Welcome to Jharkhand Sahibganj News   Click to listen highlighted text! Welcome to Jharkhand Sahibganj News
झारखंड

यूपीआई पर शुल्क लगाने की संभावित तैयारी से छोटे व्यापारियों में चिंता।

चैंबर अध्यक्ष राजेश अग्रवाल ने प्रधानमंत्री, वित्त मंत्री और एनपीसीआई अध्यक्ष को पत्र भेजकर शुल्क नहीं लगाने की मांग की।

साहिबगंज। डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने में यूपीआई (यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस) की महत्वपूर्ण भूमिका के बीच इसके लेन-देन पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (एमडीआर) शुल्क लगाए जाने की संभावित व्यवस्था को लेकर व्यापारिक जगत में चिंता बढ़ गई है। ईस्टर्न झारखंड चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज, साहिबगंज के अध्यक्ष राजेश अग्रवाल ने इस पर चिंता जताते हुए कहा कि यूपीआई पर शुल्क लगाना छोटे व्यापारियों और आम जनता के हितों के प्रतिकूल होगा। उन्होंने सरकार से इस विषय पर जनहित को ध्यान में रखते हुए निर्णय लेने का आग्रह किया है।

राजेश अग्रवाल ने कहा कि यूपीआई आज आम जनजीवन और व्यापारिक गतिविधियों का अभिन्न हिस्सा बन चुका है। चाय की दुकानों, सब्जी विक्रेताओं, ठेला संचालकों और किराना दुकानों से लेकर बड़े व्यावसायिक प्रतिष्ठानों तक इसका व्यापक उपयोग हो रहा है। छोटी-बड़ी खरीदारी में यूपीआई के माध्यम से भुगतान करना लोगों के लिए सहज और सुविधाजनक बन गया है। ऐसे में इस पर अतिरिक्त शुल्क लगाने से पहले उसके सामाजिक और आर्थिक प्रभावों पर गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए।

उन्होंने कहा कि यदि यूपीआई लेन-देन पर 0.4 प्रतिशत एमडीआर शुल्क लगाया जाता है, तो इससे छोटे व्यापारियों की परिचालन लागत बढ़ सकती है। सीमित लाभ पर कारोबार करने वाले दुकानदारों के लिए यह अतिरिक्त आर्थिक बोझ होगा। वहीं, व्यापारी यदि इस शुल्क का भार ग्राहकों पर डालते हैं, तो आम उपभोक्ताओं की जेब पर भी इसका असर पड़ सकता है। इससे डिजिटल भुगतान के प्रति लोगों की सहजता और स्वीकार्यता प्रभावित होने की आशंका है।

चैंबर अध्यक्ष ने कहा कि यूपीआई की लोकप्रियता का प्रमुख कारण छोटे से छोटे भुगतान के लिए इसकी सरल और निःशुल्क उपलब्धता है। ऐसे में इसकी तुलना क्रेडिट और डेबिट कार्ड से करना उचित नहीं है। यूपीआई अब केवल भुगतान का माध्यम नहीं, बल्कि करोड़ों लोगों की दैनिक आवश्यकता बन चुका है। इसे निःशुल्क बनाए रखना व्यापारियों और उपभोक्ताओं, दोनों के हित में आवश्यक है।

राजेश अग्रवाल ने कहा कि केंद्र सरकार डिजिटल इंडिया और नकदी रहित अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने के लिए लगातार प्रयास कर रही है। यूपीआई ने भुगतान प्रक्रिया को सरल बनाने के साथ ही व्यापारिक लेन-देन में पारदर्शिता बढ़ाने में भी योगदान दिया है। ऐसे में डिजिटल भुगतान पर अतिरिक्त शुल्क लगाने से लोगों का रुझान फिर से नकदी आधारित लेन-देन की ओर बढ़ सकता है। उन्होंने कहा कि डिजिटल भुगतान को प्रोत्साहित करने के लिए ऐसी व्यवस्था होनी चाहिए, जो सभी वर्गों के लिए सुलभ और किफायती हो।

उन्होंने सरकारी विभागों और व्यापारियों के लिए नियमों में समानता का मुद्दा उठाते हुए सवाल किया कि जब रेलवे, बिजली बोर्ड और नगर पालिका जैसे सरकारी विभाग यूपीआई के माध्यम से भुगतान स्वीकार कर रहे हैं, तो व्यापारियों के लिए अलग से शुल्क संबंधी नियम बनाने का औचित्य क्या है। उन्होंने कहा कि डिजिटल भुगतान से जुड़े नियम न्यायसंगत होने चाहिए, ताकि किसी एक वर्ग पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ न पड़े।

यूपीआई पर संभावित शुल्क का मामला उठाते हुए राजेश अग्रवाल ने प्रधानमंत्री, केंद्रीय वित्त मंत्री और भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम (एनपीसीआई) के अध्यक्ष को पत्र भेजकर इस व्यवस्था पर पुनर्विचार करने तथा यूपीआई को निःशुल्क बनाए रखने का आग्रह किया है। इसके अलावा, उन्होंने साहिबगंज के उपायुक्त से मुलाकात कर उन्हें भी इस संबंध में पत्र सौंपा है। साथ ही, सांसद और विधायक को पत्र भेजकर व्यापारियों के हित में आवश्यक पहल करने का अनुरोध किया है।

राजेश अग्रवाल ने कहा कि किसी भी नीतिगत निर्णय में छोटे व्यापारियों और आम उपभोक्ताओं के हितों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। उन्होंने सरकार से आग्रह किया कि यूपीआई पर शुल्क लगाने से संबंधित किसी भी निर्णय से पहले व्यापारिक संगठनों, छोटे दुकानदारों और उपभोक्ताओं की राय पर विचार किया जाए। उन्होंने दोहराया कि यूपीआई को निःशुल्क बनाए रखना डिजिटल भुगतान व्यवस्था को मजबूत करने तथा छोटे व्यापारियों और आम जनता को अतिरिक्त आर्थिक बोझ से बचाने के लिए आवश्यक है।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button
error: Content is protected !!
Click to listen highlighted text!