मोटर दुर्घटना दावा मामलों के त्वरित निष्पादन पर कार्यशाला आयोजित।
पीड़ितों को समय पर मुआवजा दिलाने पर जोर, पुलिस एवं बीमा कंपनियों के बीच बेहतर समन्वय का निर्देश।

साहिबगंज। झारखंड राज्य विधिक सेवा प्राधिकार, रांची के निर्देशानुसार तथा प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश सह अध्यक्ष, जिला विधिक सेवा प्राधिकार, साहिबगंज अखिल कुमार के मार्गदर्शन में रविवार को व्यवहार न्यायालय परिसर स्थित लोक अदालत कक्ष में जिला स्तरीय मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण (एमएसीटी) पर एक दिवसीय कार्यशाला आयोजित की गई। इसका उद्देश्य सड़क दुर्घटना के पीड़ितों एवं उनके आश्रितों को समय पर न्यायोचित मुआवजा दिलाना, दावा प्रक्रिया को सरल बनाना तथा संबंधित विभागों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करना था।
कार्यशाला का उद्घाटन जिला एवं सत्र न्यायाधीश प्रथम गुलाम हैदर, जिला न्यायाधीश सह अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश-तृतीय शिव करण, जिला विधिक सेवा प्राधिकार के सचिव विश्वनाथ भगत तथा लोक अभियोजक नीतू ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्ज्वलित कर किया। इस दौरान न्यायिक पदाधिकारियों, पुलिस अधिकारियों एवं परिवहन विभाग के प्रतिनिधियों की उपस्थिति में मोटर दुर्घटना दावा मामलों के कानूनी और व्यावहारिक पहलुओं पर विस्तार से चर्चा की गई।
कार्यशाला को संबोधित करते हुए जिला एवं सत्र न्यायाधीश प्रथम गुलाम हैदर ने कहा कि सड़क दुर्घटना से प्रभावित व्यक्तियों एवं उनके आश्रितों को समय पर उचित मुआवजा उपलब्ध कराना अत्यंत महत्वपूर्ण है। इसमें पुलिस पदाधिकारियों की भूमिका अहम है। उन्होंने कहा कि पुलिस का दायित्व केवल प्राथमिकी दर्ज करने तक सीमित नहीं है, बल्कि दुर्घटना से संबंधित आवश्यक दस्तावेजों का संकलन, सत्यापन तथा निर्धारित कानूनी प्रक्रिया को समय पर पूरा करना भी उसकी जिम्मेदारी है।
उन्होंने दुर्घटनाग्रस्त वाहनों के कागजातों की जिला परिवहन पदाधिकारी के माध्यम से जांच कराने, संबंधित बीमा कंपनी को समय पर सूचना देने तथा आवश्यक प्रतिवेदन एवं दस्तावेज उपलब्ध कराने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि समय पर मुआवजा मिलने से दुर्घटना में प्रभावित परिवारों को आर्थिक संबल मिलता है। इसलिए सभी संबंधित पदाधिकारियों को संवेदनशीलता एवं जिम्मेदारी के साथ कार्य करना चाहिए।
जिला न्यायाधीश सह अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश-तृतीय शिव करण ने मोटर दुर्घटना से संबंधित कानूनी प्रावधानों एवं प्रक्रियाओं की जानकारी देते हुए कहा कि दुर्घटना से संबंधित आवश्यक दस्तावेज 30 दिनों के भीतर न्यायालय में प्रस्तुत करना अनिवार्य है। निर्धारित समय-सीमा में दस्तावेज प्रस्तुत नहीं किए जाने की स्थिति में न्यायालय को इसकी सूचना देना आवश्यक है।

उन्होंने थाना प्रभारियों एवं पुलिस पदाधिकारियों से दुर्घटना के मामलों में निर्धारित समय-सीमा का पालन करने तथा दस्तावेजों के संकलन एवं सत्यापन में अनावश्यक विलंब नहीं करने की अपील की। साथ ही उन्होंने सभी थाना प्रभारियों से सड़क दुर्घटना पीड़ितों एवं उनके आश्रितों को न्यायोचित मुआवजा दिलाने की प्रक्रिया में तत्परता से सहयोग करने का आह्वान किया।
कार्यशाला में पुलिस, बीमा कंपनियों एवं परिवहन विभाग के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने पर विशेष बल दिया गया। वक्ताओं ने कहा कि दुर्घटना से संबंधित तथ्यों का सही संकलन, वाहन के दस्तावेजों का सत्यापन तथा बीमा संबंधी जानकारी समय पर उपलब्ध होने से मुआवजा प्रक्रिया को सरल एवं प्रभावी बनाया जा सकता है। सभी संबंधित विभागों से पीड़ितों के प्रति संवेदनशील दृष्टिकोण अपनाते हुए अपनी जिम्मेदारियों का समयबद्ध निर्वहन करने की अपेक्षा की गई।
कार्यशाला में अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी सुशील कुमार, परिवहन विभाग के राज हंस, नगर थाना प्रभारी सह पुलिस निरीक्षक अमित कुमार गुप्ता, जिरवाबाड़ी थाना प्रभारी शशि सिंह, मुफस्सिल थाना प्रभारी नितेश पांडेय, तालझारी थाना प्रभारी सहित विभिन्न थानों के पुलिस पदाधिकारी उपस्थित रहे।
इसके अतिरिक्त जिला विधिक सेवा प्राधिकार के एलएडीसी, परिवहन विभाग एवं पुलिस विभाग के अन्य पदाधिकारियों तथा मोटर दुर्घटना दावा मामलों से जुड़े विभिन्न विभागों के प्रतिनिधियों ने भी भाग लिया। कार्यशाला के माध्यम से दुर्घटना पीड़ितों को समय पर न्यायोचित मुआवजा दिलाने के लिए समयबद्ध कार्रवाई, कानूनी प्रावधानों के अनुपालन एवं विभागीय समन्वय को आवश्यक बताया गया।



