विद्यालयों में शैक्षणिक व्यवस्था सुदृढ़ करने पर जोर, जिला शिक्षा पदाधिकारी ने किया औचक निरीक्षण।
विद्यार्थियों की कम उपस्थिति पर जताई नाराजगी, नियमित उपस्थिति और गुणवत्तापूर्ण पठन-पाठन सुनिश्चित करने का दिया निर्देश।

साहिबगंज। उपायुक्त सह जिला दंडाधिकारी, साहिबगंज के निर्देशानुसार जिले के विद्यालयों में शैक्षणिक व्यवस्था को सुदृढ़ करने, विद्यार्थियों की नियमित उपस्थिति सुनिश्चित करने तथा विद्यालयों में उपलब्ध मूलभूत सुविधाओं की स्थिति का जायजा लेने के उद्देश्य से जिला शिक्षा पदाधिकारी नयन कुमार ने शुक्रवार को राजमहल एवं बोरियो क्षेत्र के विभिन्न विद्यालयों का औचक निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान जिला शिक्षा पदाधिकारी ने विद्यालयों की शैक्षणिक एवं प्रशासनिक व्यवस्थाओं का बारीकी से अवलोकन करते हुए संबंधित पदाधिकारियों एवं विद्यालय प्रबंधन को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।
जिला शिक्षा पदाधिकारी ने अपने निरीक्षण क्रम में जे.के. प्लस टू उच्च विद्यालय, राजमहल, मॉडल स्कूल, राजमहल, कन्या उच्च विद्यालय, राजमहल तथा उत्क्रमित मध्य विद्यालय, कारीकांदर, अंचल-बोरियो का जायजा लिया। इस दौरान उन्होंने विद्यालयों में छात्र-छात्राओं एवं शिक्षकों की उपस्थिति, कक्षाओं में संचालित पठन-पाठन, शैक्षणिक गतिविधियों, विद्यालय परिसर की स्वच्छता, अनुशासन, मध्यान्ह भोजन व्यवस्था तथा अन्य मूलभूत सुविधाओं की स्थिति की जानकारी ली।

निरीक्षण के दौरान जे.के. प्लस टू उच्च विद्यालय, राजमहल में विद्यार्थियों की उपस्थिति अपेक्षाकृत काफी कम पाए जाने पर जिला शिक्षा पदाधिकारी ने नाराजगी व्यक्त की। उन्होंने विद्यालय प्रबंधन एवं संबंधित शिक्षकों को विद्यार्थियों की नियमित एवं संतोषजनक उपस्थिति सुनिश्चित करने का निर्देश दिया। साथ ही अनुपस्थित रहने वाले विद्यार्थियों के संबंध में आवश्यक कार्रवाई करने तथा उनके अभिभावकों से समन्वय स्थापित कर बच्चों को नियमित रूप से विद्यालय भेजने के लिए प्रेरित करने को कहा।
उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों की नियमित उपस्थिति का सीधा संबंध उनके शैक्षणिक विकास से है। लंबे समय तक विद्यालय से अनुपस्थित रहने से विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित होती है और वे निर्धारित पाठ्यक्रम के अनुरूप सीखने की प्रक्रिया में पीछे रह सकते हैं। ऐसे में विद्यालय प्रबंधन और शिक्षकों को विद्यार्थियों की उपस्थिति पर लगातार निगरानी रखने की आवश्यकता है।
जिला शिक्षा पदाधिकारी नयन कुमार ने स्पष्ट कहा कि विद्यालयों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराने के साथ विद्यार्थियों की नियमित उपस्थिति सुनिश्चित करना विभाग की प्रमुख प्राथमिकताओं में शामिल है। उन्होंने शिक्षकों को निर्देश दिया कि वे केवल पाठ्यक्रम पूरा करने तक सीमित न रहें, बल्कि विद्यार्थियों की सीखने की क्षमता, रुचि और शैक्षणिक प्रगति पर भी विशेष ध्यान दें।

