झारखंड

विश्व पर्यावरण दिवस पर व्यवहार न्यायालय परिसर में पौधारोपण एवं जागरूकता कार्यक्रम आयोजित।

पर्यावरण संरक्षण एवं हरित भविष्य निर्माण का लिया गया संकल्प।

साहिबगंज। विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर झारखंड राज्य विधिक सेवा प्राधिकार, रांची के निर्देशानुसार तथा प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश-सह-अध्यक्ष, जिला विधिक सेवा प्राधिकार (डालसा), साहिबगंज अखिल कुमार के नेतृत्व में व्यवहार न्यायालय परिसर, साहिबगंज में विशेष पौधारोपण एवं पर्यावरण जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य पर्यावरण संरक्षण, प्रकृति संवर्धन एवं हरित भविष्य के निर्माण के प्रति लोगों को जागरूक करना था।

कार्यक्रम का शुभारंभ प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश अखिल कुमार द्वारा न्यायालय परिसर में पौधारोपण कर किया गया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में पर्यावरण संरक्षण सबसे बड़ी आवश्यकता बन चुकी है। आने वाली पीढ़ियों को स्वच्छ, सुरक्षित एवं संतुलित पर्यावरण उपलब्ध कराना हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है। उन्होंने लोगों से अधिक से अधिक वृक्षारोपण करने तथा लगाए गए पौधों के संरक्षण का संकल्प लेने का आह्वान किया।

कार्यक्रम में न्यायिक पदाधिकारियों एवं न्यायालय कर्मियों ने उत्साहपूर्वक भाग लेते हुए न्यायालय परिसर में पौधे लगाए। इस अवसर पर प्रधान न्यायाधीश, कुटुंब न्यायालय संजय कुमार उपाध्याय, जिला एवं अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश प्रथम गुलाम हैदर, मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी सिंधु नाथ लामाये, अतिरिक्त मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी अभिषेक प्रसाद, जिला विधिक सेवा प्राधिकार के सचिव विश्वनाथ भगत, सिविल जज सह न्यायिक दंडाधिकारी आलोक मरांडी, अनुमंडल न्यायिक दंडाधिकारी तुषार आनंद, रेलवे न्यायिक दंडाधिकारी राहुल कुमार तथा न्यायिक दंडाधिकारी प्रथम श्रेणी रिचेश कुमार सहित अन्य न्यायालयकर्मी उपस्थित रहे।

कार्यक्रम के दौरान पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ ठोस अपशिष्ट प्रबंधन के महत्व पर भी विस्तार से चर्चा की गई। उपस्थित लोगों को बताया गया कि पर्यावरण की सुरक्षा केवल सरकारी प्रयासों से संभव नहीं है, बल्कि प्रत्येक नागरिक की सक्रिय भागीदारी आवश्यक है।

इस दौरान ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम, 2016 के प्रावधानों की जानकारी देते हुए घरों एवं संस्थानों में कचरे के पृथक्करण, जैविक एवं अजैविक अपशिष्ट के अलग-अलग संग्रहण तथा उनके वैज्ञानिक एवं पर्यावरण अनुकूल निस्तारण के प्रति जागरूक किया गया।

पारा विधिक स्वयंसेवकों एवं डालसा कर्मियों द्वारा आमजनों को प्लास्टिक प्रदूषण कम करने, स्वच्छता बनाए रखने, जल एवं प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण तथा पर्यावरण अनुकूल जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित किया गया।

कार्यक्रम में यह संदेश दिया गया कि स्वच्छ एवं स्वस्थ पर्यावरण प्रत्येक नागरिक का मौलिक अधिकार होने के साथ-साथ उसका नैतिक दायित्व भी है।

कार्यक्रम के अंत में उपस्थित सभी न्यायिक पदाधिकारी, न्यायालय कर्मी, पारा विधिक स्वयंसेवक एवं नागरिकों ने पर्यावरण संरक्षण, स्वच्छता, वृक्षारोपण तथा हरित एवं सुरक्षित भविष्य के निर्माण हेतु सक्रिय योगदान देने का संकल्प लिया।

यह कार्यक्रम पर्यावरण संरक्षण के प्रति जन-जागरूकता बढ़ाने एवं समाज में सकारात्मक संदेश प्रसारित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल साबित हुआ।

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