मंडरो में विकसित भारत गारंटी फॉर रोजगार एवं आजीविका मिशन ग्रामीण के तहत एक दिवसीय प्रशिक्षण सह कार्यशाला का आयोजन।
रोजगार गारंटी से आत्मनिर्भर ग्रामीण अर्थव्यवस्था की ओर बढ़ता कदम, पारदर्शिता और ग्रामसभा की भूमिका पर जोर।

मंडरो साहिबगंज। विकसित भारत गारंटी फॉर रोजगार एवं आजीविका मिशन ग्रामीण के तहत प्रखंड सभागार कक्ष, मंडरो में एक दिवसीय प्रशिक्षण-सह-कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ प्रखंड विकास पदाधिकारी मेघनाथ उरांव, बीपीओ अभिषेक आनंद तथा पंचायत प्रतिनिधि सुबोध सोरेन, अनिता हेम्ब्रम एवं ललित देवी ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्ज्वलित कर किया।
कार्यशाला के दौरान बीपीओ अभिषेक आनंद ने मनरेगा से विकसित भारत गारंटी फॉर रोजगार एवं आजीविका मिशन ग्रामीण तक की विकास यात्रा, उद्देश्य एवं प्रमुख प्रावधानों की विस्तारपूर्वक जानकारी दी। उन्होंने 125 दिनों की रोजगार गारंटी, चार प्राथमिक कार्य क्षेत्रों, केंद्र एवं राज्यांश के 60:40 अनुपात तथा कुल 318 प्रकार की योजनाओं के संबंध में मुखिया, पंचायत कर्मियों, स्वयंसेवकों एवं ग्रामीणों को विस्तृत जानकारी दी।

वहीं, कनीय अभियंता मो. नेहाल ने झारखंड में प्राथमिकता के आधार पर चयनित 57 प्रकार के कार्यों की जानकारी दी। उन्होंने योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन, ग्रामीण क्षेत्रों की आवश्यकताओं के अनुरूप योजनाओं के चयन तथा निर्धारित दिशा-निर्देशों के अनुपालन पर विशेष प्रकाश डाला।
कार्यशाला में युक्तधारा पोर्टल पर योजनाओं का इंद्राज, पंचायत स्तर पर प्रशिक्षण, पेसा एक्ट के तहत ग्रामसभा की भूमिका तथा ग्राम स्तर पर प्राथमिकता के आधार पर योजनाओं के चयन पर विशेष जोर दिया गया। बीपीओ अभिषेक आनंद ने योजनाओं के क्रियान्वयन में पूर्ण पारदर्शिता एवं जवाबदेही सुनिश्चित करने का निर्देश दिया।
उन्होंने NMMS के तहत कार्यस्थल पर निर्धारित समय पर दो वक्त की तस्वीर अपलोड करने तथा मजदूरों को समय पर मजदूरी भुगतान सुनिश्चित करने पर भी विशेष बल दिया। उन्होंने कहा कि योजनाओं का चयन ग्रामसभा की प्राथमिकताओं और स्थानीय जरूरतों के अनुरूप किया जाए, ताकि ग्रामीणों को अधिकतम लाभ मिल सके। साथ ही रोजगार उपलब्ध कराने के साथ गांवों में स्थायी परिसंपत्तियों का निर्माण भी सुनिश्चित हो।

कार्यशाला में विभिन्न पंचायतों से आए मुखिया, पंचायत सचिव, रोजगार सेवक, कनीय अभियंता, पंचायत कर्मी, स्वयंसेवक एवं ग्रामीण उपस्थित रहे।



