंद्र के रूप में विकसित करने की दिशा में आवश्यक कार्रवाई करने का निर्देश दिया।उन्होंने कहा कि प्रभावित परिवारों के साथ-साथ आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को भी गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना प्रशासन की प्राथमिकता है। इसके लिए अस्पताल में आवश्यक संसाधन, दवाएं, चिकित्सक एवं मेडिकल टीम की उपलब्धता सुनिश्चित करने की दिशा में प्रभावी कदम उठाए जाने चाहिए।
बैठक में अधिकारियों एवं कंपनी प्रतिनिधियों को निर्देश दिया गया कि पुनर्वासन एवं पुनर्व्यवस्थापन की प्रक्रिया को प्रभावित परिवारों की जरूरतों के अनुरूप आगे बढ़ाया जाए। प्रशासन की ओर से यह सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया कि विकास एवं कोयला उत्खनन की प्रक्रिया के कारण प्रभावित होने वाले परिवारों को उनके अधिकारों के अनुरूप उचित सुविधाएं और अवसर प्राप्त हों।बैठक में विशेष रूप से बेहतर आवास, शिक्षा, स्वास्थ्य, पेयजल, बिजली, रोजगार, कौशल विकास एवं स्वरोजगार की व्यवस्था पर जोर दिया गया। साथ ही प्रभावित परिवारों की समस्याओं का समयबद्ध समाधान करने तथा पुनर्वासन की पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता बनाए रखने की बात कही गई।

बैठक में लिट्टीपाड़ा विधायक हेमलाल मुर्मू, वन प्रमंडल पदाधिकारी सौरभ चंद्रा, उप विकास आयुक्त अरविन्द कुमार लाल, अपर समाहर्ता जेम्स सुरीन, जिला भू-अर्जन पदाधिकारी अमित कुमार, सांसद प्रतिनिधि श्याम यादव, अमड़ापाड़ा अंचलाधिकारी, WBPDCL के निदेशक (माइनिंग) चंचल गोस्वामी, अग्रणी बैंक प्रबंधक, सिंहदेहरी संख्या-21 एवं धमनीचुआं संख्या-12 के प्रतिनिधि सहित अन्य संबंधित पदाधिकारी एवं प्रतिनिधि उपस्थित थे।




