कायाकल्प, स्वच्छता एवं मरीजों की सुरक्षा को लेकर स्वास्थ्य संस्थानों की व्यापक समीक्षा।
उप विकास आयुक्त अरविन्द कुमार लाल ने दिए सख्त निर्देश, कहा—स्वास्थ्य संस्थानों में स्वच्छ, सुरक्षित, व्यवस्थित एवं मरीज हितैषी वातावरण सुनिश्चित करना सर्वोच्च प्राथमिकता।

पाकुड़। जिले के सभी स्वास्थ्य संस्थानों में कायाकल्प कार्यक्रम के मानकों का प्रभावी अनुपालन, स्वच्छता एवं साफ-सफाई की बेहतर व्यवस्था, आधारभूत सुविधाओं का उचित रख-रखाव, संक्रमण नियंत्रण तथा मरीजों की सुरक्षा सुनिश्चित करने को लेकर सोमवार को समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता उप विकास आयुक्त अरविन्द कुमार लाल ने की।
बैठक में जिला स्वास्थ्य विभाग के डीपीएम, डीडीएम, कंसल्टेंट, विभिन्न प्रखंडों के प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी, प्रखंड लेखा प्रबंधक, प्रखंड कार्यक्रम प्रबंधक सहित स्वास्थ्य विभाग के पदाधिकारी एवं संबंधित कर्मी उपस्थित रहे।
बैठक के दौरान जिले के विभिन्न स्वास्थ्य संस्थानों, सदर अस्पताल एवं प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों में कायाकल्प, स्वच्छता, साफ-सफाई, आधारभूत सुविधाओं, भवन एवं परिसर के रख-रखाव, संक्रमण नियंत्रण तथा मरीजों की सुरक्षा से संबंधित व्यवस्थाओं की बिंदुवार एवं विस्तृत समीक्षा की गई। इस दौरान स्वास्थ्य संस्थानों में उपलब्ध सुविधाओं और उनके बेहतर संचालन की स्थिति की भी जानकारी ली गई।

उप विकास आयुक्त ने कहा कि स्वास्थ्य संस्थान केवल मरीजों के उपचार का केंद्र नहीं हैं, बल्कि मरीजों एवं उनके परिजनों को स्वच्छ, सुरक्षित, व्यवस्थित एवं सम्मानजनक वातावरण उपलब्ध कराना भी स्वास्थ्य विभाग की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है। उन्होंने सभी स्वास्थ्य संस्थानों में साफ-सफाई एवं व्यवस्थाओं में निरंतर सुधार सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
उन्होंने स्पष्ट कहा कि स्वास्थ्य संस्थानों में स्वच्छता व्यवस्था को किसी भी परिस्थिति में नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए। अस्पताल परिसर से लेकर वार्ड, ओपीडी, आईपीडी, प्रसव कक्ष, शौचालय एवं अन्य सभी क्षेत्रों में नियमित रूप से गुणवत्तापूर्ण साफ-सफाई सुनिश्चित की जाए।
समीक्षा बैठक में उप विकास आयुक्त ने सभी स्वास्थ्य संस्थानों को कायाकल्प कार्यक्रम के निर्धारित मानकों के अनुरूप आवश्यक सुधार सुनिश्चित करने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि कायाकल्प के मानकों के अनुरूप स्वास्थ्य संस्थानों का विकास केवल मूल्यांकन की दृष्टि से महत्वपूर्ण नहीं है, बल्कि इससे मरीजों को बेहतर एवं गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने में भी सहायता मिलती है।
उन्होंने स्वास्थ्य संस्थानों के सभी प्रमुख क्षेत्रों में स्वच्छता एवं व्यवस्थाओं को बेहतर बनाने पर विशेष जोर दिया। अस्पताल के वार्ड, ओपीडी, आईपीडी, प्रसव कक्ष, शौचालय, परिसर सहित अन्य स्थानों पर नियमित सफाई व्यवस्था सुनिश्चित करने के साथ-साथ भवन एवं अन्य आधारभूत संरचनाओं के उचित रख-रखाव का निर्देश दिया गया।

