जनभागीदारी से टीबी मुक्त भारत अभियान को मिलेगी गति, चार जागरूकता रथ रवाना।
उपायुक्त मेघा भारद्वाज, उप विकास आयुक्त एवं सिविल सर्जन ने दिखाई हरी झंडी; 100 दिवसीय अभियान के तहत लोगों को टीबी की जांच, उपचार और पोषण के प्रति किया जाएगा जागरूक।

पाकुड़। टीबी मुक्त भारत के संकल्प को साकार करने तथा क्षय रोग के प्रति जनजागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से गुरुवार को समाहरणालय परिसर से 100 दिवसीय टीबी मुक्त भारत जागरूकता अभियान का शुभारंभ किया गया। इस अवसर पर उपायुक्त मेघा भारद्वाज, उप विकास आयुक्त, सिविल सर्जन, जिला यक्ष्मा पदाधिकारी एवं स्वास्थ्य विभाग के अन्य अधिकारियों ने चार जागरूकता रथों को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया।
पीरामल फाउंडेशन एवं स्वास्थ्य विभाग के सहयोग से संचालित इस अभियान के माध्यम से जिले के शहरी एवं ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों को टीबी के लक्षण, समय पर जांच, नियमित उपचार, बचाव तथा पौष्टिक आहार के महत्व के प्रति जागरूक किया जाएगा। अभियान का उद्देश्य टीबी से जुड़ी भ्रांतियों को दूर करना और संभावित मरीजों को समय पर जांच एवं उपचार के लिए प्रेरित करना है।

इस अवसर पर उपायुक्त मेघा भारद्वाज ने कहा कि टीबी मुक्त भारत के लक्ष्य को प्राप्त करने में जनभागीदारी और जागरूकता की महत्वपूर्ण भूमिका है। उन्होंने लोगों से अपील की कि टीबी के लक्षण दिखाई देने पर बिना किसी संकोच के नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र में जांच कराएं। बीमारी की पुष्टि होने पर चिकित्सकीय सलाह के अनुसार नियमित रूप से दवा लें और उपचार की निर्धारित अवधि पूरी करें। बीच में दवा छोड़ने से उपचार प्रभावित हो सकता है।
उन्होंने कहा कि टीबी मरीजों के शीघ्र स्वस्थ होने के लिए नियमित उपचार के साथ पौष्टिक आहार एवं आवश्यक पोषण संबंधी सहायता भी महत्वपूर्ण है। संबंधित अधिकारियों और स्वास्थ्यकर्मियों को अभियान प्रभावी ढंग से संचालित करने तथा अधिक से अधिक लोगों तक सही जानकारी पहुंचाने के निर्देश दिए गए।
अभियान के माध्यम से आमजनों को यह संदेश दिया जाएगा कि टीबी एक उपचार योग्य बीमारी है। समय पर जांच, नियमित दवा सेवन और चिकित्सकीय परामर्श का पालन करके इस बीमारी से मुक्ति पाई जा सकती है। साथ ही, टीबी मरीजों के प्रति सहयोगात्मक व्यवहार अपनाने और बीमारी से जुड़ी सामाजिक भ्रांतियों को दूर करने के लिए लोगों को प्रेरित किया जाएगा।

जिला प्रशासन एवं स्वास्थ्य विभाग ने आमजनों से अपील की है कि वे टीबी के लक्षणों के प्रति सजग रहें, आवश्यकता पड़ने पर जांच कराएं तथा मरीजों को उपचार के दौरान सहयोग दें। जनभागीदारी, सामूहिक प्रयास और निरंतर जागरूकता के माध्यम से ही टीबी मुक्त भारत के संकल्प को साकार किया जा सकता है।




