झारखंड

डीएमएफटी न्यास परिषद की बैठक में विकास योजनाओं पर व्यापक मंथन।

70 प्रतिशत राशि उच्च प्राथमिकता वाली योजनाओं पर, 30 प्रतिशत से सड़क, पुल-पुलिया व सिंचाई सहित आधारभूत संरचना होगी विकसित।

पाकुड़ । समाहरणालय स्थित सभागार में गुरुवार को जिला खनिज फाउंडेशन ट्रस्ट (डीएमएफटी) न्यास परिषद की महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता उपायुक्त सह डीएमएफटी न्यास परिषद की अध्यक्ष मेघा भारद्वाज ने की। बैठक में जिले के खनन प्रभावित क्षेत्रों में विकास एवं जनकल्याण से जुड़ी विभिन्न योजनाओं के प्रस्तावों पर विस्तार से चर्चा की गई तथा योजनाओं के चयन और क्रियान्वयन को लेकर आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए।

बैठक में राजमहल सांसद विजय कुमार हांसदा, महेशपुर विधायक प्रो. स्टीफन मरांडी, लिट्टीपाड़ा विधायक हेमलाल मुर्मू, पाकुड़ विधायक निसात आलम, उप विकास आयुक्त अरविन्द कुमार लाल, अनुमंडल पदाधिकारी साईमन मरांडी, सांसद प्रतिनिधि श्याम यादव, पाकुड़ विधायक प्रतिनिधि, विभिन्न पंचायतों के मुखिया, जिला स्तरीय पदाधिकारी एवं संबंधित अधिकारी उपस्थित रहे।

बैठक में शिक्षा, स्वास्थ्य, पेयजल, स्वच्छता, सौर ऊर्जा, आंगनबाड़ी सुविधाओं सहित ग्रामीण क्षेत्रों की बुनियादी आवश्यकताओं से जुड़ी विभिन्न योजनाओं पर विस्तार से विचार-विमर्श किया गया। खनन प्रभावित क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने तथा उनके जीवन स्तर में सुधार लाने वाली योजनाओं को डीएमएफटी मद से प्राथमिकता देने पर जोर दिया गया।बैठक में इस बात पर विशेष चर्चा हुई कि डीएमएफटी की राशि का उपयोग वास्तविक जरूरत वाले क्षेत्रों में किया जाए, ताकि खनन प्रभावित लोगों को योजनाओं का प्रत्यक्ष और स्थायी लाभ मिल सके। शिक्षा एवं स्वास्थ्य सुविधाओं को मजबूत करने के साथ-साथ स्वच्छ पेयजल, स्वच्छता, सौर ऊर्जा तथा आंगनबाड़ी केंद्रों की सुविधाओं को बेहतर बनाने से संबंधित प्रस्तावों पर भी चर्चा हुई।

बैठक में ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने और स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर बढ़ाने की दिशा में भी महत्वपूर्ण चर्चा हुई। जेएसएलपीएस की दीदियों एवं उद्यमी दीदियों को आवश्यक सहयोग उपलब्ध कराने तथा स्थानीय संसाधनों और उत्पादों को आर्थिक गतिविधियों से जोड़ने पर विशेष बल दिया गया।जिले में उत्पादित पटसन, कचु, महुआ, चिरौता सहित अन्य स्थानीय उपज के व्यवसाय, प्रसंस्करण और विपणन को बढ़ावा देने की दिशा में योजनाएं तैयार करने पर चर्चा हुई। अधिकारियों एवं जनप्रतिनिधियों ने कहा कि स्थानीय उत्पादों को बाजार से जोड़कर ग्रामीण क्षेत्र में रोजगार के अवसर सृजित किए जा सकते हैं। इससे ग्रामीण परिवारों की आय बढ़ाने के साथ स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी।

उपायुक्त सह न्यास परिषद की अध्यक्ष मेघा भारद्वाज ने बताया कि वित्तीय वर्ष 2026-27 में डीएमएफटी कोष की 70 प्रतिशत राशि उच्च प्राथमिकता वाली योजनाओं पर व्यय की जाएगी। इसके अंतर्गत मुख्य रूप से पेयजल, स्वास्थ्य, शिक्षा, कौशल विकास एवं स्वच्छता से संबंधित योजनाओं को शामिल किया गया है।वहीं, डीएमएफटी कोष की शेष 30 प्रतिशत राशि निम्न प्राथमिकता वाली योजनाओं के तहत सड़क, पुल-पुलिया, सिंचाई एवं अन्य आधारभूत संरचना के विकास पर खर्च की जाएगी। इस व्यवस्था का उद्देश्य एक ओर खनन प्रभावित क्षेत्रों की मूलभूत जरूरतों को पूरा करना और दूसरी ओर जिले में आवश्यक आधारभूत संरचनाओं का विकास करना है।

उपायुक्त मेघा भारद्वाज ने संबंधित पदाधिकारियों को निर्देश दिया कि डीएमएफटी मद से प्रस्तावित योजनाओं का चयन जनहित, स्थानीय आवश्यकता और खनन प्रभावित क्षेत्रों की प्राथमिकताओं को ध्यान में रखते हुए किया जाए। उन्होंने कहा कि योजनाओं के चयन में वास्तविक जरूरतों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए, ताकि डीएमएफटी की राशि का अधिकतम और प्रभावी उपयोग सुनिश्चित हो सके।उन्होंने योजनाओं के क्रियान्वयन में गुणवत्ता, पारदर्शिता और समयबद्धता सुनिश्चित करने पर भी विशेष जोर दिया। संबंधित अधिकारियों को योजनाओं की नियमित निगरानी करने तथा निर्धारित समयसीमा के भीतर कार्यों को पूरा कराने के निर्देश दिए गए।

बैठक में उपस्थित जनप्रतिनिधियों एवं अधिकारियों ने जिले के विकास को गति देने वाली विभिन्न योजनाओं और प्रस्तावों पर अपने महत्वपूर्ण सुझाव प्रस्तुत किए। जनप्रतिनिधियों ने अपने-अपने क्षेत्रों की आवश्यकताओं और खनन प्रभावित इलाकों में लोगों को होने वाली समस्याओं से भी अवगत कराया।विभिन्न प्रस्तावों पर विस्तार से चर्चा के बाद योजनाओं को प्राथमिकता, आवश्यकता और जनहित के आधार पर आगे बढ़ाने पर सहमति बनी। बैठक में यह भी स्पष्ट किया गया कि डीएमएफटी के माध्यम से उपलब्ध राशि का उपयोग ऐसे कार्यों में किया जाए, जिनका लाभ अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचे।

बैठक में डीएमएफटी के माध्यम से शिक्षा, स्वास्थ्य, पेयजल, स्वच्छता, कौशल विकास और आधारभूत संरचना के क्षेत्र में योजनाबद्ध तरीके से निवेश कर जिले के विकास को नई गति देने पर विशेष जोर दिया गया।अधिकारियों ने कहा कि डीएमएफटी की राशि का उद्देश्य केवल विकास योजनाओं को वित्तीय सहायता देना नहीं, बल्कि खनन गतिविधियों से प्रभावित क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाना भी है। इसी उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए योजनाओं का चयन, क्रियान्वयन और निगरानी सुनिश्चित करने की दिशा में बैठक में व्यापक चर्चा हुई।

बैठक में लिए गए निर्णयों और प्रस्तावित योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन से खनन प्रभावित क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं के विस्तार, रोजगार के अवसरों में वृद्धि और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलने की उम्मीद है।

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