झारखंड

मुख्यमंत्री अन्तर्राज्यीय प्रवासी श्रमिक सहायता योजना के तहत आश्रित परिवारों को मिली आर्थिक सहायता।

दुर्घटना एवं सामान्य मृत्यु के मामलों में चार परिवारों को सौंपे गए सहायता राशि के चेक, उपायुक्त मेघा भारद्वाज ने दिया हरसंभव सहयोग का भरोसा।

पाकुड़। राज्य से बाहर कार्यरत प्रवासी श्रमिकों की मृत्यु के बाद उनके आश्रित परिवारों को आर्थिक संबल प्रदान करने के उद्देश्य से बुधवार को समाहरणालय, पाकुड़ में मुख्यमंत्री अन्तर्राज्यीय प्रवासी श्रमिक सहायता योजना के तहत सहायता राशि का वितरण किया गया। इस अवसर पर उपायुक्त मेघा भारद्वाज ने श्रम विभाग द्वारा स्वीकृत सहायता राशि के चेक लाभुकों को प्रदान किए।

कार्यक्रम के दौरान दुर्घटना में मृत्यु के मामले में सालेमा बीबी, ग्राम इलामी, पाकुड़ को 1 लाख 50 हजार रुपये की सहायता राशि का चेक प्रदान किया गया। वहीं सामान्य मृत्यु के मामलों में नुगनु हाँसदा (अमड़ापाड़ा संथाली, अमड़ापाड़ा), मागी पहाड़िन (छोटाजारा, सोनाधनी पंचायत, लिट्टीपाड़ा) तथा सिलीफन हेम्ब्रम (प्रतापपुर, देवीनगर, महेशपुर) को 50-50 हजार रुपये की सहायता राशि उपलब्ध कराई गई।

श्रम विभाग द्वारा संचालित मुख्यमंत्री अन्तर्राज्यीय प्रवासी श्रमिक सहायता योजना के अंतर्गत अपंजीकृत प्रवासी श्रमिक की दुर्घटना में मृत्यु होने पर उसके वैध आश्रित को एकमुश्त 1 लाख 50 हजार रुपये की सहायता राशि प्रदान की जाती है। वहीं सामान्य मृत्यु की स्थिति में मृतक के पार्थिव शरीर को पैतृक आवास तक लाने एवं अन्य आवश्यक व्ययों के लिए 50 हजार रुपये की सहायता का प्रावधान है।

इस अवसर पर उपायुक्त मेघा भारद्वाज ने कहा कि राज्य सरकार प्रवासी श्रमिकों एवं उनके परिवारों की सुरक्षा, सम्मान और कल्याण के लिए लगातार कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि किसी परिवार के कमाऊ सदस्य की मृत्यु एक अत्यंत दुखद और चुनौतीपूर्ण स्थिति होती है। ऐसे कठिन समय में सरकार द्वारा दी जाने वाली सहायता राशि प्रभावित परिवारों को आर्थिक सहारा प्रदान करती है और उन्हें विपरीत परिस्थितियों से उबरने में मदद करती है।

उन्होंने जिले के सभी श्रमिकों से श्रम विभाग में अपना पंजीकरण कराने की अपील करते हुए कहा कि पंजीकरण के माध्यम से श्रमिक विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं का लाभ समय पर प्राप्त कर सकते हैं तथा आवश्यकता पड़ने पर सरकारी सहायता आसानी से उपलब्ध हो सकती है।

उपायुक्त ने कहा कि अधिक से अधिक श्रमिक श्रम विभाग में अपना नाम दर्ज कराएं, ताकि राज्य सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ सीधे उन्हें और उनके परिवारों तक पहुंच सके। उन्होंने अधिकारियों को भी श्रमिकों के बीच जागरूकता बढ़ाने तथा योजनाओं की जानकारी घर-घर तक पहुंचाने के निर्देश दिए।

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