Welcome to Jharkhand Sahibganj News   Click to listen highlighted text! Welcome to Jharkhand Sahibganj News
झारखंड

मानसिक स्वास्थ्य ही वास्तविक स्वास्थ्य, परेशानी हो तो चुप न रहें : डॉ. रंजीत कुमार सिंह।

साहिबगंज महाविद्यालय में आत्महत्या रोकथाम एवं तनावमुक्त जीवन पर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित, विशेषज्ञ ने समय पर उपचार और सहयोग लेने का दिया संदेश।

साहिबगंज। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन, झारखंड, रांची के दिशा-निर्देश के आलोक में स्वास्थ्य विभाग एवं साहिबगंज महाविद्यालय के संयुक्त तत्वावधान में मंगलवार को महाविद्यालय के बीएड भवन में ‘आत्महत्या रोकथाम एवं तनावमुक्त जीवन’ विषय पर व्यापक जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य छात्र-छात्राओं एवं युवाओं को मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूक करना, तनाव एवं निराशा जैसी परिस्थितियों में समय रहते सहायता लेने के लिए प्रेरित करना तथा मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े विषयों पर समाज में खुलकर संवाद को बढ़ावा देना रहा।

कार्यक्रम की अध्यक्षता साहिबगंज महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. रंजीत कुमार सिंह ने की। वहीं साहिबगंज सदर अस्पताल की मनोचिकित्सक डॉ. आरसी खानम मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहीं। कार्यक्रम का शुभारंभ मनोविज्ञान विभागाध्यक्ष सह कार्यक्रम संयोजक डॉ. चंद्रशेखर प्रसाद ने किया। महाविद्यालय परिवार की ओर से मुख्य अतिथि डॉ. आरसी खानम का पौधा भेंट कर स्वागत किया गया।

अध्यक्षीय संबोधन में प्राचार्य डॉ. रंजीत कुमार सिंह ने मानसिक स्वास्थ्य को स्वस्थ जीवन का महत्वपूर्ण आधार बताते हुए कहा कि “मानसिक स्वास्थ्य ही वास्तविक स्वास्थ्य है।” उन्होंने कहा कि मानसिक तनाव, निराशा अथवा किसी भी प्रकार की मानसिक परेशानी का सामना कर रहे व्यक्ति को अपनी समस्या को लेकर अकेले नहीं रहना चाहिए।उन्होंने छात्र-छात्राओं से अपनी भावनाओं और परेशानियों को परिवार के सदस्यों, मित्रों अथवा किसी विश्वसनीय व्यक्ति के साथ साझा करने की अपील की। उन्होंने कहा कि मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े विषयों को लेकर समाज में व्याप्त झिझक और चुप्पी को समाप्त करने की जरूरत है। समय पर बातचीत, भावनात्मक सहयोग और विशेषज्ञ की सलाह मानसिक परेशानियों से जूझ रहे व्यक्ति के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकती है।

प्राचार्य ने विद्यार्थियों से स्वयं भी मानसिक स्वास्थ्य के प्रति सजग रहने तथा अपने आसपास के लोगों की भावनात्मक परेशानियों को समझने का प्रयास करने की अपील की। उन्होंने कहा कि आवश्यकता महसूस होने पर मनोचिकित्सक अथवा योग्य मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ से समय रहते संपर्क करना चाहिए।

मुख्य अतिथि एवं सदर अस्पताल की मनोचिकित्सक डॉ. आरसी खानम ने मानसिक स्वास्थ्य के विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने कहा कि मानसिक स्वास्थ्य संबंधी परेशानियां किसी एक आयु वर्ग तक सीमित नहीं हैं। बच्चों, युवाओं और वयस्कों में भी विभिन्न कारणों से तनाव एवं मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं सामने आ सकती हैं।उन्होंने बताया कि मानसिक स्वास्थ्य संबंधी परेशानी होने पर मनोचिकित्सकीय उपचार, उचित परामर्श तथा आवश्यकता के अनुसार चिकित्सकीय सहायता उपलब्ध है। उन्होंने कहा कि समय पर उपचार, परिवार का सहयोग और विशेषज्ञ की सलाह मिलने से व्यक्ति मानसिक परेशानी से उबरने की दिशा में सकारात्मक कदम बढ़ा सकता है।

