‘नव-दिशा पाकुड़’ से शिक्षा, संस्कार, नवाचार और कौशल विकास को मिलेगा नया आयाम।
नन्हे नागरिकों की मार्गदर्शिका, विद्यार्थियों की मार्गदर्शिका एवं ‘हम और जेंडर सेंसिटाइजेशन’ पुस्तिका का विमोचन; जिला प्रशासन एवं फिलो एडटेक के बीच एमओयू पर हस्ताक्षर।

पाकुड़। रविन्द्र भवन टाउन हॉल, पाकुड़ में जिला प्रशासन के तत्वावधान में आयोजित ‘नव-दिशा पाकुड़’ समग्र शिक्षा, गुणवत्ता एवं बाल विकास गतिविधि का भव्य शुभारंभ किया गया। कार्यक्रम के दौरान शिक्षा के क्षेत्र में गुणवत्ता सुधार, विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास, संस्कार, नवाचार, रचनात्मकता, आत्मविश्वास एवं कौशल विकास को बढ़ावा देने से जुड़ी विभिन्न गतिविधियों की शुरुआत की गई। इस अवसर पर ‘नन्हे नागरिकों की मार्गदर्शिका’, ‘विद्यार्थियों की मार्गदर्शिका’ तथा ‘हम और जेंडर सेंसिटाइजेशन’ पुस्तिकाओं का विमोचन किया गया। साथ ही शिक्षा के क्षेत्र में विभिन्न गतिविधियों एवं कार्यक्रमों के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए जिला प्रशासन एवं फिलो एडटेक के बीच समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए।
कार्यक्रम का उद्घाटन उपायुक्त मेघा भारद्वाज, जिला शिक्षा पदाधिकारी अनीता पूर्ति, जिला शिक्षा अधीक्षक, एडीपीओ तथा फिलो एडटेक के निदेशक एवं प्रबंधक द्वारा संयुक्त रूप से किया गया। कार्यक्रम में जिले के विभिन्न विद्यालयों के प्रधानाध्यापक, शिक्षक-शिक्षिकाएं एवं छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।

‘नव-दिशा पाकुड़’ को जिले में शिक्षा व्यवस्था को और अधिक प्रभावी एवं गुणवत्तापूर्ण बनाने की दिशा में एक व्यापक पहल के रूप में शुरू किया गया है। इसका उद्देश्य विद्यार्थियों को केवल पाठ्यक्रम आधारित शिक्षा तक सीमित न रखते हुए उनके व्यक्तित्व विकास, संस्कार, अनुशासन, आत्मविश्वास, रचनात्मक सोच, नवाचार, कौशल एवं करियर निर्माण पर भी विशेष ध्यान देना है।
इस पहल के माध्यम से विद्यार्थियों को शैक्षणिक मार्गदर्शन के साथ-साथ जीवन कौशल एवं व्यवहारिक ज्ञान उपलब्ध कराने का प्रयास किया जाएगा। विद्यालयों में पूरे वर्ष विभिन्न गतिविधियों का आयोजन कर विद्यार्थियों की प्रतिभा को सामने लाने और उन्हें अपनी क्षमता के अनुरूप आगे बढ़ने का अवसर दिया जाएगा।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उपायुक्त मेघा भारद्वाज ने कहा कि ‘नव-दिशा पाकुड़’ केवल पढ़ाई तक सीमित कार्यक्रम नहीं है, बल्कि विद्यार्थियों को अच्छे व्यवहार, अनुशासन, जिम्मेदारी और आत्मविश्वास के साथ बेहतर नागरिक बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है।

उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों एवं शिक्षकों का व्यवहार कैसा होना चाहिए, विद्यालय की संपत्ति की देखभाल किस प्रकार की जानी चाहिए और विद्यार्थियों में जिम्मेदारी की भावना कैसे विकसित की जाए, जैसे महत्वपूर्ण विषयों को भी कार्यक्रम के मॉड्यूल में शामिल किया गया है। उन्होंने विद्यार्थियों से अपील की कि वे अच्छी आदतों और सकारात्मक व्यवहार को केवल विद्यालय परिसर तक सीमित न रखें, बल्कि उसे अपने दैनिक जीवन का हिस्सा बनाएं।
उपायुक्त ने कहा कि जब विद्यार्थी जिम्मेदारी, अनुशासन और अच्छे व्यवहार को अपने जीवन में अपनाएंगे तो वे न केवल बेहतर नागरिक बनेंगे, बल्कि अपने विद्यालय, परिवार, समाज और जिले का नाम भी रोशन करेंगे।
उपायुक्त ने जेंडर सेंसिटाइजेशन को ‘नव-दिशा पाकुड़’ का महत्वपूर्ण हिस्सा बताते हुए कहा कि विद्यार्थियों में एक-दूसरे के प्रति सम्मान, समानता और समझ की भावना विकसित करना आवश्यक है। इसी उद्देश्य से शिक्षकों के लिए जेंडर सेंसिटाइजेशन से संबंधित मॉड्यूल एवं पुस्तिका तैयार की गई है।
उन्होंने बताया कि विद्यालयों में इस विषय को लेकर नियमित गतिविधियां आयोजित की जाएंगी। पाठ्यपुस्तक आधारित गतिविधियों के साथ-साथ क्षेत्रीय एवं व्यवहारिक गतिविधियों के माध्यम से विद्यार्थियों को इन विषयों से जोड़ा जाएगा, ताकि वे समानता, सम्मान और जिम्मेदारी के मूल्यों को व्यवहारिक रूप से समझ सकें।

उपायुक्त ने कहा कि जिले के कई विद्यालयों में शिक्षकों की सीमित उपलब्धता के कारण विद्यार्थियों को अतिरिक्त शैक्षणिक सहयोग की आवश्यकता होती है। इसी आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए ‘नव-दिशा पाकुड़’ के माध्यम से विद्यार्थियों को अतिरिक्त शैक्षणिक सहयोग उपलब्ध कराने का प्रयास किया जा रहा है।
उन्होंने बताया कि विद्यार्थियों को 24×7 लाइव इंटरएक्टिव कक्षाओं के माध्यम से विषय विशेषज्ञों से जुड़ने का अवसर देने का प्रयास किया जाएगा। इसका उद्देश्य जेएसी पाठ्यक्रम को समय पर पूरा कराने के साथ विद्यार्थियों के परीक्षा परिणाम में सुधार करना तथा उन्हें भविष्य में विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए तैयार करना है।
उन्होंने विद्यार्थियों से अपने लक्ष्य के प्रति गंभीर रहने की अपील करते हुए कहा कि किसी का सपना सिविल सेवा में जाने का हो सकता है, कोई चिकित्सक, अभियंता, सैनिक या किसी अन्य क्षेत्र में अपना भविष्य बनाना चाहता हो सकता है। विद्यार्थियों को बड़ा लक्ष्य निर्धारित करने से कभी संकोच नहीं करना चाहिए। लक्ष्य प्राप्त करने के लिए निरंतर मेहनत, अनुशासन, समर्पण और सही दिशा आवश्यक है।
उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में हार्ड वर्क के साथ स्मार्ट वर्क भी जरूरी है। ‘नव-दिशा पाकुड़’ के माध्यम से विद्यार्थियों को बाहरी शिक्षकों, विषय विशेषज्ञों एवं करियर काउंसलिंग विशेषज्ञों से संवाद का अवसर मिलेगा। इससे विद्यार्थियों का दृष्टिकोण व्यापक होगा तथा उन्हें विभिन्न करियर विकल्पों की जानकारी प्राप्त करने में मदद मिलेगी।
उपायुक्त ने विद्यार्थियों को इंटरनेट का सदुपयोग करने की सलाह देते हुए कहा कि इंटरनेट पर ज्ञान एवं जानकारी के अनेक स्रोत उपलब्ध हैं, लेकिन सही जानकारी का चयन करना और उसका उचित उपयोग करना भी एक महत्वपूर्ण कौशल है।

