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झारखंड

कृषि विज्ञान केंद्र, साहिबगंज में प्राकृतिक खेती पर पाँच दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम संपन्न।

AKS CRP दीदियों को प्राकृतिक खेती की उन्नत तकनीकों का दिया गया प्रशिक्षण, ग्रामीण क्षेत्रों में प्रसार का लिया संकल्प।

साहिबगंज। भारत सरकार की नेशनल मिशन ऑन नेचुरल फार्मिंग (NMNF) योजना के तहत कृषि विज्ञान केंद्र (केवीके), साहिबगंज में AKS CRP दीदियों के लिए आयोजित पाँच दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम सोमवार को सफलतापूर्वक संपन्न हो गया। यह प्रशिक्षण कार्यक्रम 11 जून से 15 जून 2026 तक आयोजित किया गया, जिसका मुख्य उद्देश्य प्राकृतिक खेती के सिद्धांतों, आधुनिक तकनीकों एवं व्यवहारिक पहलुओं की जानकारी देकर ग्रामीण क्षेत्रों में इसके व्यापक प्रचार-प्रसार को सुनिश्चित करना था।

प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों को प्राकृतिक खेती की मूल अवधारणा, जीवामृत एवं घनजीवामृत निर्माण, बीजामृत उपचार, प्राकृतिक कीट एवं रोग प्रबंधन, मृदा स्वास्थ्य संरक्षण, पोषण वाटिका विकास तथा कम लागत में टिकाऊ कृषि उत्पादन की तकनीकों की विस्तृत जानकारी दी गई। इसके अलावा खेती में रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों के दुष्प्रभावों तथा प्राकृतिक खेती के लाभों पर भी विस्तार से चर्चा की गई।

विशेषज्ञों ने बताया कि प्राकृतिक खेती किसानों के लिए एक ऐसी टिकाऊ कृषि पद्धति है, जो उत्पादन लागत को कम करते हुए बेहतर गुणवत्ता वाली उपज उपलब्ध कराती है। इससे मिट्टी की उर्वरता में वृद्धि होती है और पर्यावरण संरक्षण को भी बढ़ावा मिलता है।

समापन समारोह के दौरान कृषि विज्ञान केंद्र, साहिबगंज की प्रधान कृषि वैज्ञानिक डॉ. सुप्रिया सिंह ने कहा कि प्राकृतिक खेती आज के समय की आवश्यकता बन चुकी है। यह न केवल किसानों की आय बढ़ाने में सहायक है, बल्कि कृषि को आत्मनिर्भर और पर्यावरण-अनुकूल बनाने की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम है।

वरिष्ठ कृषि वैज्ञानिक डॉ. संजीव कुमार ने प्रतिभागियों को प्राकृतिक संसाधनों के समुचित उपयोग पर बल देते हुए कहा कि प्राकृतिक खेती के माध्यम से मिट्टी की गुणवत्ता को लंबे समय तक बनाए रखा जा सकता है। वहीं जिला उद्यान पदाधिकारी अमितेश रंजन ने उद्यानिकी फसलों में प्राकृतिक खेती की संभावनाओं पर प्रकाश डाला।

प्रशिक्षक सह कृषि समन्वयक निकेश कुमार ने प्रशिक्षण के दौरान प्राप्त ज्ञान को गांव-गांव तक पहुंचाने तथा अधिक से अधिक किसानों को प्राकृतिक खेती से जोड़ने का आह्वान किया।

कार्यक्रम में उपस्थित विशेषज्ञों ने कहा कि प्रशिक्षण प्राप्त AKS CRP दीदियाँ अपने-अपने क्षेत्रों में किसानों को प्राकृतिक खेती के प्रति जागरूक करेंगी तथा उन्हें रासायनिक खेती से प्राकृतिक खेती की ओर प्रेरित करेंगी। इससे किसानों की उत्पादन लागत में कमी आएगी और उनकी आय में वृद्धि होगी।

प्रशिक्षण कार्यक्रम के सफल समापन पर प्रतिभागियों ने कृषि विज्ञान केंद्र, साहिबगंज के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने संकल्प लिया कि वे अपने-अपने गांवों और पंचायतों में प्राकृतिक खेती के लाभों की जानकारी देकर अधिक से अधिक किसानों को इससे जोड़ने का प्रयास करेंगी।

विशेषज्ञों ने विश्वास व्यक्त किया कि प्राकृतिक खेती को बढ़ावा मिलने से किसानों की आर्थिक स्थिति मजबूत होगी, कृषि उत्पादन अधिक टिकाऊ बनेगा तथा पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ मानव स्वास्थ्य को भी लाभ मिलेगा। इस दिशा में कृषि विज्ञान केंद्र, साहिबगंज द्वारा आयोजित यह प्रशिक्षण कार्यक्रम एक महत्वपूर्ण पहल साबित हुआ है।

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