बैठक में संक्रमण नियंत्रण को लेकर भी विशेष निर्देश दिए गए। उप विकास आयुक्त ने कहा कि स्वास्थ्य संस्थानों में संक्रमण की रोकथाम के लिए निर्धारित मानकों का कड़ाई से पालन किया जाना चाहिए।
उन्होंने जैव चिकित्सा अपशिष्ट का नियमानुसार एवं सुरक्षित तरीके से प्रबंधन सुनिश्चित करने तथा अस्पतालों में संक्रमण नियंत्रण से संबंधित आवश्यक व्यवस्थाओं को प्रभावी बनाने का निर्देश दिया। उन्होंने संबंधित पदाधिकारियों से कहा कि स्वास्थ्य संस्थानों में साफ-सफाई के साथ-साथ संक्रमण नियंत्रण की व्यवस्था की नियमित निगरानी की जाए।
समीक्षा के दौरान मरीजों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए सुरक्षित एवं गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने पर विशेष बल दिया गया। उप विकास आयुक्त ने स्वास्थ्य संस्थानों में उपलब्ध भवन, बिजली, पेयजल, शौचालय, फर्नीचर, चिकित्सा उपकरण सहित अन्य आधारभूत सुविधाओं के उचित रख-रखाव पर विशेष ध्यान देने का निर्देश दिया।
उन्होंने कहा कि मरीजों को स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने के दौरान किसी प्रकार की अव्यवस्था या लापरवाही नहीं होनी चाहिए। स्वास्थ्य संस्थानों में उपलब्ध संसाधनों का प्रभावी उपयोग करते हुए मरीजों के लिए बेहतर एवं सुविधाजनक वातावरण तैयार किया जाए।
उप विकास आयुक्त ने सभी प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारियों को अपने-अपने स्वास्थ्य संस्थानों का नियमित निरीक्षण करने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि निरीक्षण के दौरान सामने आने वाली कमियों को केवल चिन्हित करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उनके निराकरण के लिए तत्काल आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित की जानी चाहिए।

उन्होंने निर्देश दिया कि स्वास्थ्य संस्थानों में पाई जाने वाली कमियों को प्राथमिकता के आधार पर दूर करते हुए निर्धारित समय-सीमा के भीतर कार्य पूर्ण कराया जाए। साथ ही निरीक्षण एवं सुधारात्मक कार्रवाई की नियमित समीक्षा भी सुनिश्चित की जाए।
बैठक में निर्देश दिया गया कि जिन स्वास्थ्य संस्थानों में कायाकल्प के निर्धारित मानकों के अनुरूप सुधार की आवश्यकता है, वहां प्राथमिकता के आधार पर कार्ययोजना तैयार कर आवश्यक कार्रवाई की जाए।
सभी संबंधित पदाधिकारियों को अपने-अपने स्वास्थ्य संस्थानों के लिए स्पष्ट कार्ययोजना तैयार करने को कहा गया। कार्ययोजना में चिन्हित कमियों, उनके निराकरण की जिम्मेदारी, कार्य पूर्ण करने की समय-सीमा तथा आवश्यक कार्रवाई का स्पष्ट उल्लेख करने का निर्देश दिया गया।
उप विकास आयुक्त ने कार्ययोजना के अनुसार किए जा रहे कार्यों की नियमित समीक्षा एवं निगरानी करने तथा कार्यों की प्रगति से वरीय पदाधिकारियों को समय-समय पर अवगत कराने को कहा।
उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य संस्थानों में उपलब्ध संसाधनों का बेहतर एवं प्रभावी उपयोग किया जाना चाहिए। भवन, उपकरण, फर्नीचर, पेयजल, विद्युत व्यवस्था, शौचालय एवं अन्य सुविधाओं का नियमित रख-रखाव सुनिश्चित कर उनकी उपयोगिता बनाए रखी जाए।
उन्होंने संबंधित पदाधिकारियों को निर्देशित किया कि स्वास्थ्य संस्थानों में किसी भी प्रकार की कमी सामने आने पर उसके समाधान के लिए संबंधित स्तर पर तत्काल कार्रवाई की जाए, ताकि मरीजों को स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ लेने में किसी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े।

बैठक के अंत में उप विकास आयुक्त अरविन्द कुमार लाल ने सभी प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारियों एवं संबंधित स्वास्थ्य कर्मियों को निर्देश दिया कि वे अपने-अपने स्वास्थ्य संस्थानों को स्वच्छ, सुरक्षित, सुव्यवस्थित एवं मरीज हितैषी बनाने की दिशा में गंभीरता एवं प्राथमिकता के साथ कार्य करें।
उन्होंने कहा कि कायाकल्प के मानकों के अनुरूप बेहतर प्रदर्शन के साथ-साथ स्वच्छता, संक्रमण नियंत्रण, मरीजों की सुरक्षा और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं में निरंतर सुधार सुनिश्चित करना सभी संबंधित पदाधिकारियों की प्राथमिक जिम्मेदारी है।
उन्होंने अधिकारियों को आपसी समन्वय के साथ कार्य करते हुए स्वास्थ्य संस्थानों की व्यवस्थाओं को और बेहतर बनाने तथा मरीजों को सुरक्षित एवं गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने की दिशा में निरंतर प्रयास करने के निर्देश दिए।


