साहिबगंज महाविद्यालय में नवनियुक्त प्राचार्य डॉ. रणजीत कुमार सिंह का भव्य अभिनंदन।
भूगोल विभाग ने अंगवस्त्र एवं पौधा भेंट कर किया स्वागत, नेपाल की बाढ़ पर विशेष व्याख्यान में हिमालयी क्षेत्र की भौगोलिक परिस्थितियों और संभावित प्रभावों पर हुई विस्तृत चर्चा।

साहिबगंज। साहिबगंज महाविद्यालय के रमन विज्ञान भवन में सोमवार को भूगोल विभाग की ओर से महाविद्यालय के नवनियुक्त प्राचार्य डॉ. रणजीत कुमार सिंह के स्वागत एवं अभिनंदन के लिए विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में भूगोल विभाग के शिक्षकों एवं छात्र-छात्राओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। विभाग की ओर से विभागाध्यक्ष डॉ. मोहम्मद हसनैन ने अंगवस्त्र एवं पौधा भेंट कर नवनियुक्त प्राचार्य का गर्मजोशी से स्वागत किया।
स्वागत समारोह के दौरान भूगोल विभागाध्यक्ष डॉ. मोहम्मद हसनैन ने उपस्थित छात्र-छात्राओं को प्राचार्य डॉ. रणजीत कुमार सिंह के शैक्षणिक एवं सामाजिक जीवन की उपलब्धियों से अवगत कराया। उन्होंने कहा कि डॉ. सिंह ने अकादमिक एवं सामाजिक क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान दिया है। उनका अनुभव एवं मार्गदर्शन महाविद्यालय के शैक्षणिक वातावरण को और अधिक सुदृढ़ करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
स्वागत एवं अभिनंदन समारोह को संबोधित करते हुए प्राचार्य डॉ. रणजीत कुमार सिंह ने भूगोल विभागाध्यक्ष, शिक्षकों एवं विद्यार्थियों के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि भूगोल सदैव से उनका प्रिय विषय रहा है और उन्हें इस महाविद्यालय के भूगोल विभाग से पूर्व से ही जुड़ाव रहा है। उन्होंने बताया कि वे पूर्व में इसी महाविद्यालय के भूगोल विभाग में प्रभारी विभागाध्यक्ष के रूप में अपनी जिम्मेदारी निभा चुके हैं।

उन्होंने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि प्राकृतिक घटनाओं एवं पर्यावरणीय परिवर्तनों को केवल पाठ्यक्रम का हिस्सा मानकर नहीं पढ़ना चाहिए, बल्कि इनके पीछे छिपे वैज्ञानिक कारणों को समझने का प्रयास करना चाहिए। विद्यार्थियों को प्रकृति और पर्यावरण के प्रति सजग एवं संवेदनशील रहने के साथ-साथ प्रत्येक प्राकृतिक घटना को वैज्ञानिक दृष्टिकोण से समझने के लिए निरंतर जिज्ञासु बने रहने का संदेश दिया।
कार्यक्रम के दौरान ‘नेपाल में बाढ़ की विभीषिका’ विषय पर विशेष व्याख्यान का भी आयोजन किया गया। विभागाध्यक्ष डॉ. मोहम्मद हसनैन एवं प्राचार्य डॉ. रणजीत कुमार सिंह ने नेपाल में उत्पन्न बाढ़ की परिस्थितियों के संदर्भ में हिमालयी क्षेत्र की भौगोलिक एवं प्राकृतिक संरचना पर विस्तार से प्रकाश डाला।
वक्ताओं ने हिमालयी क्षेत्र की भौगोलिक बनावट, अत्यधिक वर्षा, जलप्रवाह तथा ग्लेशियरों से संबंधित प्राकृतिक परिस्थितियों के संभावित प्रभावों पर चर्चा की। उन्होंने बताया कि नेपाल-तिब्बत सीमा से सटे ऊंचे हिमालयी क्षेत्रों में उत्पन्न होने वाली प्राकृतिक घटनाओं का प्रभाव कई बार निचले नदी क्षेत्रों तक पहुंच सकता है। अत्यधिक जलप्रवाह जैसी परिस्थितियों के कारण नेपाल के साथ-साथ भारत के बिहार सहित निचले एवं सीमावर्ती नदी क्षेत्रों में भी जलस्तर को लेकर चिंता उत्पन्न हो सकती है।
व्याख्यान के दौरान विद्यार्थियों को बताया गया कि भूगोल केवल पुस्तकीय अध्ययन तक सीमित विषय नहीं है, बल्कि यह पृथ्वी, प्रकृति, पर्यावरण और मानव जीवन के बीच स्थापित परस्पर संबंधों को समझने का महत्वपूर्ण माध्यम है।
वक्ताओं ने कहा कि वर्तमान समय में जलवायु परिवर्तन, अनियमित वर्षा, बाढ़, सूखा, भूस्खलन एवं अन्य प्राकृतिक घटनाओं को समझने के लिए वैज्ञानिक दृष्टिकोण आवश्यक है। विद्यार्थियों से आह्वान किया गया कि वे प्राकृतिक घटनाओं एवं पर्यावरणीय बदलावों के प्रति जागरूक रहें तथा इनके सामाजिक एवं मानवीय प्रभावों को समझने का प्रयास करें।
प्राचार्य डॉ. रणजीत कुमार सिंह ने विद्यार्थियों से कहा कि प्रकृति के साथ मानव जीवन का गहरा संबंध है। इसलिए प्रत्येक विद्यार्थी को पर्यावरण संरक्षण एवं प्राकृतिक संसाधनों के विवेकपूर्ण उपयोग के प्रति जिम्मेदार होना चाहिए। उन्होंने विद्यार्थियों को अपने आसपास घटित होने वाली प्राकृतिक एवं पर्यावरणीय घटनाओं का अध्ययन करने और उनमें वैज्ञानिक कारणों को तलाशने की आदत विकसित करने की प्रेरणा दी।

उन्होंने कहा कि जिज्ञासा ही ज्ञान की पहली सीढ़ी है। यदि विद्यार्थी अपने आसपास की प्राकृतिक घटनाओं को समझने के लिए प्रश्न पूछेंगे और उनके वैज्ञानिक कारणों की खोज करेंगे, तो इससे उनके ज्ञान का विस्तार होगा और वे समाज के प्रति अधिक जागरूक एवं जिम्मेदार नागरिक बन सकेंगे।
कार्यक्रम में महाविद्यालय के रसायन शास्त्र विभागाध्यक्ष डॉ. अनिल कुमार, भूगोल विभाग के शिक्षकगण तथा बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे। कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों ने विशेष व्याख्यान को गंभीरता एवं उत्सुकता के साथ सुना।अंत में उपस्थित अतिथियों, शिक्षकों एवं छात्र-छात्राओं के प्रति आभार व्यक्त किया गया। सौहार्दपूर्ण एवं शैक्षणिक वातावरण में कार्यक्रम का समापन हुआ।




