उपायुक्त की अध्यक्षता में जिला सीएसआर समिति की समीक्षा बैठक आयोजित।
शिक्षा, स्वास्थ्य, शुद्ध पेयजल, खेल, आंगनबाड़ी केंद्रों के सुदृढ़ीकरण एवं कौशल विकास को प्राथमिकता देने का निर्देश।

पाकुड़। समाहरणालय स्थित सभागार में उपायुक्त मेघा भारद्वाज की अध्यक्षता में निगमित सामाजिक दायित्व (सीएसआर) के अंतर्गत जिले में संचालित एवं प्रस्तावित योजनाओं की समीक्षा को लेकर जिला सीएसआर समिति की बैठक आयोजित की गई। बैठक में विभिन्न कंपनियों के माध्यम से सीएसआर मद के तहत संचालित विकासात्मक एवं जनकल्याणकारी योजनाओं की प्रगति, उनकी उपयोगिता, वित्तीय वर्षवार कार्यों की स्थिति तथा आगामी वित्तीय वर्ष के लिए प्रस्तावित कार्ययोजना पर विस्तारपूर्वक चर्चा की गई। इस दौरान उपायुक्त ने जिले में सीएसआर निधि के प्रभावी उपयोग, योजनाओं के गुणवत्तापूर्ण क्रियान्वयन तथा निर्धारित समय-सीमा के भीतर कार्यों को पूरा करने पर विशेष बल दिया।
बैठक के दौरान उपायुक्त मेघा भारद्वाज ने संबंधित कंपनियों के प्रतिनिधियों को निर्देश दिया कि सीएसआर मद के अंतर्गत ऐसी जनोपयोगी एवं टिकाऊ योजनाओं को प्राथमिकता दी जाए, जिनका लाभ जिले के अधिक से अधिक लोगों तक पहुंच सके। उन्होंने कहा कि सीएसआर निधि का उपयोग केवल योजनाओं के संचालन तक सीमित न रहे, बल्कि इसके माध्यम से समाज के जरूरतमंद, वंचित एवं पिछड़े वर्गों के जीवन स्तर में सकारात्मक बदलाव लाने का प्रयास किया जाए। उन्होंने स्पष्ट किया कि योजनाओं का चयन स्थानीय आवश्यकताओं एवं जनहित को ध्यान में रखते हुए किया जाना चाहिए, ताकि उपलब्ध संसाधनों का अधिकतम उपयोग सुनिश्चित हो सके।
बैठक में विभिन्न कंपनियों द्वारा सीएसआर के तहत संचालित गतिविधियों के साथ-साथ वित्तीय वर्ष 2026-27 के प्रस्तावित एक्शन प्लान की विस्तृत समीक्षा की गई। इसके अतिरिक्त वित्तीय वर्ष 2022-23, 2023-24, 2024-25 एवं 2025-26 के दौरान कंपनियों द्वारा कराए गए कार्यों की प्रगति एवं उपलब्धियों की भी जानकारी ली गई। पूर्व वित्तीय वर्षों में स्वीकृत एवं संचालित योजनाओं की वर्तमान स्थिति, उनके क्रियान्वयन में हुई प्रगति, उपयोगिता तथा लंबित कार्यों की समीक्षा करते हुए उपायुक्त ने संबंधित अधिकारियों एवं कंपनियों के प्रतिनिधियों से आवश्यक जानकारी प्राप्त की।