उन्होंने कहा कि शिक्षकों की जिम्मेदारी है कि वे विद्यार्थियों को नियमित रूप से विद्यालय आने के लिए प्रेरित करें और कक्षा-कक्ष में ऐसा सकारात्मक एवं प्रभावी वातावरण तैयार करें, जिसमें बच्चे रुचि के साथ पढ़ाई कर सकें। विद्यार्थियों के साथ संवाद स्थापित कर उनकी शैक्षणिक समस्याओं को समझने और उनका समाधान करने पर भी विशेष जोर दिया गया।
निरीक्षण के दौरान विद्यालय परिसर की साफ-सफाई एवं स्वच्छ वातावरण बनाए रखने पर भी जिला शिक्षा पदाधिकारी ने विशेष जोर दिया। उन्होंने संबंधित विद्यालय प्रबंधन को निर्देश दिया कि विद्यालय परिसर, कक्षा-कक्ष, शौचालय एवं आसपास के क्षेत्रों में नियमित रूप से साफ-सफाई सुनिश्चित की जाए।
इसके अलावा मध्यान्ह भोजन योजना की व्यवस्था का भी जायजा लिया गया। उन्होंने भोजन की गुणवत्ता, स्वच्छता एवं विद्यार्थियों को निर्धारित मानकों के अनुरूप भोजन उपलब्ध कराने पर विशेष ध्यान देने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि बच्चों के लिए विद्यालय में सुरक्षित, स्वच्छ और स्वस्थ वातावरण उपलब्ध कराना भी शिक्षा व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
जिला शिक्षा पदाधिकारी ने विद्यालयों में शिक्षकों की समयबद्ध उपस्थिति पर भी विशेष बल दिया। उन्होंने कहा कि शिक्षक विद्यालय की शैक्षणिक व्यवस्था की महत्वपूर्ण कड़ी हैं। शिक्षकों की नियमित उपस्थिति और समय पर कक्षाओं का संचालन होने से विद्यार्थियों में अनुशासन के साथ-साथ पढ़ाई के प्रति गंभीरता भी विकसित होती है।

उन्होंने संबंधित विद्यालयों के प्रधानाध्यापकों एवं शिक्षकों को निर्देश दिया कि विद्यालय संचालन में किसी प्रकार की लापरवाही न हो तथा निर्धारित समय-सारिणी के अनुसार कक्षाओं का संचालन सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने विद्यालयों में अनुशासन एवं शैक्षणिक माहौल बनाए रखने के लिए प्रधानाध्यापकों को नियमित निगरानी करने को कहा।
जिला शिक्षा पदाधिकारी ने कहा कि विद्यालय केवल पुस्तकीय शिक्षा प्रदान करने का केंद्र नहीं हैं, बल्कि बच्चों के सर्वांगीण विकास की आधारशिला भी हैं। विद्यालयों में बच्चों को ऐसा वातावरण मिलना चाहिए, जहां वे शिक्षा के साथ अनुशासन, जिम्मेदारी, सहयोग एवं सकारात्मक सोच जैसे गुणों को भी विकसित कर सकें।
उन्होंने विद्यालय प्रबंधन को निर्देश दिया कि विद्यार्थियों की प्रतिभा और रुचि को पहचानते हुए उन्हें विभिन्न शैक्षणिक एवं सह-शैक्षणिक गतिविधियों में भाग लेने के लिए प्रोत्साहित किया जाए। इससे बच्चों में आत्मविश्वास बढ़ेगा और उनके व्यक्तित्व का समग्र विकास संभव होगा।
निरीक्षण के अंत में जिला शिक्षा पदाधिकारी ने संबंधित पदाधिकारियों एवं विद्यालय प्रबंधन को निर्देश दिया कि विद्यालयों की शैक्षणिक एवं प्रशासनिक व्यवस्थाओं की नियमित निगरानी की जाए। निरीक्षण के दौरान सामने आने वाली कमियों को चिन्हित कर उन्हें तत्काल दूर करने की दिशा में आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
उन्होंने कहा कि विद्यालयों में उपलब्ध संसाधनों का बेहतर उपयोग करते हुए शिक्षा व्यवस्था को और अधिक प्रभावी बनाया जाना आवश्यक है। विद्यार्थियों की नियमित उपस्थिति, शिक्षकों की समयबद्ध उपस्थिति, गुणवत्तापूर्ण पठन-पाठन, स्वच्छता, अनुशासन और मध्यान्ह भोजन की गुणवत्ता जैसे सभी पहलुओं पर लगातार निगरानी रखी जानी चाहिए।

जिला शिक्षा पदाधिकारी ने कहा कि जिले में शिक्षा व्यवस्था को प्रभावी, गुणवत्तापूर्ण एवं परिणामोन्मुख बनाने के लिए विद्यालय स्तर पर निरंतर सुधार की प्रक्रिया जारी रहनी चाहिए। उन्होंने संबंधित अधिकारियों और विद्यालय प्रबंधन से विभागीय निर्देशों का गंभीरता से अनुपालन सुनिश्चित करने को कहा, ताकि जिले के सभी विद्यालयों में बेहतर शैक्षणिक वातावरण विकसित हो और विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा का लाभ मिल सके।



