विश्व बाल श्रम निषेध दिवस पर साहिबगंज में चला जागरूकता अभियान, बच्चों के अधिकारों की रक्षा का लिया गया संकल्प।
डीएलएसए के तत्वावधान में पंचायतों और ग्रामीण क्षेत्रों में आयोजित हुए विशेष कार्यक्रम, बाल श्रम उन्मूलन को लेकर लोगों को किया गया जागरूक।

साहिबगंज। विश्व बाल श्रम निषेध दिवस के अवसर पर झारखंड राज्य विधिक सेवा प्राधिकार (झालसा), रांची के निर्देशानुसार एवं प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश सह अध्यक्ष, जिला विधिक सेवा प्राधिकार (डीएलएसए), साहिबगंज अखिल कुमार के मार्गदर्शन में जिले के विभिन्न पंचायतों एवं ग्रामीण क्षेत्रों में व्यापक जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए गए। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य बाल श्रम उन्मूलन के प्रति जन-जागरूकता बढ़ाना, बच्चों के अधिकारों की रक्षा सुनिश्चित करना तथा उन्हें शिक्षा एवं सुरक्षित वातावरण से जोड़ना था।
जिला विधिक सेवा प्राधिकार, साहिबगंज के सचिव विश्वनाथ भगत ने बताया कि जागरूकता सप्ताह के तहत पारा लीगल वॉलंटियर्स (पीएलवी) एवं न्याय मित्रों द्वारा गांव-गांव जाकर लोगों को बाल श्रम के दुष्परिणामों तथा बच्चों के संवैधानिक एवं कानूनी अधिकारों के संबंध में जागरूक किया गया। इस दौरान ग्रामीणों को बताया गया कि बाल श्रम बच्चों के शारीरिक, मानसिक, सामाजिक एवं शैक्षणिक विकास पर गंभीर प्रतिकूल प्रभाव डालता है और उनके उज्ज्वल भविष्य को बाधित करता है।
कार्यक्रम के दौरान उपस्थित लोगों को बाल श्रम (निषेध एवं विनियमन) अधिनियम, शिक्षा का अधिकार अधिनियम, किशोर न्याय अधिनियम तथा बच्चों के संरक्षण से संबंधित विभिन्न कानूनी प्रावधानों की विस्तृत जानकारी दी गई। साथ ही यह भी बताया गया कि प्रत्येक बच्चे को शिक्षा, सुरक्षा, स्वास्थ्य एवं सम्मानपूर्ण जीवन का अधिकार प्राप्त है और इन अधिकारों की रक्षा करना समाज के प्रत्येक नागरिक की जिम्मेदारी है।
जागरूकता कार्यक्रम में बाल तस्करी, बंधुआ मजदूरी, बाल शोषण तथा बाल अधिकारों के उल्लंघन से बचाव के उपायों पर भी विस्तार से चर्चा की गई। ग्रामीणों को बताया गया कि यदि किसी बच्चे से श्रम कराया जा रहा हो अथवा उसके अधिकारों का हनन हो रहा हो, तो इसकी सूचना संबंधित विभाग या जिला विधिक सेवा प्राधिकार को देकर कानूनी सहायता प्राप्त की जा सकती है।

सचिव विश्वनाथ भगत ने कहा कि ऐसे कार्यक्रमों का उद्देश्य समाज में बाल श्रम के प्रति संवेदनशीलता विकसित करना तथा बच्चों के लिए सुरक्षित, शिक्षित एवं सम्मानजनक वातावरण सुनिश्चित करना है। उन्होंने कहा कि बाल श्रम मुक्त समाज का निर्माण केवल प्रशासनिक प्रयासों से संभव नहीं है, बल्कि इसके लिए समाज के प्रत्येक वर्ग की सक्रिय भागीदारी आवश्यक है।
कार्यक्रम में स्थानीय ग्रामीणों, महिलाओं, युवाओं एवं बच्चों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। सभी ने बाल श्रम मुक्त समाज के निर्माण, बच्चों को विद्यालयों से जोड़ने तथा उनके अधिकारों की रक्षा के लिए सामूहिक संकल्प लिया। जिला विधिक सेवा प्राधिकार, साहिबगंज द्वारा भविष्य में भी इस प्रकार के जन-जागरूकता कार्यक्रम लगातार आयोजित किए जाने की जानकारी दी गई।
विश्व बाल श्रम निषेध दिवस पर आयोजित इन कार्यक्रमों के माध्यम से यह संदेश दिया गया कि बच्चों का स्थान विद्यालयों में है, कार्यस्थलों पर नहीं। समाज, प्रशासन और अभिभावकों के संयुक्त प्रयासों से ही बाल श्रम जैसी सामाजिक बुराई को समाप्त कर बच्चों के सुरक्षित और उज्ज्वल भविष्य का मार्ग प्रशस्त किया जा सकता है।



