दिशोम गुरु स्वर्गीय शिबू सोरेन की आदमकद प्रतिमा का भव्य अनावरण।
प्रथम पुण्यतिथि पर जनप्रतिनिधियों एवं प्रशासनिक अधिकारियों ने अर्पित की भावभीनी श्रद्धांजलि, संघर्ष, त्याग और सामाजिक न्याय के प्रति उनके ऐतिहासिक योगदान को किया नमन।

पाकुड़। झारखंड आंदोलन के प्रणेता एवं पद्म भूषण से सम्मानित दिशोम गुरु स्वर्गीय शिबू सोरेन की प्रथम पुण्यतिथि के अवसर पर मंगलवार को पुराने उपायुक्त कार्यालय परिसर में स्थापित उनकी आदमकद प्रतिमा का भव्य एवं गरिमामय वातावरण में अनावरण किया गया। इस अवसर पर आयोजित श्रद्धांजलि समारोह में जनप्रतिनिधियों, प्रशासनिक पदाधिकारियों, सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों तथा बड़ी संख्या में नागरिकों ने उपस्थित होकर दिशोम गुरु को श्रद्धापूर्वक नमन किया।
कार्यक्रम का शुभारंभ दिशोम गुरु की प्रतिमा पर माल्यार्पण एवं पुष्पांजलि अर्पित कर उन्हें श्रद्धांजलि देने के साथ हुआ। उपस्थित जनप्रतिनिधियों एवं अधिकारियों ने झारखंड राज्य के निर्माण, आदिवासी समाज के उत्थान, जल-जंगल-जमीन की रक्षा, सामाजिक न्याय की स्थापना तथा वंचित एवं शोषित वर्गों के अधिकारों के लिए उनके आजीवन संघर्ष एवं ऐतिहासिक योगदान को स्मरण किया।

महेशपुर विधायक प्रो. स्टीफन मरांडी ने कहा कि दिशोम गुरु स्वर्गीय शिबू सोरेन ने अपना संपूर्ण जीवन झारखंड की अस्मिता, आदिवासी समाज के अधिकारों एवं सामाजिक न्याय की स्थापना के लिए समर्पित कर दिया। उनका संघर्ष, दूरदर्शी नेतृत्व एवं जनसेवा आने वाली पीढ़ियों के लिए सदैव प्रेरणास्रोत रहेगा।
उन्होंने कहा कि स्थापित की गई यह प्रतिमा झारखंड की गौरवशाली विरासत, संघर्ष और जनआकांक्षाओं की जीवंत पहचान है। यह नई पीढ़ी को अपने इतिहास एवं महान विभूतियों से जोड़ने का कार्य करेगी।
लिट्टीपाड़ा विधायक हेमलाल मुर्मू ने कहा कि दिशोम गुरु का जीवन त्याग, संघर्ष और जनसेवा की अद्भुत मिसाल है। उन्होंने जल-जंगल-जमीन की रक्षा, आदिवासी समाज के सम्मान तथा झारखंड राज्य के निर्माण के लिए जो ऐतिहासिक योगदान दिया, वह सदैव अविस्मरणीय रहेगा।

उन्होंने कहा कि समाज के प्रत्येक वर्ग को दिशोम गुरु के आदर्शों एवं विचारों से प्रेरणा लेकर समरस, न्यायपूर्ण एवं विकसित झारखंड के निर्माण में सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए।
उपायुक्त मेघा भारद्वाज ने कहा कि दिशोम गुरु स्वर्गीय शिबू सोरेन का जीवन जनसेवा, सामाजिक समरसता, समानता तथा समाज के वंचित एवं कमजोर वर्गों के उत्थान के लिए निरंतर संघर्ष का प्रतीक रहा है।
उन्होंने कहा कि महापुरुषों की स्मृतियों को संरक्षित करना केवल उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करना नहीं, बल्कि नई पीढ़ी को उनके विचारों, मूल्यों एवं आदर्शों से जोड़ने का सशक्त माध्यम है। दिशोम गुरु की यह प्रतिमा आने वाले वर्षों तक समाज को सेवा, समर्पण, सामाजिक न्याय एवं जनकल्याण के मूल्यों की प्रेरणा देती रहेगी।
इस अवसर पर अन्य वक्ताओं ने भी दिशोम गुरु के संघर्षपूर्ण जीवन, सादगी, जनसरोकारों के प्रति उनकी प्रतिबद्धता तथा झारखंड आंदोलन में उनके ऐतिहासिक योगदान को याद किया। वक्ताओं ने कहा कि उन्होंने समाज में स्वाभिमान, सामाजिक चेतना एवं जनअधिकारों की मजबूत नींव रखी। उनका व्यक्तित्व एवं कृतित्व सदैव झारखंडवासियों के लिए प्रेरणास्रोत बना रहेगा।

कार्यक्रम के अंत में उपस्थित जनप्रतिनिधियों, प्रशासनिक पदाधिकारियों एवं नागरिकों ने सामूहिक रूप से दिशोम गुरु को श्रद्धांजलि अर्पित की। साथ ही उनके बताए मार्ग पर चलने तथा झारखंड के सर्वांगीण विकास, सामाजिक समरसता एवं जनकल्याण के लिए निरंतर कार्य करने का संकल्प लिया।
इस अवसर पर महेशपुर विधायक प्रो. स्टीफन मरांडी, लिट्टीपाड़ा विधायक हेमलाल मुर्मू, उपायुक्त मेघा भारद्वाज, पुलिस अधीक्षक अनुदीप सिंह, वन प्रमंडल पदाधिकारी सौरभ चंद्रा, परियोजना निदेशक आईटीडीए अरुण कुमार एक्का, अपर समाहर्ता जेम्स सुरीन, जिला भू-अर्जन पदाधिकारी अमित कुमार, जिला नजारत उप समाहर्ता विकास कुमार त्रिवेदी सहित विभिन्न जनप्रतिनिधि एवं प्रशासनिक पदाधिकारी उपस्थित रहे।

इसके अलावा सांसद प्रतिनिधि श्याम यादव, झारखंड मुक्ति मोर्चा के जिलाध्यक्ष अजीजुल इस्लाम, उपाध्यक्ष समद अली, झामुमो केंद्रीय समिति सदस्य उपासना मरांडी, कांग्रेस महासचिव तनवीर आलम सहित विभिन्न सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि, बुद्धिजीवी, जनजातीय समाज के सदस्य, युवा एवं बड़ी संख्या में नागरिक उपस्थित थे।




