साहिबगंज और राजमहल में शहरी नदी प्रबंधन योजना को लेकर बैठक, गंगा संरक्षण पर जोर।
उपायुक्त दीपक कुमार दूबे की अध्यक्षता में हुई बैठक में बाढ़ नियंत्रण, जल निकासी, अपशिष्ट जल के उपचार और वर्षा जल प्रबंधन पर हुई चर्चा।

साहिबगंज। गंगा नदी के संरक्षण, शहरी क्षेत्रों में बाढ़ के जोखिम को कम करने और जल प्रबंधन व्यवस्था को बेहतर बनाने के उद्देश्य से साहिबगंज जिला प्रशासन की ओर से महत्वपूर्ण पहल की गई है। इसी क्रम में समाहरणालय सभागार में उपायुक्त-सह-जिला दंडाधिकारी दीपक कुमार दूबे की अध्यक्षता में शहरी नदी प्रबंधन योजना (Urban River Management Plan-URMP) को लेकर बैठक आयोजित की गई। बैठक में वन प्रमंडल पदाधिकारी प्रबल गर्ग सहित संबंधित विभागों के अधिकारी और प्रतिनिधि उपस्थित रहे।
बैठक में साहिबगंज एवं राजमहल शहरों में गंगा नदी के संरक्षण के साथ-साथ सुनियोजित शहरी विकास, बाढ़ प्रबंधन, जल निकासी व्यवस्था में सुधार, अपशिष्ट जल के उपचार तथा उपचारित जल के पुनः उपयोग जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तार से चर्चा की गई। इस दौरान नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ अर्बन अफेयर्स (NIUA) एवं Alluvium के प्रतिनिधियों ने योजना के विभिन्न पहलुओं, संभावित चुनौतियों और प्रस्तावित उपायों पर प्रस्तुतीकरण दिया।

बैठक में गंगा नदी के उच्चतम बाढ़ स्तर (HFL) को ध्यान में रखते हुए शहरी विकास की योजनाएं तैयार करने पर विशेष जोर दिया गया। साहिबगंज और राजमहल में बाढ़ संभावित क्षेत्रों की पहचान, नदी के प्राकृतिक प्रवाह को सुरक्षित रखने तथा संवेदनशील इलाकों में विकास गतिविधियों की बेहतर योजना बनाने पर विचार-विमर्श किया गया। इसका उद्देश्य भविष्य में बाढ़ के प्रभाव को कम करना और सुरक्षित एवं पर्यावरण अनुकूल शहरी विकास को बढ़ावा देना है।
शहरों से निकलने वाले नालों और उनके माध्यम से गंगा नदी तक पहुंचने वाले अपशिष्ट जल के प्रबंधन को भी बैठक में प्रमुखता दी गई। अनुपचारित अपशिष्ट जल को सीधे नदी में जाने से रोकने, जल निकासी व्यवस्था का आकलन करने तथा सीवेज संग्रहण और उपचार प्रणाली को प्रभावी बनाने की आवश्यकता पर बल दिया गया। अधिकारियों ने गंगा की स्वच्छता और पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखने के लिए समन्वित प्रयासों के महत्व पर चर्चा की।
मानसून के दौरान शहरी क्षेत्रों में होने वाले जलभराव को कम करने के लिए प्रभावी वर्षा जल प्रबंधन व्यवस्था विकसित करने पर भी चर्चा हुई। इसके तहत नालों की स्थिति और क्षमता में सुधार, जलभराव संभावित क्षेत्रों की पहचान, प्राकृतिक जल प्रवाह को बनाए रखने तथा वर्षा जल संचयन को बढ़ावा देने जैसे उपायों पर विचार किया गया।

बैठक में सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) से उपचारित अपशिष्ट जल का दोबारा उपयोग करने की संभावनाओं पर भी मंथन हुआ। उपचारित जल का निर्धारित मानकों के अनुरूप उद्यानों की सिंचाई, हरित क्षेत्रों के रखरखाव और अन्य गैर-पेय कार्यों में उपयोग किया जा सकता है। इससे स्वच्छ जल की खपत कम करने और जल संसाधनों का बेहतर उपयोग सुनिश्चित करने में मदद मिल सकती है।
बैठक का मुख्य उद्देश्य साहिबगंज एवं राजमहल में शहरी विकास और गंगा नदी के संरक्षण के बीच संतुलन स्थापित करना रहा। बाढ़ प्रबंधन, जल निकासी, सीवेज उपचार, वर्षा जल प्रबंधन और उपचारित जल के पुनः उपयोग को एकीकृत रूप से विकसित करने की संभावनाओं पर चर्चा की गई। योजना के माध्यम से दोनों शहरों की वर्तमान और भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए पर्यावरण अनुकूल एवं दीर्घकालिक जल प्रबंधन व्यवस्था विकसित करने पर जोर दिया गया।
बैठक में जिला योजना पदाधिकारी अनुप कुमार, जिला विद्युत अभियंता शंभूनाथ चौधरी, साहिबगंज नगर प्रशासक अभिषेक कुमार सिंह, राजमहल नगर पंचायत के प्रशासक दानिश हुसैन सहित संबंधित विभागों के अधिकारी एवं प्रतिनिधि उपस्थित रहे।



