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झारखंड

साहिबगंज में धूमधाम से मनाया गया बाहा पर्व, सरहुल एवं संताली साहित्य दिवस।

साहिबगंज कॉलेज परिसर में सांस्कृतिक उल्लास का संगम, प्रकृति पूजा और संताली साहित्य की समृद्ध विरासत का भव्य प्रदर्शन।

साहिबगंज कॉलेज परिसर में बाहा पर्व, सरहुल एवं संताली साहित्य दिवस का आयोजन अत्यंत धूमधाम, पारंपरिक गरिमा और सांस्कृतिक उत्साह के साथ किया गया। इस भव्य कार्यक्रम में आदिवासी संस्कृति, परंपरा और संताली साहित्य की समृद्ध विरासत की जीवंत झलक देखने को मिली, जिसने उपस्थित जनसमूह को गहराई से प्रभावित किया।

कार्यक्रम का शुभारंभ पारंपरिक विधि-विधान एवं प्रकृति पूजन के साथ हुआ। इसके पश्चात संथाली कलाकारों द्वारा प्रस्तुत लोकनृत्य, पारंपरिक गीत और वाद्य यंत्रों की मनमोहक प्रस्तुतियों ने पूरे वातावरण को उत्सवमय बना दिया। रंग-बिरंगे पारंपरिक परिधानों में सजे कलाकारों ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया और आदिवासी जीवनशैली की सजीव झलक प्रस्तुत की।

इस अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में मॉडल कॉलेज, राजमहल के प्राचार्य सह प्रसिद्ध भू-वैज्ञानिक डॉ. रणजीत कुमार सिंह उपस्थित रहे। उन्होंने अपने संबोधन में बाहा पर्व और सरहुल के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि ये पर्व प्रकृति, पर्यावरण संरक्षण और सामुदायिक एकता के प्रतीक हैं। उन्होंने जोर देते हुए कहा, “संताली साहित्य समाज का दर्पण है, इसलिए इसके संरक्षण, संवर्धन और नई पीढ़ी तक इसके प्रभावी प्रसार की आवश्यकता है।”

वक्ताओं ने संताली साहित्य दिवस की प्रासंगिकता पर विस्तार से चर्चा करते हुए बताया कि संताली भाषा और साहित्य को वैश्विक पहचान दिलाने के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। विभिन्न भाषाओं में अनुवाद के माध्यम से इसकी पहुंच लगातार बढ़ रही है। साथ ही, ओल चिकी लिपि के माध्यम से संताली भाषा को नई पहचान और मजबूती मिलने की बात भी कही गई।

कार्यक्रम में शिक्षक अतिथि के रूप में कमल किशोर जेराई उपस्थित रहे। उन्होंने इस आयोजन को सांस्कृतिक संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण और सराहनीय पहल बताया।

इस आयोजन में बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं, शिक्षक, शोधकर्ता एवं स्थानीय नागरिकों ने भाग लिया। सभी की सक्रिय सहभागिता से कार्यक्रम अत्यंत सफल और प्रभावशाली रहा। आयोजकों ने कहा कि ऐसे आयोजन नई पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ने और उनमें अपनी परंपराओं के प्रति गर्व की भावना विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

कार्यक्रम के सफल संचालन में सचिव संदीप मुर्मू, अध्यक्ष श्रीलाल मुर्मू, मोहन हेम्ब्रम, विनोद मुर्मू, अनूप टुडू, बिट्टू टुडू, मुंशी मरांडी, तिलक हेम्ब्रम, अजय टुडू, मशी टुडू, जोसफ हेम्ब्रम, रेणु हेम्ब्रम, सरील हेम्ब्रम सहित अनेक सदस्यों का सराहनीय योगदान रहा। वहीं बालिका छात्रावास की नायकी सोनी मुर्मू, बाले बेटी हेम्ब्रम और सिलू हेम्ब्रम की उपस्थिति भी उल्लेखनीय रही।

अंत में सभी अतिथियों एवं प्रतिभागियों के प्रति आभार व्यक्त किया गया तथा कार्यक्रम का समापन हर्षोल्लास और सामूहिक उत्साह के साथ हुआ।

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