यूपीआई पर एमडीआर के प्रस्ताव के विरोध में चैंबर ने उपायुक्त को सौंपा ज्ञापन।
चैंबर अध्यक्ष राजेश अग्रवाल के नेतृत्व में आठ सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल उपायुक्त से मिला, शुल्क व्यवस्था वापस लेने की मांग।

साहिबगंज। यूपीआई भुगतान पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (एमडीआर) लगाए जाने के प्रस्ताव के विरोध में ईस्टर्न झारखंड चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज, साहिबगंज का आठ सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल शुक्रवार को चैंबर अध्यक्ष राजेश अग्रवाल के नेतृत्व में उपायुक्त दीपक कुमार दुबे से मिला। प्रतिनिधिमंडल ने उपायुक्त को इस संबंध में विस्तृत ज्ञापन सौंपते हुए प्रस्तावित एमडीआर व्यवस्था पर गंभीर आपत्ति जताई और इसे वापस लेने की मांग की।
चैंबर की ओर से उपायुक्त को बताया गया कि यूपीआई देश में डिजिटल भुगतान व्यवस्था का महत्वपूर्ण आधार बन चुका है। इसके माध्यम से छोटे दुकानदारों से लेकर बड़े व्यापारिक प्रतिष्ठानों तक प्रतिदिन बड़ी संख्या में लेन-देन किए जा रहे हैं। चैंबर का कहना है कि यूपीआई के निःशुल्क होने के कारण ही आम लोगों और व्यापारियों के बीच डिजिटल भुगतान को व्यापक स्वीकार्यता मिली है। ऐसे में यूपीआई लेन-देन पर शुल्क लगाने से डिजिटल भुगतान की मौजूदा व्यवस्था प्रभावित होने की आशंका है।चैंबर ने बताया कि इस मुद्दे को लेकर पूर्व में प्रधानमंत्री, केंद्रीय वित्त मंत्री तथा नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (एनपीसीआई), मुंबई के अध्यक्ष को भी ज्ञापन भेजकर प्रस्तावित शुल्क व्यवस्था का विरोध किया जा चुका है।
चैंबर अध्यक्ष राजेश अग्रवाल ने कहा कि 15 अक्टूबर से 2,000 रुपये से अधिक के यूपीआई भुगतान पर 0.4 प्रतिशत एमडीआर लगाए जाने के प्रस्ताव का चैंबर पुरजोर विरोध करता है। उन्होंने कहा कि यूपीआई के निःशुल्क रहने से देश में डिजिटल भुगतान को गति मिली है और आज यह व्यापारिक गतिविधियों का अभिन्न हिस्सा बन चुका है।उन्होंने कहा कि छोटे व्यापारियों, दुकानदारों और ग्राहकों के लिए यूपीआई भुगतान सुविधा, सरलता और पारदर्शिता का माध्यम बन चुका है। यदि प्रत्येक बड़े लेन-देन पर शुल्क लगाया जाता है, तो इससे व्यापारियों पर अतिरिक्त वित्तीय भार पड़ सकता है और इसका असर अंततः ग्राहकों पर भी पड़ने की संभावना है।
राजेश अग्रवाल ने कहा कि डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने के लिए ऐसी व्यवस्था आवश्यक है, जिससे व्यापारी और ग्राहक बिना किसी अतिरिक्त शुल्क के सहज रूप से यूपीआई का उपयोग कर सकें। शुल्क लगाए जाने की स्थिति में व्यापारियों के बीच नकद लेन-देन को फिर से प्राथमिकता देने की प्रवृत्ति बढ़ सकती है, जिससे डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने के प्रयास प्रभावित हो सकते हैं।
चैंबर ने ज्ञापन में विशेष रूप से साहिबगंज के स्थानीय व्यापारिक परिदृश्य का उल्लेख किया है। चैंबर के अनुसार, जिले में कपड़ा, सर्राफा, इलेक्ट्रॉनिक्स और थोक किराना जैसे कारोबार में सामान्यतः 3,000 रुपये से लेकर 50,000 रुपये तक के बिल का लेन-देन होता है।ऐसे में प्रत्येक यूपीआई भुगतान पर 0.4 प्रतिशत एमडीआर लगाए जाने से व्यापारियों को अतिरिक्त शुल्क वहन करना पड़ेगा। चैंबर के अनुसार, बड़ी राशि के लेन-देन में यह शुल्क 12 रुपये से लेकर 200 रुपये तक हो सकता है। छोटे और मध्यम व्यापारियों के लिए नियमित रूप से होने वाले ऐसे अतिरिक्त खर्च से कारोबार की लागत बढ़ सकती है।
चैंबर ने यह भी आशंका जताई कि शुल्क की राशि को लेकर व्यापारी और ग्राहक के बीच अनावश्यक विवाद की स्थिति उत्पन्न हो सकती है। यदि व्यापारी इस शुल्क का भार ग्राहक पर डालने का प्रयास करते हैं, तो भुगतान के समय अतिरिक्त राशि को लेकर असहमति पैदा हो सकती है। वहीं, यदि व्यापारी स्वयं शुल्क वहन करते हैं तो इसका सीधा असर उनके कारोबार की लागत पर पड़ेगा।
