झारखंड

उपायुक्त मनीष कुमार की अध्यक्षता में वित्तीय समीक्षा बैठक, पारदर्शिता और सख्ती पर जोर।

वेतन भुगतान से पहले अनिवार्य सत्यापन, ओटीपी साझा करने पर रोक, पेंशन मामलों के त्वरित निष्पादन के निर्देश।

पाकुड़। समाहरणालय स्थित सभागार में उपायुक्त मनीष कुमार की अध्यक्षता में सभी निकासी एवं व्ययन पदाधिकारियों के साथ एक महत्वपूर्ण समीक्षात्मक बैठक आयोजित की गई। बैठक में विभिन्न विभागों के वित्तीय प्रबंधन, भुगतान प्रक्रिया, पेंशन मामलों एवं अभिलेख संधारण की गहन समीक्षा की गई। उपायुक्त ने वित्तीय कार्यों में पारदर्शिता, जवाबदेही एवं सतर्कता को सर्वोच्च प्राथमिकता देने के निर्देश दिए।

उपायुक्त ने स्पष्ट निर्देश दिया कि वेतन भुगतान से पहले प्रत्येक कर्मी के नाम, पदनाम, जन्म तिथि सहित सभी विवरणों का सर्विस बुक से मिलान अनिवार्य रूप से किया जाए। यह सुनिश्चित किया जाए कि संबंधित कर्मी वास्तव में कार्यरत हैं। वेतन भुगतान केवल पेस्लिप एवं सर्विस बुक में दर्ज विवरणों के सत्यापन के आधार पर ही किया जाएगा। साथ ही बैंक खाता संख्या का सत्यापन पासबुक या चेक के माध्यम से अनिवार्य किया गया है। बिना प्रमाण-पत्र के कोषागार से राशि निकासी नहीं होगी।

साइबर सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए उपायुक्त ने सभी पदाधिकारियों को ओटीपी किसी भी परिस्थिति में साझा न करने का निर्देश दिया। वित्तीय लेन-देन में विशेष सतर्कता बरतने को कहा गया।

तीन वर्ष से अधिक समय से एक ही पद पर कार्यरत विपत्र लिपिकों के कार्य में परिवर्तन या स्थानांतरण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए। जिन कार्यालयों में केवल एक ही लिपिक हैं, वहां विशेष निगरानी रखने को कहा गया, ताकि वित्तीय अनुशासन बना रहे।

उपायुक्त ने कहा कि वित्तीय कार्यों में किसी भी प्रकार की लापरवाही या अनियमितता बर्दाश्त नहीं की जाएगी। दोषी पाए जाने पर संबंधित पदाधिकारियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।

सभी कार्यालयों में कैशबुक का नियमित एवं अद्यतन संधारण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए। नए और पुराने कर्मियों द्वारा इसकी नियमित समीक्षा कर वित्तीय अनुशासन बनाए रखने पर बल दिया गया।

सभी प्रकार के भुगतान नियमों के अनुरूप और पूर्ण सत्यापन के बाद ही किए जाने के निर्देश दिए गए। सरकारी राशि का भुगतान किसी भी स्थिति में व्यक्तिगत खातों में नहीं किया जाएगा।

वेतन निर्गमन से संबंधित सभी अभिलेखों को सही और अद्यतन रखने पर जोर दिया गया। त्रुटिपूर्ण प्रविष्टियों से बचने और जिम्मेदारीपूर्वक कार्य करने के निर्देश दिए गए।

पेंशन से जुड़े मामलों को प्राथमिकता देते हुए उपायुक्त ने कहा कि सेवा अभिलेखों को समय-समय पर अद्यतन रखा जाए, ताकि पेंशन स्वीकृति में कोई बाधा न आए।

उपायुक्त ने कहा कि सभी कार्य गुणवत्ता के साथ निर्धारित समय-सीमा के भीतर पूरे किए जाएं। जल्दबाजी में कार्य करने से बचते हुए नियमों का पालन करना आवश्यक है।

बैठक के अंत में उपायुक्त ने स्पष्ट किया कि वित्तीय प्रबंधन में किसी भी प्रकार की गड़बड़ी, लापरवाही या अनियमितता पाए जाने पर संबंधित पदाधिकारी के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की जाएगी।

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