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झारखंड

विश्व ओजोन दिवस पर पीएम श्री उत्क्रमित उच्च विद्यालय में पर्यावरण जागरूकता कार्यक्रम।

स्वच्छ वायु, नदियों के संरक्षण और हरित पर्यावरण का विद्यार्थियों ने लिया संकल्प, पौधारोपण कर दिया संरक्षण का संदेश।

साहिबगंज। विश्व ओजोन दिवस के अवसर पर नमामि गंगे एवं जिला गंगा समिति, साहिबगंज के तत्वावधान में पीएम श्री उत्क्रमित उच्च विद्यालय, नगर पालिका कन्या, साहिबगंज में पर्यावरण जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों को ओजोन परत के महत्व के साथ-साथ स्वच्छ वायु, स्वच्छ नदियों और पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक करना था।

कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों के बीच भाषण एवं वाद-विवाद प्रतियोगिता आयोजित की गई। प्रतियोगिता में विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लेते हुए स्वच्छ वायु, गंगा एवं अन्य नदियों के संरक्षण, बढ़ते पर्यावरणीय प्रदूषण तथा वर्तमान समय की विभिन्न पर्यावरणीय चुनौतियों पर अपने विचार प्रस्तुत किए। विद्यार्थियों ने अपने वक्तव्यों के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण को लेकर जागरूकता फैलाने तथा लोगों को प्रकृति के प्रति जिम्मेदार बनाने की आवश्यकता पर जोर दिया।

इस अवसर पर विद्यार्थियों को ओजोन परत के महत्व, इसके संरक्षण की आवश्यकता तथा पर्यावरण संतुलन में इसकी भूमिका के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई। उन्हें बताया गया कि पर्यावरण संरक्षण केवल किसी एक संस्था या विभाग की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि प्रत्येक व्यक्ति को अपने स्तर से प्रकृति के संरक्षण में योगदान देना चाहिए। स्वच्छ वातावरण के लिए प्रदूषण कम करने, अधिक से अधिक पौधे लगाने, स्वच्छता बनाए रखने तथा नदियों को प्रदूषण से बचाने की दिशा में सामूहिक प्रयास आवश्यक हैं।

कार्यक्रम के अंत में पौधारोपण अभियान चलाया गया। इसमें विद्यालय के विद्यार्थियों एवं शिक्षकों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया और विद्यालय परिसर में पौधे लगाए। पौधारोपण के माध्यम से विद्यार्थियों को हरित क्षेत्र के विस्तार तथा पर्यावरण संतुलन बनाए रखने का प्रत्यक्ष संदेश दिया गया। साथ ही लगाए गए पौधों की देखभाल और उनके संरक्षण के प्रति भी जागरूक किया गया।

कार्यक्रम के माध्यम से विद्यार्थियों को यह संदेश दिया गया कि पर्यावरण संरक्षण केवल जागरूकता कार्यक्रमों तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि इसे दैनिक जीवन की आदतों और व्यवहार का हिस्सा बनाना चाहिए। स्वच्छता अपनाने, हरित क्षेत्र बढ़ाने, जलस्रोतों एवं नदियों को प्रदूषण से बचाने तथा प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण के लिए प्रत्येक व्यक्ति को सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए।

कार्यक्रम ने विद्यार्थियों में पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी और संवेदनशीलता विकसित करने के साथ-साथ उन्हें प्रकृति संरक्षण के लिए आगे बढ़कर कार्य करने के लिए प्रेरित किया।

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