अंगुठिया में आयोजित हुआ 77वां वन महोत्सव, पौधारोपण के साथ पर्यावरण संरक्षण का लिया संकल्प।
उपायुक्त ने कहा—‘पेड़ केवल पेड़ नहीं, बल्कि पूरा पारिस्थितिकी तंत्र है’; जिलेवासियों से कम से कम एक पौधा लगाने और उसे वृक्ष बनाने की अपील।

पाकुड़। वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन विभाग की ओर से हिरणपुर प्रखंड अंतर्गत मंझलाडीह पंचायत के अंगुठिया ग्राम में 77वां वन महोत्सव उत्साह एवं पर्यावरण संरक्षण के संदेश के साथ आयोजित किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में हरियाली बढ़ाने के साथ-साथ आम लोगों को पौधारोपण, पौधों के संरक्षण और पर्यावरण संतुलन के प्रति जागरूक करना रहा।
कार्यक्रम का शुभारंभ उपायुक्त मेघा भारद्वाज, वन प्रमंडल पदाधिकारी सौरभ चंद्रा, जिला परिषद उपाध्यक्ष अशोक कुमार भगत, प्रखंड प्रमुख, प्रखंड विकास पदाधिकारी दिलीप टुडु, अंचल अधिकारी मनोज कुमार, मुखिया सहित अन्य जनप्रतिनिधियों एवं पदाधिकारियों ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर तथा पौधे में पानी डालकर किया।

इस अवसर पर उपायुक्त, डीएफओ, जिला परिषद उपाध्यक्ष समेत अन्य जनप्रतिनिधियों एवं अधिकारियों ने विभिन्न प्रजातियों के पौधे लगाए। कार्यक्रम में उपस्थित लोगों ने लगाए गए पौधों की नियमित देखभाल, सुरक्षा एवं संरक्षण कर उन्हें वृक्ष का स्वरूप देने का संकल्प लिया। अधिकारियों ने जिलेवासियों से अपील की कि वे अधिक से अधिक संख्या में पौधे लगाएं और पौधारोपण को केवल एक दिन का कार्यक्रम न मानकर निरंतर अभियान के रूप में आगे बढ़ाएं।
उपायुक्त मेघा भारद्वाज ने कहा कि एक पेड़ केवल पेड़ नहीं होता, बल्कि अपने आप में एक पूरा पारिस्थितिकी तंत्र होता है। मनुष्य, पक्षी, जीव-जंतु और कीट-पतंगे सभी किसी न किसी रूप में पेड़ों एवं वनस्पतियों पर निर्भर रहते हैं। पेड़ प्रकृति के संतुलन को बनाए रखने के साथ-साथ पर्यावरण को स्वच्छ रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
उन्होंने कहा कि वन महोत्सव केवल पौधारोपण तक सीमित नहीं रहना चाहिए। प्रत्येक व्यक्ति कम से कम एक पौधा लगाकर उसे बच्चे की तरह पाल-पोसकर बड़ा करने का संकल्प ले। उन्होंने नीम, जामुन, आम, कटहल, महुआ सहित स्थानीय एवं फलदार प्रजातियों के पौधे लगाने पर विशेष जोर दिया।

उपायुक्त ने कहा कि वर्तमान समय पौधारोपण के लिए अनुकूल है। पौधा लगाने के बाद उसकी नियमित सिंचाई, सुरक्षा और देखभाल करना उतना ही आवश्यक है, जितना पौधा लगाना। उन्होंने कहा कि जंगल एवं पेड़ मिट्टी के कटाव को रोकने, पर्यावरण को स्वच्छ रखने तथा जल संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। जंगल बचेंगे तभी जल स्रोत भी सुरक्षित रहेंगे।
उन्होंने कहा कि विकास कार्यों के साथ पर्यावरण संरक्षण का संतुलन बनाए रखना आज की आवश्यकता है। सड़क निर्माण, खनन एवं अन्य विकास परियोजनाएं आवश्यक हैं, लेकिन इनके साथ अधिक से अधिक पौधारोपण एवं लगाए गए पौधों का संरक्षण भी सुनिश्चित किया जाना चाहिए।
उपायुक्त ने युवाओं एवं जिलेवासियों से आह्वान किया कि पौधारोपण को केवल एक दिन का आयोजन न बनाकर इसे निरंतर जनअभियान का रूप दें और पाकुड़ जिले को अधिक हरा-भरा, स्वच्छ एवं प्रदूषण मुक्त बनाने में अपनी सक्रिय भागीदारी निभाएं।
वन प्रमंडल पदाधिकारी सौरभ चंद्रा ने कहा कि वन महोत्सव को केवल एक दिवसीय कार्यक्रम के रूप में नहीं, बल्कि सामाजिक दायित्व एवं सामूहिक जिम्मेदारी के रूप में देखा जाना चाहिए। केवल पौधा लगाकर तस्वीर खिंचवाना पर्याप्त नहीं है। हमारा वास्तविक संकल्प तभी पूरा होगा, जब लगाए गए प्रत्येक पौधे को संरक्षित कर उसे वृक्ष का स्वरूप दिया जाए।

