‘मेरे शब्द, मेरी कहानी’ पठन अभियान के तहत जिला स्तरीय पॉडकास्ट का आयोजन।
तीन प्रखंडों के स्कूली बच्चों ने उत्साहपूर्वक लिया हिस्सा, पठन संस्कृति के साथ अभिव्यक्ति और आत्मविश्वास को बढ़ावा देने की पहल।

पाकुड़। बच्चों में पढ़ने की आदत विकसित करने, उनकी अभिव्यक्ति क्षमता को निखारने, संवाद कौशल एवं आत्मविश्वास को बढ़ावा देने तथा जिले में पठन संस्कृति को मजबूत करने के उद्देश्य से जिला प्रशासन के मार्गदर्शन में ‘मेरे शब्द, मेरी कहानी’ पठन अभियान के अंतर्गत जिला स्तरीय विशेष पॉडकास्ट सत्र का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में जिले के तीन प्रखंडों के स्कूली बच्चों ने उत्साह एवं आत्मविश्वास के साथ भाग लिया।
कार्यक्रम का नेतृत्व जिला शिक्षा पदाधिकारी द्वारा किया गया। पॉडकास्ट सत्र के दौरान बच्चों को अपनी पसंदीदा पुस्तकों एवं कहानियों के बारे में अपने विचार रखने का अवसर मिला। बच्चों ने अपने पढ़ने के अनुभव साझा करते हुए बताया कि नियमित रूप से पुस्तकें पढ़ने से उनके ज्ञान, सोचने-समझने की क्षमता, कल्पनाशक्ति, संवाद कौशल एवं आत्मविश्वास में सकारात्मक बदलाव आया है।
‘मेरे शब्द, मेरी कहानी’ अभियान के तहत आयोजित इस विशेष पॉडकास्ट का मुख्य उद्देश्य बच्चों को केवल पुस्तक पढ़ने तक सीमित न रखकर पढ़ी गई सामग्री को समझने, उस पर विचार करने और उसे अपने शब्दों में व्यक्त करने के लिए प्रोत्साहित करना रहा।

पॉडकास्ट के दौरान बच्चों ने पूरे उत्साह के साथ अपनी पसंदीदा कहानियों एवं पुस्तकों के बारे में जानकारी दी। उन्होंने यह भी साझा किया कि किताबें पढ़ने से उनके व्यक्तित्व और व्यवहार में किस प्रकार सकारात्मक परिवर्तन आया है।बच्चों ने कहा कि पुस्तकों के नियमित अध्ययन से उन्हें नई-नई जानकारियां प्राप्त होती हैं। साथ ही उनकी कल्पनाशक्ति को विस्तार मिलता है और दूसरों के सामने अपनी बात रखने का आत्मविश्वास भी बढ़ता है।
जिला प्रशासन की इस पहल का उद्देश्य बच्चों में पठन की आदत विकसित करने के साथ-साथ उनकी रचनात्मकता, अभिव्यक्ति क्षमता और संवाद कौशल को मजबूत करना है। पॉडकास्ट जैसे मंच बच्चों को अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने और बिना झिझक अपने विचार साझा करने का अवसर प्रदान कर रहे हैं।इस दौरान बच्चों की सक्रिय भागीदारी से यह स्पष्ट हुआ कि यदि उन्हें उचित मार्गदर्शन और अपनी बात रखने का मंच उपलब्ध कराया जाए, तो वे अपनी प्रतिभा और रचनात्मक सोच को प्रभावी ढंग से सामने रख सकते हैं।
जिला प्रशासन की ओर से बच्चों को शिक्षा के साथ-साथ पठन, रचनात्मकता, अभिव्यक्ति एवं आत्मविश्वास से जोड़ने के लिए विभिन्न गतिविधियों को लगातार प्रोत्साहित किया जा रहा है। ‘मेरे शब्द, मेरी कहानी’ अभियान इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है।इस अभियान के माध्यम से बच्चों को पुस्तकों से जोड़ने के साथ उनमें नियमित रूप से पढ़ने की आदत विकसित करने का प्रयास किया जा रहा है। इसके साथ ही बच्चों में विचारों को समझने, उनका विश्लेषण करने तथा अपने शब्दों में प्रस्तुत करने की क्षमता को भी विकसित किया जा रहा है।
जिला स्तरीय पॉडकास्ट सत्र को सफल बनाने में एपीओ मनोज, पीरामल फाउंडेशन की मीना ठाकुर, रूम टू रीड के संजीत, एवीए की मणिदीपा साहा तथा बीपीओ किशन भगत का महत्वपूर्ण सहयोग रहा।सभी सहयोगियों ने बच्चों को पठन गतिविधियों से जोड़ने, उन्हें मार्गदर्शन देने तथा अपनी बात प्रभावी ढंग से रखने के लिए प्रोत्साहित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

जिला प्रशासन का मानना है कि शिक्षा का उद्देश्य केवल पाठ्यक्रम पूरा करना नहीं, बल्कि बच्चों में ज्ञान, सोच, रचनात्मकता, संवाद क्षमता और आत्मविश्वास का विकास करना भी है। इसी उद्देश्य के साथ पठन आधारित गतिविधियों को बढ़ावा दिया जा रहा है। मेरे शब्द, मेरी कहानी’ अभियान के माध्यम से बच्चों को बेहतर पाठक बनाने के साथ-साथ उन्हें आत्मविश्वासी, रचनात्मक, संवेदनशील और सक्षम नागरिक के रूप में विकसित करने की दिशा में निरंतर प्रयास किया जा रहा है।
जिला स्तरीय पॉडकास्ट में बच्चों की उत्साहपूर्ण भागीदारी ने यह संदेश दिया कि किताबों से जुड़कर बच्चे न केवल अपने ज्ञान का विस्तार कर सकते हैं, बल्कि अपनी सोच और व्यक्तित्व को भी नई दिशा दे सकते हैं। जिला प्रशासन की यह पहल जिले में पठन संस्कृति को मजबूत करने और बच्चों की प्रतिभा को मंच प्रदान करने की दिशा में एक सार्थक कदम साबित हो रही है।




