राजमहल के सरस्वती शिशु विद्या मंदिर में ‘शरबत बनाओ प्रतियोगिता’ का भव्य आयोजन।
विद्यार्थियों की रचनात्मकता, स्वच्छता, आत्मनिर्भरता और व्यावहारिक कौशल का हुआ शानदार प्रदर्शन।

राजमहल साहिबगंज। विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास, रचनात्मक प्रतिभा, व्यावहारिक कौशल तथा आत्मनिर्भरता को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से राजमहल स्थित सरस्वती शिशु विद्या मंदिर में शनिवार को विद्यालय की वंदना सभा के अवसर पर “शरबत बनाओ प्रतियोगिता” का भव्य एवं आकर्षक आयोजन किया गया। प्रतियोगिता का शुभारंभ विद्यालय के प्रधानाचार्य मिथिलेश के सानिध्य में हुआ। कार्यक्रम में विद्यालय परिवार के सभी आचार्यगण, दीदी, भैया-बहनों एवं विद्यार्थियों की उत्साहपूर्ण सहभागिता रही।
कार्यक्रम का उद्घाटन करते हुए प्रधानाचार्य मिथिलेश ने कहा कि विद्यालय में आयोजित होने वाली ऐसी रचनात्मक गतिविधियाँ विद्यार्थियों के व्यक्तित्व निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। उन्होंने कहा कि पुस्तकीय ज्ञान के साथ-साथ व्यावहारिक शिक्षा भी आज के समय की आवश्यकता है। इस प्रकार की प्रतियोगिताएँ विद्यार्थियों में आत्मविश्वास, स्वावलंबन, अनुशासन, स्वच्छता के प्रति जागरूकता, सृजनात्मक सोच, नेतृत्व क्षमता तथा कार्यकुशलता का विकास करती हैं। उन्होंने कहा कि प्रत्येक विद्यार्थी में कोई-न-कोई विशेष प्रतिभा होती है और विद्यालय का उद्देश्य उन प्रतिभाओं को पहचानकर उन्हें उचित मंच प्रदान करना है।
प्रतियोगिता में विद्यालय की कक्षा द्वितीय से लेकर कक्षा दशम तक के विद्यार्थियों ने पूरे उत्साह, उमंग और लगन के साथ भाग लिया। सभी प्रतिभागियों ने अपनी कल्पनाशीलता, रचनात्मक सोच और पाक-कौशल का उत्कृष्ट परिचय देते हुए विभिन्न प्रकार के स्वादिष्ट, पौष्टिक, आकर्षक एवं रंग-बिरंगे शरबत तैयार किए। विद्यार्थियों ने शरबतों की सजावट, स्वाद, स्वच्छता, गुणवत्ता तथा प्रस्तुति पर विशेष ध्यान दिया, जिससे पूरा विद्यालय परिसर उत्साह, उल्लास और रचनात्मक वातावरण से सराबोर हो गया।
प्रतियोगिता के दौरान विद्यार्थियों का आत्मविश्वास और प्रस्तुतीकरण सभी के आकर्षण का केंद्र रहा। प्रत्येक प्रतिभागी ने अपने द्वारा तैयार किए गए शरबत की विशेषताओं, उसमें प्रयुक्त सामग्री, उसके स्वास्थ्यवर्धक गुणों तथा बनाने की विधि की जानकारी भी साझा की। विद्यार्थियों की स्पष्ट अभिव्यक्ति, आत्मविश्वास और नवाचारपूर्ण सोच ने उपस्थित सभी शिक्षकों एवं विद्यार्थियों को प्रभावित किया।
कार्यक्रम में मौजूद आचार्यगण एवं विद्यार्थियों ने प्रतिभागियों के प्रयासों की मुक्तकंठ से सराहना की तथा तालियों की गड़गड़ाहट के साथ उनका उत्साहवर्धन किया। विद्यालय परिवार ने कहा कि ऐसी प्रतियोगिताएँ केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं होतीं, बल्कि विद्यार्थियों में टीम भावना, स्वच्छता की आदत, आत्मनिर्भरता, सहयोग की भावना, समय प्रबंधन, रचनात्मक चिंतन तथा जीवनोपयोगी कौशल विकसित करने का प्रभावी माध्यम भी हैं।
विद्यालय प्रबंधन ने कहा कि भविष्य में भी विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास को ध्यान में रखते हुए इस प्रकार की रचनात्मक, ज्ञानवर्धक एवं कौशल आधारित प्रतियोगिताओं का नियमित आयोजन किया जाता रहेगा, ताकि प्रत्येक विद्यार्थी अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन कर सके और आत्मविश्वास के साथ जीवन की चुनौतियों का सामना करने के लिए तैयार हो सके।
कार्यक्रम के अंत में सभी प्रतिभागियों के उत्साह, समर्पण और उत्कृष्ट प्रदर्शन की सराहना की गई। विद्यालय परिवार ने उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हुए कहा कि शिक्षा का वास्तविक उद्देश्य केवल परीक्षा में अच्छे अंक प्राप्त करना नहीं, बल्कि विद्यार्थियों के व्यक्तित्व का समग्र विकास करना है। इसी उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए विद्यालय समय-समय पर इस प्रकार की नवाचारपूर्ण गतिविधियों का आयोजन करता रहेगा।
इस अवसर पर विद्यालय के सभी भैया-बहन, दीदी, आचार्यगण एवं विद्यालय परिवार के सदस्य उपस्थित रहे। पूरा कार्यक्रम सौहार्दपूर्ण, अनुशासित एवं उत्साहपूर्ण वातावरण में सफलतापूर्वक संपन्न हुआ।