उन्होंने कहा कि दूरस्थ ग्रामीण क्षेत्रों में वन महोत्सव आयोजित करने का उद्देश्य आम लोगों के बीच पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता को बढ़ावा देना है। निजी भूमि पर लगाए गए पौधों के संरक्षण एवं संवर्धन के प्रति भी लोगों को जागरूक होने की आवश्यकता है।
डीएफओ ने सभी लोगों से अपील की कि इस बरसात कम से कम एक पौधा अवश्य लगाएं और उसे वृक्ष बनाने का संकल्प लें। उन्होंने कहा कि आने वाली पीढ़ियों को बेहतर पर्यावरण देना हम सभी की जिम्मेदारी है।
जिला परिषद उपाध्यक्ष अशोक कुमार भगत ने कहा कि वन महोत्सव के माध्यम से पौधारोपण एवं पर्यावरण संरक्षण का संदेश गांव-गांव तक पहुंचाना सराहनीय पहल है। उन्होंने उपायुक्त मेघा भारद्वाज की पहल की सराहना करते हुए कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में जाकर लोगों के साथ संवाद स्थापित कर पौधारोपण करने से पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता और मजबूत होगी।
उन्होंने कहा कि आज लगाया गया एक पौधा आने वाली पीढ़ियों के लिए स्थायी विरासत है। निजी भूमि पर लगाए गए पौधों को अपनी जिम्मेदारी एवं संपत्ति समझकर उनकी नियमित देखभाल करनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि पर्यावरण संरक्षण केवल सरकार या किसी एक विभाग की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि यह हर नागरिक की सामूहिक जिम्मेदारी है। यदि प्रत्येक व्यक्ति एक पौधा लगाकर उसकी देखभाल का संकल्प ले, तो आने वाले वर्षों में क्षेत्र में हरियाली का विस्तार किया जा सकता है।

वन महोत्सव कार्यक्रम को जनकल्याणकारी योजनाओं से भी जोड़ा गया। कार्यक्रम के दौरान उपायुक्त, वन प्रमंडल पदाधिकारी एवं जिला परिषद उपाध्यक्ष द्वारा विभिन्न योजनाओं के तहत लाभुकों के बीच परिसंपत्तियों एवं आवश्यक सामग्री का वितरण किया गया।
वन विभाग की ओर से रेस्क्यू किट एवं महुआ नेट, प्रखंड सह अंचल कार्यालय की ओर से मुख्यमंत्री वृद्धा पेंशन योजना के स्वीकृति पत्र, वीबीजीरामजी के मजदूरों के बीच टोकरी एवं कुदाल, लाभुकों को जाति एवं निवास प्रमाण पत्र, साइकिल एवं श्रम कार्ड सहित अन्य लाभ प्रदान किए गए।
इस दौरान लाभुकों में काफी उत्साह देखा गया। अधिकारियों ने कहा कि सरकारी योजनाओं का लाभ पात्र लोगों तक पहुंचाना प्रशासन की प्राथमिकता है और ऐसे कार्यक्रमों के माध्यम से ग्रामीणों को विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं से जोड़ने का प्रयास लगातार जारी रहेगा।
वन महोत्सव कार्यक्रम में स्थानीय जनप्रतिनिधियों, पदाधिकारियों, वन विभाग के कर्मियों, ग्रामीणों, महिलाओं, युवाओं एवं बच्चों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। कार्यक्रम के दौरान पर्यावरण संरक्षण, पौधारोपण और पौधों की नियमित देखभाल को लेकर लोगों को जागरूक किया गया।

कार्यक्रम में उपस्थित लोगों ने संकल्प लिया कि वे अपने आसपास अधिक से अधिक पौधे लगाएंगे, लगाए गए पौधों की सुरक्षा करेंगे और उन्हें वृक्ष बनने तक नियमित रूप से उनकी देखभाल करेंगे।
वन महोत्सव के माध्यम से अंगुठिया गांव से दिया गया संदेश स्पष्ट रहा कि पर्यावरण संरक्षण किसी एक दिन की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के सुरक्षित और स्वस्थ भविष्य के लिए निरंतर चलने वाला सामूहिक अभियान है।