डॉ. खानम ने विद्यार्थियों को मानसिक स्वास्थ्य के प्रति सजग रहने तथा किसी परेशानी को छिपाने के बजाय भरोसेमंद व्यक्ति और विशेषज्ञ से सहायता लेने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने मानसिक स्वास्थ्य को लेकर जागरूकता बढ़ाने और जरूरत के समय सहायता लेने को सामान्य स्वास्थ्य देखभाल का ही हिस्सा बताया।

जागरूकता कार्यक्रम के दौरान छात्र-छात्राओं के बीच पोस्टर मेकिंग, स्लोगन एवं क्विज प्रतियोगिता का आयोजन भी किया गया। विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लेते हुए मानसिक स्वास्थ्य, तनावमुक्त जीवन एवं आत्महत्या रोकथाम जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर अपनी रचनात्मक अभिव्यक्ति प्रस्तुत की।पोस्टर और स्लोगन प्रतियोगिता के माध्यम से विद्यार्थियों ने मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता, सकारात्मक सोच, संवाद और सहयोग के महत्व को प्रभावी ढंग से सामने रखा। वहीं क्विज प्रतियोगिता के माध्यम से मानसिक स्वास्थ्य से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारियों को विद्यार्थियों तक पहुंचाया गया।

प्रतियोगिताओं में प्रथम, द्वितीय एवं तृतीय स्थान प्राप्त करने वाले प्रतिभागियों को अतिथियों एवं महाविद्यालय के पदाधिकारियों द्वारा पुरस्कृत किया गया। इस दौरान विद्यार्थियों ने भी मानसिक स्वास्थ्य एवं तनावमुक्त जीवन के महत्व पर अपने विचार साझा किए।

कार्यक्रम में मनोविज्ञान विभागाध्यक्ष डॉ. चंद्रशेखर प्रसाद एवं राजनीति विज्ञान विभागाध्यक्ष डॉ. राजीव कुमार ने भी अपने विचार रखे। वक्ताओं ने कहा कि मानसिक स्वास्थ्य को भी शारीरिक स्वास्थ्य की तरह ही गंभीरता से लिया जाना चाहिए।उन्होंने विद्यार्थियों से पढ़ाई, प्रतियोगिता, भविष्य की चिंता एवं व्यक्तिगत जीवन से जुड़े विभिन्न प्रकार के तनावों के बीच संतुलन बनाए रखने की अपील की। साथ ही किसी भी प्रकार की मानसिक परेशानी महसूस होने पर समय रहते परिवार, मित्र, शिक्षक अथवा विशेषज्ञ से सहायता लेने के लिए प्रेरित किया।कार्यक्रम का मंच संचालन बीएड विभाग के प्राध्यापक प्रो. नितिन कुमार घोष ने किया।

कार्यक्रम में स्वास्थ्य विभाग की क्लिनिकल साइकोलॉजिस्ट सुविधा कुमारी एवं नेहा कुमारी, सिविल सर्जन कार्यालय के रजिस्ट्री अटेंडेंट अमित कुमार, पंकज, पीटर सोरेन, सीडी राजीव पॉल (सोशल वर्कर) सहित स्वास्थ्य विभाग के अन्य कर्मी उपस्थित रहे।

महाविद्यालय की ओर से बीएड विभागाध्यक्ष डॉ. डेविड यादव, राष्ट्रीय सेवा योजना के कार्यक्रम पदाधिकारी प्रो. कुमार प्रशांत भारती, शिक्षकगण एवं बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं कार्यक्रम में शामिल हुए।

कार्यक्रम के माध्यम से विद्यार्थियों को यह महत्वपूर्ण संदेश दिया गया कि मानसिक परेशानी को छिपाने के बजाय उसके बारे में बात करना, भरोसेमंद लोगों का सहयोग लेना और आवश्यकता पड़ने पर विशेषज्ञ की सहायता लेना मानसिक स्वास्थ्य की देखभाल का महत्वपूर्ण कदम है। कार्यक्रम में मानसिक स्वास्थ्य को लेकर जागरूकता बढ़ाने, सकारात्मक संवाद स्थापित करने और जरूरतमंद व्यक्ति तक समय पर सहयोग पहुंचाने पर विशेष जोर दिया गया।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button
error: Content is protected !!
Click to listen highlighted text!