राजमहल के सरस्वती शिशु विद्या मंदिर में श्रद्धा, भक्ति और उत्साह के साथ मनाया गया गुरु पूर्णिमा महोत्सव।
गुरु वेद व्यास को अर्पित की गई श्रद्धांजलि, विद्यार्थियों ने भाषणों के माध्यम से बताया गुरु-शिष्य परंपरा का महत्व; प्रधानाचार्य ने संस्कार, अनुशासन और कृतज्ञता का दिया संदेश।

राजमहल साहिबगंज।राजमहल स्थित सरस्वती शिशु विद्या मंदिर में बुधवार को गुरु पूर्णिमा का पावन पर्व श्रद्धा, भक्ति और उत्साह के साथ गरिमामय वातावरण में मनाया गया। विद्यालय की प्रातःकालीन वंदना सभा में आयोजित विशेष कार्यक्रम के दौरान महर्षि गुरु वेद व्यास के जन्मदिवस के उपलक्ष्य में उनके अतुलनीय योगदान का स्मरण करते हुए उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की गई। पूरे विद्यालय परिसर में गुरु वंदना, भारतीय संस्कृति और गुरु-शिष्य परंपरा की महिमा का वातावरण देखने को मिला।
कार्यक्रम का शुभारंभ विद्यालय के सचिव गगन बापू एवं प्रधानाचार्य मिथिलेश कुमार सिंह ने गुरु वेद व्यास के चित्र के समक्ष दीप प्रज्ज्वलित कर एवं पुष्पांजलि अर्पित कर किया। इसके बाद गुरु वंदना के साथ कार्यक्रम की औपचारिक शुरुआत हुई। कार्यक्रम का सफल एवं प्रभावी संचालन श्वेता ने किया।
इस अवसर पर विद्यालय के अनेक भैया-बहनों ने गुरु पूर्णिमा के महत्व, महर्षि वेद व्यास के जीवन, उनके साहित्यिक एवं आध्यात्मिक योगदान तथा भारतीय संस्कृति में गुरु के सर्वोच्च स्थान पर प्रेरणादायी भाषण प्रस्तुत किए। विद्यार्थियों की प्रभावशाली प्रस्तुतियों ने उपस्थित सभी लोगों को भावविभोर कर दिया तथा कार्यक्रम को और अधिक प्रेरणादायक बना दिया।
अपने संबोधन में प्रधानाचार्य मिथिलेश कुमार सिंह ने कहा कि भारतीय संस्कृति में गुरु का स्थान ईश्वर के समान माना गया है। गुरु ही अपने ज्ञान, संस्कार और मार्गदर्शन से शिष्य के जीवन को सही दिशा प्रदान करते हैं। उन्होंने कहा कि गुरु केवल शिक्षा ही नहीं देते, बल्कि जीवन के आदर्श मूल्यों और नैतिकता का भी बोध कराते हैं। उन्होंने विद्यार्थियों से अपने गुरुजनों के प्रति सदैव सम्मान, अनुशासन, समर्पण और कृतज्ञता का भाव बनाए रखने का आह्वान किया तथा गुरु-शिष्य परंपरा के महत्व पर विस्तार से प्रकाश डाला।
उन्होंने कहा कि महर्षि वेद व्यास ने वेदों के संकलन, महाभारत की रचना तथा अनेक पुराणों की रचना कर भारतीय ज्ञान परंपरा को समृद्ध किया। उनके योगदान के कारण ही गुरु पूर्णिमा का पर्व उनके प्रति श्रद्धा व्यक्त करने के रूप में मनाया जाता है।
समारोह में विद्यालय के सभी भैया-बहनों, आचार्यगण एवं दीदीजी की गरिमामयी उपस्थिति रही। पूरे कार्यक्रम के दौरान श्रद्धा, अनुशासन, भारतीय संस्कृति और संस्कारों की अनुपम छटा देखने को मिली। अंत में सभी विद्यार्थियों एवं शिक्षकों ने अपने गुरुजनों के प्रति सम्मान व्यक्त करते हुए उनके आदर्शों पर चलने तथा समाज और राष्ट्र के निर्माण में सकारात्मक भूमिका निभाने का संकल्प लिया।
गुरु पूर्णिमा के इस भव्य आयोजन ने विद्यार्थियों के मन में भारतीय संस्कृति, गुरु-शिष्य परंपरा और नैतिक मूल्यों के प्रति नई चेतना का संचार किया तथा विद्यालय का वातावरण आध्यात्मिक और सांस्कृतिक ऊर्जा से ओत-प्रोत हो उठा।




