वीआईपी रोड से टीबी उन्मूलन जागरूकता रथ को दिखाई गई हरी झंडी, 100 दिवसीय विशेष अभियान की शुरुआत।
जिले के 312 हाई-रिस्क गांवों में चलेगा सघन मरीज खोज अभियान, घर-घर जांच और निःशुल्क उपचार की व्यवस्था।

पाकुड़। स्वास्थ्य विभाग द्वारा टीबी (क्षय रोग) उन्मूलन के लिए चलाए जा रहे विशेष अभियान के तहत आज वीआईपी रोड से जागरूकता रथ को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया गया। इस अवसर पर प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश दिवाकर पांडे, उपायुक्त मनीष कुमार, पुलिस अधीक्षक निधि द्विवेदी एवं फैमिली जज ने संयुक्त रूप से अभियान का शुभारंभ किया।
यह अभियान जिले को टीबी मुक्त बनाने के उद्देश्य से 100 दिनों तक चलाया जाएगा, जिसके अंतर्गत संभावित मरीजों की सक्रिय खोज की जाएगी। जागरूकता रथ गांव-गांव जाकर लोगों को टीबी के लक्षण, बचाव और उपचार के बारे में जानकारी देगा तथा संदिग्ध मरीजों की पहचान करेगा।
उपायुक्त मनीष कुमार ने बताया कि इस अभियान के तहत मरीजों को निःशुल्क जांच और उपचार की सुविधा दी जाएगी। अब लोगों को जांच के लिए अस्पताल जाने की आवश्यकता नहीं होगी, बल्कि स्वास्थ्य कर्मी घर-घर जाकर सैंपल संग्रह करेंगे और जांच की प्रक्रिया पूरी करेंगे।

जिले के कुल 312 हाई-रिस्क गांवों की पहचान की गई है, जहां 06 अप्रैल से माइक्रोप्लान के तहत 100 दिनों तक लगातार आयुष्मान आरोग्य शिविर आयोजित किए जा रहे हैं। इन शिविरों में टीबी के साथ-साथ अन्य बीमारियों की भी जांच की जा रही है।
अभियान के दौरान आधुनिक तकनीकों का उपयोग करते हुए हैंडहेल्ड एक्स-रे मशीन, IGRA टेस्ट और CY-TB टेस्ट की सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है। जांच में पॉजिटिव पाए जाने वाले मरीजों को निःशुल्क टीपीटी दवा भी दी जा रही है, ताकि संक्रमण को फैलने से रोका जा सके।
इसके साथ ही, सभी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों (PHC) और आयुष्मान आरोग्य मंदिरों के स्तर पर शिविर से पूर्व व्यापक जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। अप्रैल माह में सभी पंचायतों में ‘पंचायत टीबी फोरम’ की बैठक आयोजित कर आमजन को टीबी के लक्षण, बचाव और उपचार के प्रति जागरूक किया जा रहा है।

जिला प्रशासन ने इस अभियान को पूरी प्रतिबद्धता के साथ सफल बनाने का संकल्प लिया है। अधिकारियों का कहना है कि समयबद्ध तरीके से इस पहल को लागू कर जिले को टीबी मुक्त बनाने की दिशा में ठोस कदम उठाए जाएंगे।