उन्होंने निर्देश दिया कि पूर्व में स्वीकृत योजनाओं को निर्धारित समय-सीमा के भीतर पूरा करने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएं। जिन योजनाओं का क्रियान्वयन अभी लंबित है, उन्हें प्राथमिकता के आधार पर पूर्ण किया जाए। साथ ही, संचालित योजनाओं की नियमित निगरानी करते हुए यह सुनिश्चित किया जाए कि उनके माध्यम से आम लोगों को वास्तविक एवं प्रत्यक्ष लाभ मिल रहा है।
उपायुक्त ने कहा कि जिले में सीएसआर निधि का उपयोग जनहित से जुड़े प्राथमिकता वाले क्षेत्रों में किया जाना चाहिए। इनमें शिक्षा, स्वास्थ्य, शुद्ध पेयजल, खेल, आंगनबाड़ी केंद्रों का सुदृढ़ीकरण तथा कौशल विकास प्रमुख रूप से शामिल हैं। उन्होंने कहा कि इन क्षेत्रों में योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन से आम नागरिकों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने के साथ-साथ जिले के समग्र विकास को भी गति मिल सकती है।
उन्होंने संबंधित कंपनियों को निर्देश दिया कि स्थानीय जरूरतों के अनुरूप योजनाओं का चयन करते हुए उनके क्रियान्वयन की प्रक्रिया को सरल, पारदर्शी एवं प्रभावी बनाया जाए। विशेष रूप से शिक्षा एवं स्वास्थ्य के क्षेत्र में आवश्यकताओं के अनुरूप योजनाएं तैयार करने तथा शुद्ध पेयजल जैसी बुनियादी सुविधाओं के विस्तार पर ध्यान देने को कहा गया। इसके साथ ही खेल गतिविधियों को प्रोत्साहित करने, आंगनबाड़ी केंद्रों की आधारभूत सुविधाओं को बेहतर बनाने तथा युवाओं के कौशल विकास से संबंधित योजनाओं को भी प्राथमिकता देने का निर्देश दिया गया।
उपायुक्त मेघा भारद्वाज ने कहा कि सीएसआर के अंतर्गत संचालित सभी परियोजनाओं में पारदर्शिता, गुणवत्ता एवं समयबद्धता का विशेष ध्यान रखा जाना चाहिए। उन्होंने कंपनियों के प्रतिनिधियों को निर्देश दिया कि योजनाओं के क्रियान्वयन के दौरान निर्धारित मानकों का अनुपालन सुनिश्चित किया जाए तथा कार्यों की नियमित निगरानी की जाए।

उन्होंने कहा कि योजनाओं की स्वीकृति से लेकर उनके धरातल पर क्रियान्वयन एवं पूर्णता तक प्रत्येक स्तर पर जवाबदेही सुनिश्चित करना आवश्यक है। इसके लिए संबंधित कंपनियां जिला प्रशासन के साथ नियमित समन्वय बनाए रखें तथा संचालित एवं प्रस्तावित योजनाओं की प्रगति से संबंधित रिपोर्ट समय-समय पर उपलब्ध कराएं। इससे योजनाओं की वास्तविक स्थिति का आकलन करने तथा आवश्यकतानुसार सुधारात्मक कदम उठाने में सहायता मिलेगी।
बैठक में उपायुक्त ने नई सीएसआर योजनाओं के चयन एवं क्रियान्वयन के दौरान जिला सीएसआर समिति के साथ आवश्यक समन्वय स्थापित करने पर विशेष बल दिया। उन्होंने कहा कि जिले में विभिन्न कंपनियों द्वारा संचालित योजनाओं के बीच समन्वय होना जरूरी है, ताकि एक ही क्षेत्र में योजनाओं का अनावश्यक दोहराव न हो और उपलब्ध संसाधनों का समुचित उपयोग किया जा सके।
उन्होंने कंपनियों को निर्देशित किया कि किसी भी नई योजना को तैयार करने एवं क्रियान्वित करने से पूर्व जिला सीएसआर समिति के साथ आवश्यक विचार-विमर्श एवं समन्वय सुनिश्चित किया जाए। इससे जिले की वास्तविक जरूरतों के अनुरूप योजनाओं का चयन किया जा सकेगा तथा सीएसआर निधि का उपयोग अधिक प्रभावी तरीके से जनहित में किया जा सकेगा।
उपायुक्त ने कंपनियों के प्रतिनिधियों से अपेक्षा व्यक्त की कि वे जिले के विकास में अपनी भागीदारी को और अधिक प्रभावी बनाएं। उन्होंने कहा कि ऐसी योजनाओं को प्राथमिकता दी जानी चाहिए, जिनका लाभ लंबे समय तक आम लोगों को मिलता रहे। योजनाओं की स्थिरता एवं दीर्घकालिक उपयोगिता को ध्यान में रखते हुए उनका क्रियान्वयन किया जाना चाहिए, ताकि सीएसआर के माध्यम से किए गए कार्यों का सकारात्मक प्रभाव आने वाले समय में भी बना रहे।
उपायुक्त ने कहा कि जिले में सीएसआर गतिविधियों को प्रभावी बनाने के लिए कंपनियों एवं जिला प्रशासन के बीच बेहतर समन्वय आवश्यक है। उन्होंने संबंधित कंपनियों से सीएसआर योजनाओं की समयबद्ध स्वीकृति, गुणवत्तापूर्ण क्रियान्वयन एवं प्रभावी अनुश्रवण सुनिश्चित करने को कहा।