उन्होंने कहा कि उचित मार्गदर्शन के अभाव में इंटरनेट का उपयोग विद्यार्थियों के लिए समय की बर्बादी का कारण बन सकता है। इसलिए शिक्षकों एवं अभिभावकों की जिम्मेदारी है कि वे विद्यार्थियों को इंटरनेट के सही एवं सकारात्मक उपयोग के लिए मार्गदर्शन दें।
उन्होंने बताया कि ‘नव-दिशा पाकुड़’ के तहत विद्यार्थियों का नियमित मूल्यांकन किया जाएगा। इसके साथ ही विभिन्न शैक्षणिक एवं गतिविधि आधारित प्रतियोगिताओं का आयोजन भी किया जाएगा। बेहतर प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों एवं विद्यालयों को चिन्हित कर उन्हें आगे की तैयारी के लिए विशेष सहयोग एवं मार्गदर्शन प्रदान किया जाएगा।
उपायुक्त ने कहा कि विद्यार्थियों का लक्ष्य केवल अच्छे अंक प्राप्त करना नहीं होना चाहिए, बल्कि विषय को समझना और उसकी अवधारणाओं को आत्मसात करना भी उतना ही महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि सफलता का कोई शॉर्टकट नहीं होता। मेहनत, अनुशासन, सही दिशा और निरंतर प्रयास ही सफलता की मजबूत नींव हैं।
जिला शिक्षा पदाधिकारी अनीता पूर्ति ने कहा कि ‘नव-दिशा पाकुड़’ एक व्यापक पहल है, जिसके माध्यम से शिक्षा की गुणवत्ता, बाल विकास, संस्कार, जागरूकता, नवाचार एवं कौशल विकास से जुड़ी विभिन्न गतिविधियों को एक मंच पर लाया जाएगा।
उन्होंने कहा कि पाकुड़ जैसे जिले में इस पहल का विशेष महत्व है। इसके माध्यम से शिक्षकों एवं विद्यार्थियों को अनुशासन, डूज एंड डोंट्स, सड़क सुरक्षा, जेंडर न्यूट्रैलिटी सहित विभिन्न महत्वपूर्ण विषयों के प्रति जागरूक किया जाएगा।
उन्होंने बताया कि कक्षा एक से बारहवीं तक के विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। इसके तहत पूरे वर्ष विद्यालयों में विभिन्न रचनात्मक एवं शैक्षणिक गतिविधियों का आयोजन किया जाएगा।

‘नव-दिशा पाकुड़’ के तहत विद्यालयों में विज्ञान प्रदर्शनी, सांस्कृतिक कार्यक्रम, वाद-विवाद प्रतियोगिता, निबंध लेखन, स्वच्छता अभियान, सड़क सुरक्षा जागरूकता, जन-जागरूकता कार्यक्रम सहित कई गतिविधियां आयोजित की जाएंगी।
इन गतिविधियों के माध्यम से विद्यार्थियों को पढ़ाई के साथ-साथ अपनी रचनात्मक प्रतिभा और कौशल प्रदर्शित करने का अवसर मिलेगा। विद्यार्थियों में नेतृत्व क्षमता, आत्मविश्वास, टीम भावना, सामाजिक जिम्मेदारी और समस्या समाधान की क्षमता विकसित करने पर भी जोर दिया जाएगा।
कार्यक्रम के दौरान डीएमएफटी अधिकारी दिव्या द्वारा तीनों मॉड्यूल के माध्यम से शिक्षकों एवं विद्यार्थियों के लिए निर्धारित गतिविधियों एवं आवश्यक दिशा-निर्देशों की जानकारी दी गई। उन्होंने बताया कि ‘नव-दिशा पाकुड़’ के अंतर्गत विद्यार्थियों के शैक्षणिक विकास के साथ-साथ उनके सामाजिक, व्यवहारिक एवं व्यक्तित्व विकास को भी प्राथमिकता दी जाएगी।
कार्यक्रम में उपस्थित शिक्षकों एवं विद्यार्थियों को विभिन्न मॉड्यूल, गतिविधियों और कार्यक्रम के उद्देश्यों की विस्तृत जानकारी दी गई। अधिकारियों ने कहा कि इस पहल को विद्यालय स्तर तक प्रभावी ढंग से पहुंचाने के लिए सभी संबंधित पदाधिकारियों, शिक्षकों एवं अन्य हितधारकों की सक्रिय भागीदारी आवश्यक है।
‘नव-दिशा पाकुड़’ के शुभारंभ से जिले में शिक्षा, संस्कार, नवाचार एवं बाल विकास से जुड़ी गतिविधियों को एक संगठित दिशा मिलने की उम्मीद है। कार्यक्रम के माध्यम से विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के साथ-साथ व्यवहारिक ज्ञान, करियर मार्गदर्शन, कौशल विकास एवं रचनात्मक गतिविधियों से जोड़ने का प्रयास किया जाएगा।
कार्यक्रम के अंत में उपस्थित अधिकारियों एवं शिक्षकों ने इस पहल को विद्यालयों तक प्रभावी ढंग से पहुंचाने तथा विद्यार्थियों को इसका अधिकतम लाभ दिलाने पर जोर दिया। मौके पर जिले के विभिन्न विद्यालयों के प्रधानाध्यापक, शिक्षक-शिक्षिकाएं एवं बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं मौजूद रहे।




