बाल श्रम मुक्त समाज के निर्माण में सभी विभागों एवं संस्थाओं की सहभागिता अनिवार्य : उप विकास आयुक्त अरविन्द कुमार लाल।
विश्व बाल श्रम निषेध दिवस पर आयोजित जागरूकता कार्यशाला में बाल अधिकारों की सुरक्षा, शिक्षा एवं पुनर्वास पर हुआ मंथन।

पाकुड़। विश्व बाल श्रम निषेध दिवस के अवसर पर जिला बाल संरक्षण इकाई एवं जनलोक कल्याण परिषद, पाकुड़ के संयुक्त तत्वावधान में समाहरणालय सभागार में एक व्यापक जागरूकता कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य बाल श्रम उन्मूलन, बाल अधिकारों की सुरक्षा तथा बाल संरक्षण से जुड़े विभिन्न विभागों एवं संस्थाओं के बीच समन्वय को सुदृढ़ करना था। कार्यशाला की अध्यक्षता उप विकास आयुक्त अरविन्द कुमार लाल ने की।
कार्यक्रम का शुभारंभ उप विकास आयुक्त, बाल कल्याण समिति एवं किशोर न्याय बोर्ड के सदस्यों, रेलवे पुलिस पदाधिकारियों, जिला बाल संरक्षण पदाधिकारी तथा अन्य अतिथियों द्वारा संयुक्त रूप से दीप प्रज्ज्वलित कर किया गया।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उप विकास आयुक्त अरविन्द कुमार लाल ने कहा कि जिले में बाल श्रम से जुड़े प्रत्येक बच्चे को इस कुप्रथा से मुक्त कर उनके संवैधानिक एवं कानूनी अधिकारों के अनुरूप निःशुल्क एवं अनिवार्य शिक्षा से जोड़ना समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि बाल श्रमिक बच्चों के परिवारों को विभिन्न सरकारी कल्याणकारी योजनाओं से जोड़कर उनकी सामाजिक एवं आर्थिक स्थिति को मजबूत बनाना भी उतना ही आवश्यक है।
उन्होंने स्पष्ट कहा कि बाल श्रम में संलिप्त बच्चों को कार्य में लगाने वाले नियोक्ताओं के विरुद्ध कठोर कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जानी चाहिए, ताकि इस सामाजिक बुराई पर प्रभावी अंकुश लगाया जा सके। इसके लिए बाल संरक्षण से जुड़े सभी विभागों, संस्थाओं एवं गैर-सरकारी संगठनों के बीच बेहतर समन्वय और साझेदारी की आवश्यकता है।
कार्यशाला के दौरान बाल कल्याण समिति एवं किशोर न्याय बोर्ड के सदस्यों, रेलवे विभाग के पदाधिकारियों, बाल विकास परियोजना पदाधिकारी, जिला बाल संरक्षण पदाधिकारी तथा अन्य वक्ताओं ने बाल श्रम निषेध, बाल अधिकारों की सुरक्षा और बच्चों के पुनर्वास से जुड़े अपने अनुभव साझा किए। वक्ताओं ने बाल श्रम उन्मूलन के लिए संचालित विभिन्न सरकारी योजनाओं, अभियानों और प्रयासों की विस्तृत जानकारी दी।
जिला बाल संरक्षण पदाधिकारी ने प्रतिभागियों को बाल श्रम की अवधारणा, इसके सामाजिक एवं आर्थिक कारणों, झारखंड में बाल श्रमिकों की वर्तमान स्थिति तथा सरकार द्वारा संचालित विभिन्न कल्याणकारी एवं पुनर्वास योजनाओं की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि बाल श्रम केवल कानूनी नहीं बल्कि सामाजिक और आर्थिक चुनौती भी है, जिसके समाधान के लिए व्यापक जनजागरूकता आवश्यक है।
विधि-सह-परिवीक्षा पदाधिकारी ने बाल श्रम से संबंधित कानूनी प्रावधानों, दंडात्मक व्यवस्थाओं तथा नवीनतम कानूनी संशोधनों पर विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने कहा कि बाल श्रम निषेध कानूनों का प्रभावी क्रियान्वयन बच्चों के अधिकारों की रक्षा के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।
कार्यक्रम में जनलोक कल्याण परिषद के प्रतिनिधियों ने बाल श्रम उन्मूलन हेतु संचालित कार्यक्रमों, विभिन्न विभागों के साथ समन्वयात्मक प्रयासों, ग्राम स्तरीय बाल कल्याण एवं संरक्षण समितियों के पुनर्गठन तथा सामुदायिक जागरूकता अभियानों की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि ग्रामीण स्तर पर जनभागीदारी बढ़ाकर बाल श्रम के विरुद्ध प्रभावी वातावरण तैयार किया जा रहा है।
कार्यशाला के दौरान बाल श्रम विषय पर आधारित एक प्रेरक लघु फिल्म का प्रदर्शन भी किया गया। फिल्म के माध्यम से प्रतिभागियों को बाल श्रम की गंभीरता, उसके दुष्परिणामों तथा बच्चों के अधिकारों के महत्व से अवगत कराया गया।
कार्यक्रम के अंतर्गत आयोजित विषय आधारित खुला संवाद सत्र प्रतिभागियों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र रहा। इसमें उपस्थित अधिकारियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं एवं प्रतिभागियों ने बाल श्रम उन्मूलन, बाल अधिकारों की सुरक्षा तथा पुनर्वास संबंधी उपायों पर अपने विचार एवं सुझाव साझा किए।
इस अवसर पर जिला बाल संरक्षण इकाई के पदाधिकारी एवं कर्मी, बाल कल्याण समिति एवं किशोर न्याय बोर्ड के सदस्य, जनलोक कल्याण परिषद के प्रतिनिधि, विभिन्न गैर-सरकारी संगठनों के कार्यकर्ता तथा अन्य संबंधित विभागों के पदाधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।
विश्व बाल श्रम निषेध दिवस पर आयोजित यह कार्यशाला बाल श्रम मुक्त समाज के निर्माण की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल साबित हुई, जिसमें सभी संबंधित विभागों, संस्थाओं एवं सामाजिक संगठनों ने बच्चों के अधिकारों की रक्षा और उनके बेहतर भविष्य के लिए मिलकर कार्य करने का संकल्प लिया।


