राजमहल के सरस्वती शिशु विद्या मंदिर में श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाई गई गोस्वामी तुलसीदास जयंती।
दीप प्रज्वलन एवं पुष्पार्चन के साथ कार्यक्रम का हुआ शुभारंभ, विद्यार्थियों ने तुलसीदास के जीवन और साहित्यिक योगदान पर डाला प्रकाश।

राजमहल साहिबगंज। सरस्वती शिशु विद्या मंदिर, राजमहल के वंदना भवन में बुधवार को महान संत एवं रामचरितमानस के रचयिता गोस्वामी तुलसीदास की जयंती श्रद्धा एवं उत्साह के साथ मनाई गई। कार्यक्रम में विद्यालय परिवार ने तुलसीदास के जीवन, विचारों एवं साहित्यिक योगदान को स्मरण करते हुए उनके आदर्शों से प्रेरणा लेने का संदेश दिया।
कार्यक्रम का शुभारंभ विद्यालय के प्रधानाचार्य मिथिलेश कुमार सिंह सहित सभी दीदी-आचार्यों एवं विद्यार्थियों ने गोस्वामी तुलसीदास के चित्र के समक्ष दीप प्रज्वलित एवं पुष्पार्चन कर किया। इसके बाद विद्यार्थियों ने तुलसीदास के जीवन से जुड़े विभिन्न प्रसंगों तथा उनके साहित्यिक योगदान पर विस्तार से प्रकाश डाला।
विद्यालय के भैया-बहनों ने अपने संबोधन एवं प्रस्तुतियों के माध्यम से गोस्वामी तुलसीदास के जीवन, विचारों तथा भारतीय संस्कृति के संरक्षण एवं संवर्धन में उनके महत्वपूर्ण योगदान को उपस्थित लोगों के समक्ष प्रस्तुत किया। विद्यार्थियों ने बताया कि तुलसीदास की रचनाओं ने भारतीय समाज में धर्म, संस्कार, नैतिकता और मानवीय मूल्यों को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

जयंती समारोह के अवसर पर विद्यार्थियों के बीच चित्रकला एवं निबंध प्रतियोगिता का भी आयोजन किया गया। प्रतियोगिता में विद्यालय के भैया-बहनों ने उत्साहपूर्वक भाग लेते हुए अपनी रचनात्मकता एवं प्रतिभा का प्रदर्शन किया।
कार्यक्रम के दौरान विद्यालय परिवार ने विद्यार्थियों को गोस्वामी तुलसीदास के आदर्शों एवं साहित्य से प्रेरणा लेकर संस्कार, संस्कृति, नैतिक मूल्यों एवं भारतीय परंपराओं के प्रति सम्मान विकसित करने का संदेश दिया।

समूचा कार्यक्रम श्रद्धा, उत्साह एवं भारतीय संस्कृति के प्रति सम्मान की भावना से ओत-प्रोत रहा। विद्यालय परिवार ने विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास के साथ-साथ उनमें संस्कारयुक्त एवं मूल्यपरक जीवन-दृष्टि विकसित करने का संकल्प भी दोहराया।