उन्होंने कहा कि योजनाओं के क्रियान्वयन के दौरान उत्पन्न होने वाली समस्याओं का समाधान आपसी समन्वय से किया जाना चाहिए, ताकि विकास कार्यों में अनावश्यक विलंब न हो। जिला प्रशासन एवं कंपनियों के बीच नियमित संवाद एवं सूचनाओं के आदान-प्रदान से योजनाओं की प्रगति की बेहतर निगरानी की जा सकती है। इससे सीएसआर गतिविधियों को अधिक व्यवस्थित एवं परिणामोन्मुख बनाया जा सकेगा तथा जिले के अधिक से अधिक जनसमुदाय तक इनका लाभ पहुंचाना संभव होगा।
बैठक में पूर्व वित्तीय वर्षों के दौरान कंपनियों द्वारा कराए गए कार्यों से संबंधित उपयोगिता प्रमाण-पत्र उपलब्ध कराने एवं प्राप्त करने के विषय पर भी आवश्यक चर्चा की गई। उपायुक्त ने इस संबंध में संबंधित स्तर पर समन्वय स्थापित करने तथा आवश्यक दस्तावेजों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
उन्होंने कहा कि सीएसआर मद के तहत संचालित योजनाओं से संबंधित अभिलेखों एवं आवश्यक दस्तावेजों का व्यवस्थित संधारण किया जाना चाहिए। इससे योजनाओं की वित्तीय एवं भौतिक प्रगति का आकलन करने में सुविधा होगी तथा क्रियान्वयन प्रक्रिया में पारदर्शिता बनी रहेगी।

बैठक के अंत में उपायुक्त ने सभी संबंधित पदाधिकारियों एवं कंपनियों के प्रतिनिधियों से सीएसआर योजनाओं को गंभीरता से लेते हुए निर्धारित लक्ष्यों के अनुरूप कार्य करने की अपेक्षा व्यक्त की। उन्होंने कहा कि जनहितकारी योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करने के लिए सभी संबंधित पक्षों को अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन तत्परता एवं समन्वय के साथ करना चाहिए, ताकि सीएसआर निधि का लाभ जिले के जरूरतमंद लोगों तक पहुंच सके और विकासात्मक गतिविधियों को मजबूती मिल सके।
बैठक में उप विकास आयुक्त, परियोजना निदेशक, आईटीडीए, जिला भू-अर्जन पदाधिकारी, जिला समाज कल्याण पदाधिकारी, जिला शिक्षा पदाधिकारी, जिला शिक्षा अधीक्षक सहित विभिन्न कोल कंपनियों के प्रतिनिधि उपस्थित थे। बैठक में संबंधित पदाधिकारियों एवं कंपनी प्रतिनिधियों ने सीएसआर योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन, प्रगति एवं आगामी कार्ययोजना से जुड़े विभिन्न बिंदुओं पर चर्चा की।