चैंबर अध्यक्ष ने कहा कि यूपीआई अब व्यापारियों के लिए केवल भुगतान प्राप्त करने का माध्यम नहीं रह गया है, बल्कि रोजमर्रा के कारोबार का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुका है। छोटे दुकानदारों से लेकर थोक कारोबारियों तक बड़ी संख्या में व्यापारी डिजिटल माध्यम से भुगतान स्वीकार कर रहे हैं।उन्होंने कहा कि सरकार और संबंधित संस्थाओं को ऐसी नीति तैयार करनी चाहिए, जिससे डिजिटल भुगतान का विस्तार जारी रहे और व्यापारियों पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ भी न पड़े। चैंबर ने यूपीआई भुगतान को पूर्ववत निःशुल्क रखने की मांग की है।
चैंबर ने ज्ञापन के माध्यम से कहा कि यदि किसी कारणवश एमडीआर आधारित शुल्क व्यवस्था लागू करना आवश्यक समझा जाता है, तो 2,000 रुपये की सीमा को बढ़ाकर कम से कम एक लाख रुपये किया जाना चाहिए। चैंबर का तर्क है कि इससे रोजमर्रा के सामान्य व्यापारिक लेन-देन पर शुल्क का प्रभाव कम होगा और छोटे तथा मध्यम व्यापारियों को राहत मिलेगी।इसके अलावा चैंबर ने छोटे व्यापारियों के लिए P2PM की मासिक सीमा एक लाख रुपये से बढ़ाकर 10 लाख रुपये किए जाने की मांग भी की है। चैंबर के अनुसार, डिजिटल भुगतान के बढ़ते दायरे और व्यापारियों की वर्तमान जरूरतों को देखते हुए मौजूदा सीमा में पर्याप्त वृद्धि किया जाना आवश्यक है।
चैंबर ने कहा कि यूपीआई की सबसे बड़ी विशेषता इसकी सरलता और बिना अतिरिक्त शुल्क के उपलब्धता रही है। शुल्क व्यवस्था लागू होने पर कुछ व्यापारी बड़े भुगतान के लिए फिर से नकद लेन-देन को प्राथमिकता दे सकते हैं। इससे डिजिटल भुगतान की गति प्रभावित होने के साथ-साथ व्यापारिक लेन-देन की मौजूदा सहज व्यवस्था पर भी असर पड़ सकता है।चैंबर ने सरकार से आग्रह किया कि डिजिटल भुगतान को प्रोत्साहित करने की नीति के अनुरूप यूपीआई को निःशुल्क बनाए रखने पर गंभीरता से विचार किया जाए।
उपायुक्त के साथ हुई बैठक के दौरान चैंबर प्रतिनिधिमंडल ने साहिबगंज शहर में लागू नो-एंट्री व्यवस्था से व्यापारियों को हो रही समस्याओं का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया। प्रतिनिधिमंडल ने मालवाहक वाहनों के आवागमन, माल की आपूर्ति तथा व्यापारिक गतिविधियों पर पड़ रहे प्रभाव से उपायुक्त को अवगत कराया।व्यापारियों ने कहा कि मालवाहक वाहनों के आवागमन से संबंधित व्यवस्था का सीधा प्रभाव शहर के व्यापारिक प्रतिष्ठानों पर पड़ता है। इसलिए ऐसी व्यवस्था बनाई जानी चाहिए, जिससे शहर में यातायात व्यवस्था भी सुचारु रहे और व्यापारियों को माल मंगाने तथा पहुंचाने में अनावश्यक परेशानी का सामना न करना पड़े।इस पर उपायुक्त दीपक कुमार दुबे ने प्रतिनिधिमंडल को आश्वस्त किया कि इस माह के अंत में होने वाली बैठक में चैंबर के प्रतिनिधियों को भी आमंत्रित किया जाएगा। बैठक में नो-एंट्री व्यवस्था से जुड़ी व्यापारियों की समस्याओं पर विस्तार से चर्चा की जाएगी तथा व्यापारियों को राहत देने के उपायों पर आवश्यक निर्णय लिया जाएगा।
प्रतिनिधिमंडल में चैंबर अध्यक्ष राजेश अग्रवाल, सचिव मोहित बेगराजका, कोषाध्यक्ष विवेक कुमार, उपाध्यक्ष संजय भुवानिया, कार्यकारिणी सदस्य नवल किशोर मंडल, अंकित तमाखूवाला, सदस्य पीयूष केजरीवाल एवं संजय साहा शामिल थे।
प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि व्यापारियों की समस्याओं के समाधान, डिजिटल भुगतान व्यवस्था को सुगम बनाए रखने तथा व्यापारिक गतिविधियों के अनुकूल वातावरण तैयार करने के लिए चैंबर आगे भी संबंधित अधिकारियों और सरकार के समक्ष अपनी मांगें प्रभावी ढंग से रखता रहेगा। चैंबर ने उम्मीद जताई कि यूपीआई पर प्रस्तावित एमडीआर व्यवस्था पर सरकार व्यापारियों और आम उपभोक्ताओं के हितों को ध्यान में रखते हुए उचित निर्णय लेगी।





