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झारखंड

झरना टोला में “एक दिवसीय खेत बचाओ अभियान सह कृषक गोष्ठी” का आयोजन।

जैविक खेती अपनाने और मिट्टी की सेहत बचाने पर दिया गया जोर, सैकड़ों महिला किसानों की रही भागीदारी।

साहिबगंज। जिले के तालझारी प्रखंड अंतर्गत झरना टोला गांव में बुधवार को “एक दिवसीय खेत बचाओ अभियान सह कृषक गोष्ठी” का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम पौधा संरक्षण केंद्र तालझारी, एग्रीक्लिनीक राजमहल, कृषि विज्ञान केंद्र साहिबगंज, एग्रीकल्चर प्रोड्यूसर कम्पनी राजमहल तथा आत्मा (Agricultural Technology Management Agency – ATMA) के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित हुआ।

कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य किसानों को आधुनिक, वैज्ञानिक एवं जैविक कृषि पद्धतियों के प्रति जागरूक करना तथा लगातार गिरती भूमि की उर्वरा शक्ति और मिट्टी की सेहत को बचाने के लिए प्रेरित करना था। गोष्ठी में बड़ी संख्या में महिला किसानों की सक्रिय भागीदारी देखने को मिली।

कृषक गोष्ठी को संबोधित करते हुए विशेषज्ञों ने किसानों को बताया कि अंधाधुंध रासायनिक उर्वरकों, केमिकल खाद एवं कीटनाशकों के अत्यधिक प्रयोग से खेतों की मिट्टी धीरे-धीरे बंजर होती जा रही है। इससे भूमि की उर्वरा शक्ति लगातार कम हो रही है और फसलों की गुणवत्ता पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है।

विशेषज्ञों ने कहा कि “खेत बचाओ अभियान” के तहत किसानों को जैविक खेती अपनाने, केंचुआ खाद (वर्मी कम्पोस्ट) तथा हरी खाद के उपयोग को बढ़ावा देना होगा, ताकि आने वाली पीढ़ियों के लिए भूमि को उपजाऊ और सुरक्षित रखा जा सके।

गोष्ठी में उपस्थित कृषि विशेषज्ञों ने किसानों को कम लागत में अधिक उत्पादन प्राप्त करने के कई उपयोगी एवं वैज्ञानिक तरीके बताए। इस दौरान निम्नलिखित विषयों पर विशेष जानकारी दी गई।

किसानों को अपने खेतों की मिट्टी की नियमित जांच कराने तथा मृदा स्वास्थ्य कार्ड (Soil Health Card) के अनुसार ही खाद एवं उर्वरकों का उपयोग करने की सलाह दी गई। विशेषज्ञों ने बताया कि मिट्टी की वास्तविक आवश्यकता के अनुसार खाद का उपयोग करने से उत्पादन बढ़ता है और भूमि की गुणवत्ता भी सुरक्षित रहती है।

कृषकों को टपकन सिंचाई (Drip Irrigation) एवं फव्वारा सिंचाई पद्धति अपनाने के लिए प्रेरित किया गया। विशेषज्ञों ने कहा कि इन तकनीकों से पानी की बर्बादी कम होती है और कम पानी में बेहतर सिंचाई संभव हो पाती है।

आत्मा (ATMA) के पदाधिकारियों ने किसानों को विभाग द्वारा संचालित विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं, प्रशिक्षण कार्यक्रमों तथा कृषि अनुदान (Subsidy) संबंधी योजनाओं की विस्तृत जानकारी दी। किसानों को बताया गया कि सरकार की विभिन्न योजनाओं का लाभ उठाकर वे आधुनिक खेती को बढ़ावा दे सकते हैं।

आज के इस अभियान में प्रखंड तकनीक सहायक प्रबंधक आदर्श कुमार, ओम प्रकाश पंडित, निकेश कुमार, पिंटू पंडित, जोस्मिन हांसदा, राधा कुमारी एवं मेमी देवी सहित कई कृषि कर्मियों की उपस्थिति रही। कार्यक्रम में सैकड़ों महिला किसानों ने भाग लेकर खेती से जुड़ी नई तकनीकों और जैविक कृषि पद्धतियों की जानकारी प्राप्त की।

गोष्ठी के अंत में किसानों से अपील की गई कि वे रासायनिक खेती पर निर्भरता कम कर प्राकृतिक एवं जैविक खेती की ओर कदम बढ़ाएं। विशेषज्ञों ने कहा कि मिट्टी की सेहत बचाना आज समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है और इसके लिए सामूहिक प्रयास जरूरी हैं।

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