साहिबगंज में पहाड़िया किसानों को मिलेगा स्वरोजगार का अवसर, मधुमक्खी पालन से बढ़ेगी आय।
पतना एवं राजमहल प्रखंड के 24 चयनित किसानों को दिया जा रहा तीन दिवसीय प्रशिक्षण, प्रशिक्षण के बाद प्रत्येक किसान को मिलेंगे 20 मधुमक्खी बॉक्स और शहद निकालने की किट।

साहिबगंज। जिले में पहाड़िया समुदाय के किसानों को आत्मनिर्भर बनाने और उनकी आजीविका को सशक्त करने के उद्देश्य से झारखंड स्टेट लाइवलीहुड प्रमोशन सोसाइटी (JSLPS) की ओर से तीन दिवसीय गैर-आवासीय मधुमक्खी पालन एवं प्रबंधन प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू किया गया है। इसके तहत पतना एवं राजमहल प्रखंड के चयनित 24 पहाड़िया किसानों को मधुमक्खी पालन की वैज्ञानिक तकनीकों, शहद उत्पादन और विपणन से संबंधित जानकारी दी जा रही है।
प्रशिक्षण कार्यक्रम का उद्घाटन जिला उद्यान पदाधिकारी रविकांत रजक एवं जिला आजीविका प्रबंधक अनिरुद्ध कुमार ने संयुक्त रूप से किया। इस पहल का उद्देश्य किसानों को पारंपरिक आजीविका के साथ आय के अतिरिक्त साधन उपलब्ध कराना तथा मधु उत्पादन को स्वरोजगार के रूप में विकसित करने के लिए प्रोत्साहित करना है।

प्रशिक्षण के दौरान गोस्वामी मधुमक्खी पालन संस्था के प्रशिक्षकों द्वारा किसानों को मधुमक्खियों के उचित प्रबंधन, मधुमक्खी बक्सों की देखभाल, अनुकूल वातावरण तैयार करने, सुरक्षित तरीके से शहद निकालने और उसकी गुणवत्ता बनाए रखने की जानकारी दी जा रही है। इसके साथ ही किसानों को शहद के विपणन और बाजार तक अपनी उपज पहुंचाने के तरीकों से भी अवगत कराया जा रहा है, ताकि वे उत्पादन के साथ बेहतर आय अर्जित करने की दिशा में आगे बढ़ सकें।
योजना के तहत प्रशिक्षण पूरा होने के बाद प्रत्येक चयनित किसान को मधुमक्खी पालन शुरू करने के लिए 20 मधुमक्खी बॉक्स और शहद निकालने की किट उपलब्ध कराई जाएगी। इससे किसानों को प्रशिक्षण में मिली जानकारी का व्यावहारिक उपयोग करने और अपने स्तर पर शहद उत्पादन शुरू करने में मदद मिलेगी।
मधुमक्खी पालन को बढ़ावा देने के लिए वन विभाग का सहयोग भी लिया जाएगा। विभिन्न विभागों के समन्वय से किसानों को आवश्यक मार्गदर्शन और सहयोग उपलब्ध कराने का प्रयास किया जाएगा। इस पहल से ग्रामीण क्षेत्रों में स्वरोजगार के नए अवसर विकसित होने के साथ-साथ स्थानीय शहद उत्पादन को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।

कार्यक्रम में ग्राम प्रधान सूरज पहाड़िया सहित JSLPS, वन विभाग एवं उद्यान विभाग के प्रतिनिधि और स्थानीय ग्रामीण उपस्थित रहे। यह पहल पहाड़िया समुदाय के किसानों को प्रशिक्षण, तकनीकी जानकारी और आवश्यक उपकरण उपलब्ध कराकर आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। बेहतर उत्पादन, गुणवत्ता और बाजार तक पहुंच सुनिश्चित होने से मधुमक्खी पालन किसानों की आय बढ़ाने तथा साहिबगंज के शहद को विशिष्ट पहचान दिलाने में सहायक हो सकता है।




