साहिबगंज कॉलेज में 34 विद्यार्थियों ने प्रस्तुत किया रसायनशास्त्र का शोध-प्रबंध।
मृदा एवं जल की गुणवत्ता, पर्यावरण संरक्षण और पियर्सन सहसंबंध विश्लेषण पर केंद्रित रहा शोध; प्राचार्य ने विद्यार्थियों को अनुसंधान एवं नवाचार के लिए किया प्रेरित।

साहिबगंज। साहिबगंज कॉलेज के रमन विज्ञान भवन स्थित स्नातकोत्तर रसायनशास्त्र विभाग में पीजी सेमेस्टर-IV के 34 विद्यार्थियों ने अपने प्रोजेक्ट शोध-प्रबंध का पावरपॉइंट प्रस्तुतीकरण किया। इस दौरान विद्यार्थियों ने मृदा एवं जल की गुणवत्ता, पर्यावरण संरक्षण, मृदा स्वास्थ्य तथा विभिन्न भौतिक-रासायनिक मापदंडों के विश्लेषण से संबंधित अपने शोध कार्य प्रस्तुत किए।
विभागाध्यक्ष डॉ. अनिल कुमार के मार्गदर्शन में विद्यार्थियों ने झारखंड, बिहार एवं पश्चिम बंगाल के चयनित क्षेत्रों, जिनमें साहिबगंज, भागलपुर, कहलगांव और मुर्शिदाबाद शामिल हैं, से प्राप्त मृदा एवं जल के नमूनों का अध्ययन किया। विद्यार्थियों ने वैज्ञानिक तथ्यों, आंकड़ों और विश्लेषण के आधार पर अपने शोध निष्कर्ष प्रस्तुत किए।

शोध प्रस्तुतियों का प्रमुख विषय पियर्सन सहसंबंध विश्लेषण रहा। इसके माध्यम से मृदा एवं जल के विभिन्न भौतिक-रासायनिक मापदंडों के बीच पारस्परिक संबंधों को समझने का प्रयास किया गया। विद्यार्थियों ने बताया कि इस सांख्यिकीय पद्धति से प्राप्त आंकड़ों का वैज्ञानिक विश्लेषण करने और संभावित संबंधों की पहचान करने में मदद मिलती है।
शोध के दौरान मृदा स्वास्थ्य, उर्वरकों के संतुलित उपयोग, सुरक्षित पेयजल तथा जल में फ्लोराइड और आर्सेनिक जैसे तत्वों की उपस्थिति से जुड़े संभावित स्वास्थ्य प्रभावों पर भी चर्चा की गई। इससे विद्यार्थियों को कृषि, पर्यावरण संरक्षण, पेयजल सुरक्षा और जनस्वास्थ्य के क्षेत्र में रसायनशास्त्र के व्यावहारिक महत्व को समझने का अवसर मिला।
कॉलेज के प्राचार्य डॉ. रंजीत कुमार सिंह ने विद्यार्थियों के शोध प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि मृदा एवं जल की गुणवत्ता का वैज्ञानिक आकलन कृषि उत्पादन, पर्यावरण संरक्षण और मानव स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण है। उन्होंने विद्यार्थियों को सॉइल हेल्थ कार्ड, जल गुणवत्ता आकलन और पर्यावरण संरक्षण जैसे विषयों पर गहन शोध करने के लिए प्रेरित किया।

उन्होंने कहा कि वैज्ञानिक सोच और व्यावहारिक ज्ञान के माध्यम से समाज की समस्याओं के समाधान में योगदान दिया जा सकता है। मृदा की उर्वरता बनाए रखना और जल स्रोतों की गुणवत्ता की निगरानी करना वर्तमान समय की प्रमुख आवश्यकताएं हैं।
विभागाध्यक्ष डॉ. अनिल कुमार ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि रसायनशास्त्र में उच्च शिक्षा, रोजगार, अनुसंधान, कृषि, स्वास्थ्य और पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में व्यापक संभावनाएं हैं। उन्होंने विद्यार्थियों को विषय की गहरी समझ विकसित करने तथा राष्ट्रीय पात्रता परीक्षा जेईटी पीएचडी और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के साथ शोध एवं नवाचार में सक्रिय भागीदारी निभाने की सलाह दी।
उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों की वैज्ञानिक सोच, नवाचार की भावना और राष्ट्र के प्रति जिम्मेदारी विकसित भारत @2047 के लक्ष्य को पूरा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
कार्यक्रम के दौरान मैथिली विभागाध्यक्ष डॉ. ध्रुव ज्योति कुमार सिंह और बाह्य परीक्षक नियंत्रक डॉ. पी. एन. राय को विभागाध्यक्ष डॉ. अनिल कुमार ने अंगवस्त्र देकर सम्मानित किया। वहीं, डॉ. धर्मेंद्र कुमार यादव ने डॉ. अनिल कुमार को पौधा भेंट किया। प्राचार्य डॉ. रंजीत कुमार सिंह को भी अंगवस्त्र प्रदान कर सम्मानित किया गया।

इस अवसर पर वनस्पति विज्ञान विभागाध्यक्ष डॉ. मीरा चौधरी, अर्थशास्त्र विभागाध्यक्ष डॉ. संजीव सिंह सहित अन्य शिक्षक उपस्थित रहे। शिक्षकों ने विद्यार्थियों के शोध प्रयासों की सराहना करते हुए उन्हें भविष्य में भी लगन और वैज्ञानिक दृष्टिकोण के साथ अध्ययन एवं अनुसंधान जारी रखने के लिए प्रेरित किया।
कार्यक्रम के माध्यम से विद्यार्थियों को अपने शोध निष्कर्षों को व्यवस्थित ढंग से प्रस्तुत करने, वैज्ञानिक तथ्यों के आधार पर विचार व्यक्त करने और अनुसंधान कौशल विकसित करने का अवसर मिला।



